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समाचारदेश Alert Star Digital Team Apr 5, 2021 09:04 PM

अभिनंदन की तरह पति को सुरक्षित वापस लाएं प्रधानमंत्री

अभिनंदन की तरह पति को सुरक्षित वापस लाएं प्रधानमंत्री

अभिनंदन की तरह पति को सुरक्षित वापस लाएं प्रधानमंत्री

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में शनिवार को हुए जवानों और नक्‍सलियों के बीच मुठभेड़ में 24 जवान शहीद हो गए। 31 से ज्‍यादा जवान घायल हो गए। वहीं एक सीआरपीएफ का एक 35 वर्षीय कोबरा कमांडो लापता है। उसका नाम राकेश्वर सिंह मनहास है। सोमवार को नक्सलियों ने स्थानीय पत्रकारों को सूचना दी कि लापता जवान उनके कब्जे में है। साथ ही उन्होंने जवान को नुकसान न पहुंचाने की बात भी कही है। जवान की पत्नी ने पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से अपील करते हुए कहा कि 'मेरे पति को वापस ले आइए। अगर वह सुरक्षित हैं तो उन्हें वापस ला दो जैसे अभिनंदन को पाकिस्तान से वापस लाया था।'

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जवान को मुठभेड़ स्थल से थोड़ी दूर एक गांव में रखा गया है। वहां आसपास नक्सलियों की भी मौजूदगी है। इस बीच जवान की पत्नी मीनू ने नक्सलियों से अपने पति को रिहा करने की अपील की है। सीआरपीएफ कोबरा बटालियन के जवान राकेश्वर सिंह मनहास कोथियन जम्मू कश्मीर निवासी हैं। उनकी पदस्थापना बीजापुर जिले में है। नक्सलियों के खिलाफ आपरेशन में वह भी शामिल थे। मुठभेड़ के बाद से उन्हें लापता बताया जा रहा था।

राकेश्वर सिंह के चचेरे भाई गोविंद सिंह का कहना है कि हमने सीआरपीएफ कंटोल रूम में बात किया तो बताया गया कि उनके बारे में भी कोई खबर नहीं है। राकेश्वर सिंह की तलाश की जा रही है और जैसे ही कोई सूचना मिलता है फौरन बताया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ सीआरपीएफ सूत्रों ने ये जानकारी दी है कि राकेश्वर सिंह नक्‍सलियों के कब्‍जे में हैं। नक्‍‍सलियों ने उन्‍हें बंधक बना रखा है।

मीनू मनहास ने बताया कि मेरी उनसे आखिरी बार बात शुक्रवार को हुई थी। उस समय रात के करीब 9 से 10 बीच का समय था। बातचीत में उन्‍होंने कहा था कि मैं ऑपरेशन ड्यूटी पर जा रहा हूं कल आकर बात करुंगा। सीआरपीएफ के वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि इस दावे को लेकर हमारे पास कोई ठोस सबूत नहीं है लेकिन फिर इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। सीआरपीएफ के अधिकारी ने बताया कि सुरक्षाबलों की कई इकाइयां अभी भी जंगलों में राकेश्वर सिंह की तलाश कर रही है। सर्च अभियान के दौरान जो इनपुट मिल रहे हैं उससे लगता है कि माओवादियों ने राकेश्वर सिंह क को बंधक बना लिया है।

सूचना का अभाव सेना को इस बात पर सोचने के लिए मजबूर कर रहा है कि राकेश्वर सिंह नक्सलियों के कब्जे में हो सकते हैं। यह शक इसलिए भी और गहराता जा रहा है क्योंकि एक स्थानीय पत्रकार को अपुष्ट फोन कॉल आई थी जिसमें राकेश्वर सिंह के नक्सलियों के कब्जे में होने की बात कही गई था जिस शख्स ने फोन किया था उसने खुद को हिडमा बताया था। हिडमा पीजीएलए की बटालियन नंबर एक का कमांडर है जिसका नाम इस अटैक के बाद सामने आ रहा है। हालांकि इस खबर ने सुरक्षाबलों के माथे पर चिंता की लकीर ला दी है लेकिन राकेश्वर सिंह के परिजनों को थोड़ी राहत जरूर मिली है।

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