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समाचारअर्थ व बाजार Alert Star Digital Team Jan 26, 2021 12:52 AM

भारत के मुकाबले हर मोर्च पर फेल हुई चीन की वैक्सीन

भारत के मुकाबले हर मोर्च पर फेल हुई चीन की वैक्सीन

भारत के मुकाबले हर मोर्च पर फेल हुई चीन की वैक्सीन

भारत के मिशन वैक्सीन मैत्री से चीन बुरी तरह बौखला गया है. यही वजह है कि जिनपिंग का भोंपू मीडिया यानी ग्लोबल टाइम्स ने मेड इन इंडिया वैक्सीन को बदनाम करने की साजिश रचना शुरू कर दिया है. चीन की प्रोपेगेंडा फैक्ट्री पूरी तरह एक्टिव हो गई है. भारतीय वैक्सीन के असर से लेकर उत्पादन क्षमता तक को लेकर मनगढ़ंत कहानियां गढ़ी जा रही हैं. इसकी वजह भारत की वैक्सीन पर दुनिया का विश्वास और चीन की वैक्सीन पर अविश्वास. करीब आधी दुनिया मेड इन इंडिया वैक्सीन की डिमांड कर चुकी है और वसुधैव कुटुंबकम की विचारधारा वाला भारत भी कोरोना से जंग में सबका साथ दे रहा है. एक ओर खुद वैक्सीनेशन प्रोग्राम चला रहा है, तो दूसरी ओर पड़ोसी मित्र देशों समेत बाकी मुल्कों को भी कोरोना से जंग में मजबूत कर रहा है.

भारत अब तक बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, म्यांमार, मालदीव, मॉरीशस, सेशल्स इन सात पड़ोसी देशों को वैक्सीन की 50 लाख डोज गिफ्ट कर चुका है. जबकि भारत के प्रयासों के उलट चीन ने बहुत कम और उन देशों को वैक्सीन देने का ऑफर दिया है जहां वो राजनीतिक और आर्थिक रूप से अपने पैर पसारना और प्रभाव जमाना चाहता है और उनमें से भी कई देशों को भारत से ही ज्यादा उम्मीदें हैं. नेपाल मे ड्रग रेगुलेटर ने अभी तक चीनी वैक्सीन को मंजूरी नहीं दी है.

वहीं, मालदीव सरकार के सूत्रों का कहना है कि चीन की तरफ से कोविड-19 वैक्सीन की किसी भी तरह की सप्लाई को लेकर कोई संकेत नहीं मिले हैं. इतना ही नहीं चीन के करीबी देश कंबोडिया ने भी भारत से वैक्सीन देने का अनुरोध किया है. टीके की सप्लाई को लेकर बांग्लादेश के साथ भी चीन का गतिरोध है. क्योंकि चीन के लिए पैसा पहले है, दोस्ती बाद में.

दरअसल, चीन की कंपनी सिनोफार्म बांग्लादेश को अपनी सिनोवैक वैक्सीन देने पर राजी हुई थी. लेकिन शर्त यह थी कि बांग्लादेश को क्लिनिकल ट्रायल में होने वाले खर्च में हिस्सा देना पड़ेगा. ये शर्त बांग्लादेश ने मानने से इनकार कर दिया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की बनाई कोविशील्ड की 3 करोड़ डोज के लिए भारत से समझौता किया, जिसमें से 3 लाख डोज की खेप बांग्लादेश पहुंच भी गई है. वैक्सीन की कॉमर्शियल सप्लाई की लिस्ट में कई और देश भी हैं.

चीन की वैक्सीन से उठा भरोसा

इनमें सऊदी अरब, साउथ अफ्रीका, मोरक्को और ब्राजील का भी नाम है. ब्राजील वो मुल्क है, जहां चीन की वैक्सीन ने सबसे पहले दस्तक दी थी. ब्राजील में चीन की सिनोवेक कंपनी की वैक्सीन कोरोनावैक के ट्रायल भी हुए हैं. लेकिन उसके नतीजे और बाकी देशों में हुए ट्रायल के नतीजों ने दुनिया का चीन की वैक्सीन पर से भरोसा उठा दिया है.

ब्राजील में चीन की कोरोनावैक 50 फीसदी तो तुर्की में 91.25 फीसदी असरदार पाई गई. जबकि इंडोनेशिया में ये आंकड़ा 65.3 फीसदी रहा. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर चीन की कोरोना वैक्सीन के असर में इतना अंतर कैसे. इसके अलावा चीन की एक और सरकारी कंपनी सिनोफर्म की वैक्सीन में 73 तरह के साइड इफेक्ट्स होने का दावा खुद चीन के एक बड़े डॉक्टर कर चुके हैं. यही वजह है कि चीन को अपनी कोविड-19 वैक्सीन के लिए खरीदार तलाशने में नाको चने चबाने पड़ रहे हैं.

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