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फर्जी पट्टे बनवाकर पीएम आवास योजना का लाभ लेने वाले मुश्किलों में
नगर निगम में फर्जी पट्टे बनवाकर पीएम आवास योजना का लाभ लेने का मामला सामने आया है। अब इसमें शामिल लोगों की मुश्किलें बढ गई है। इसकी शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. आनंद दीक्षित ने की थी। जिसके बाद जांच मे 20-25 पट्टे पकडाए हैं। सभी संदिग्ध पट्टे नेहरूनगर के होना बताए गए हैं। अब यह मामला सत्यापन के लिए अनुविभागीय अधिकारी बुरहानपुर को भेजा जाएगा।
पूरे मामले में निगम इंजीनियर सगीर अहमद की भूमिका अहम बताई जा रही है। उनके द्वारा ही पीएम आवास योजना के आवेदनों को अंतिम रूप देने का काम किया जाता है। जिसमें उन्होंने खुलकर मनमानी की और फर्जी पट्टे के साथ आवेदन करने वाले लोगों को योजना का लाभ दे दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कईं प्रकरणों में तो फाइल से पट्टे भी गायब कर दिए गए हैं। इसे लेकर आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. आनंद दीक्षित ने एसडीएम, नगर निगम आयुक्त से मांग की कि रिकार्ड की सुरक्षा की जाए। साथ दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
इंजीनियर सगीर की भूमिका की जांच की मांग
नगर निगम में इंजीनियर सगीर अहमद द्वारा पीएम आवास योजना में गडबडी कर अपात्र लोगों को भी पीएम आवास का लाभ दे दिया गया। उनकी कार्यप्रणाली की जांच की मांग की गई है। साथ ही अब तक उन्होंने जितने भी पीएम आवास स्वीकृत किए हैं उसके रिकार्ड चेक करने की भी मांग की जा रही है, क्योंकि महज शुरूआती जांच में ही करीब 25 से अधिक एक हितग्राही सामने आ चुके हैं जिनके द्वारा फर्जी पट्टे बनवाकर योजना का लाभ लिया गया है। तो वहीं पिछले दिनों नगर निगम की टैक्स रसीद में भी फर्जीवाडा कर योजना का लाभ लिए जाने का मामला सामने आ चुका है। उस मामले में भी आयुक्त नगर निगम बीडी भूमरकर ने कलेक्टर से अनुमोदन तो ले लिया, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं की। इसी तरह एक अधिवक्ता मनोज अग्रवाल द्वारा भी पीएम आवास का फर्जीवाडा उजागर किया गया था। उसमें भी नगर निगम अधिकारियों, कुछ पार्षदों की भूमिका संदेह के घेरे में है, लेकिन निगम अधिकारी कार्रवाई के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं।
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