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समाचारदेश Alert Star Digital Team Jul 30, 2020 09:21 PM

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बनेगा सामाजिक समरसता का केंद्र: मिलिंद परांडे

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बनेगा सामाजिक समरसता का केंद्र: मिलिंद परांडे

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बनेगा सामाजिक समरसता का केंद्र: मिलिंद परांडे

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के केन्द्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने गुरुवार को नागपुर में आयोजित पत्रकार परिषद में बताया कि मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्रीराम ने सामाजिक समरसता और सशक्तिकरण का संदेश स्वयं के जीवन से दिया। उनके मंदिर के पूजन में प्रयुक्त होने वाले देश भर की हजारों पवित्र नदियों का जल व पावन तीर्थों की रज, सम्पूर्ण भारत को एकाकार करके राष्ट्रीय एकात्मता का दर्शन कराएंगे।

परांडे ने कहा कि भगवान श्री राम द्वारा अहिल्या उद्धार, शबरी व निषादराज से प्रेम और मित्रता सामाजिक समरसता के अनुपम उदाहरण हैं। राम जन्मभूमि का शिलान्यास 1989 में अनेक पूज्य संतों की उपस्थिति में अनुसूचित जाति के कामेश्वर चौपाल के कर कमलों से ही संपन्न हुआ था जो आज श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के न्यासी भी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हजारों पवित्र तीर्थ क्षेत्रों की पावन माटी एवं पवित्र नदियों का जल, आनंद व हर्षोल्लास के वातावरण में श्रीराम जन्मभूमि पूजन के लिए देश भर से भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि बात चाहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उद्गम स्थल नागपुर की हो या संत रविदास जी के काशी स्थित जन्मस्थली की, सीतामढ़ी विहार से महर्षि वाल्मीकि आश्रम की हो या विदर्भ (महाराष्ट्र) के गोंदिया जिलान्तर्गत कचारगड की, झारखंड के रामरेखाधाम की हो या मध्यप्रदेश के टंट्या भील की पुण्य भूमि की, श्री हरमंदिर साहिब अमृतसर पंजाब की हो या डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के जन्मस्थान महू की, दिल्ली के जैन लाल मंदिर की हो या उस वाल्मीकि मंदिर की जहां महात्मा गांधी 72 दिन रहे थे, ये सब मात्र कतिपय उदाहरण ही हैं।

विहिप महामंत्री ने आह्वान किया कि पांच अगस्त को हम सभी राम भक्त अपने-अपने घरों, प्रतिष्ठानों, मठ-मन्दिरों, आश्रमों इत्यादि स्थानों पर ही यथासम्भव सामूहिक बैठकर प्रातः 10.30 बजे से अपने-अपने आराध्य देव का भजन-पूजन कीर्तन स्मरण करें, पुष्प समर्पित करें, आरती करें तथा प्रसाद बांटे। अयोध्या का भूमि पूजन कार्यक्रम समाज को लाइव दिखाने की यथासम्भव व्यवस्था करें। घरों, मोहल्लों, ग्रामों, बाज़ारों, मठ-मन्दिरों, गुरुद्वारों, आश्रमों इत्यादि में साज-सज्जा कर सायंकाल में दीप जलायें। मंदिर निर्माण के लिए यथाशक्ति दान का संकल्प लें। प्रचार के सभी साधनों का उपयोग करते हुए समाज के अधिकाधिक लोगों तक इस भव्य कार्यक्रम को पहुंचाएं। साथ ही इन सभी योजनाओं व कार्यक्रमों में कोरोना से रक्षा के सभी साधन अपनायें तथा इस सम्बन्ध में आए सरकारी व प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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