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एलएसी के विवादित इलाकों से पीछे हटनी शुरू हुई चीनी सेना
लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन के बीच करीब दो महीने से जारी तनाव को खत्म करने के लिए सेनाओं की वापसी का सिलसिला आखिरकार शुरू हो गया है। लेकिन चीन के पुराने विश्वासघाती रूख को देखते हुए भारतीय सेना इस बार कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है और इसलिए वह इस पूरे घटनाक्रम की बेहद सतर्कता के साथ निगरानी कर रही है। शीर्ष सरकारी सूत्रों ने सोमवार को बताया कि सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया में दोनों देशों के बीच सैन्य, कूटनीतिक स्तर पर लगातार जारी बातचीत के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन जुलाई को किए गए लेह दौरे और उसके तुरंत बाद पांच जून को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच दो घंटे तक वीडियो कॉल पर हुई विस्तृत बातचीत में बनी सहमति ने बेहद अहम भूमिका निभाई है।
पीपी-14 से पीछे हटी पीएलए
चीनी सेना गलवान घाटी के सबसे विवादित पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 के अलावा हॉट स्प्रिंग और गॉग्रा पोस्ट के इलाके से लगभग डेढ़ से दो किलामोटर पीछे हट गई है। पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 से उसने अपने टेंट, गाड़ियां और अन्य ढांचे भी हटा लिए हैं। इसी अनुपात में भारत ने भी अपने सैनिकों को विवाद वाली जगहों से पीछे कर लिया है। लेकिन पेंगांग त्सो झील के इलाके में हालात जस के तस तनावपूर्ण ही बने हुए हैं और चीन ने यहां से एक इंच भी अपनी सेना को पीछे नहीं किया है। आने वाले वक्त में भारत-चीन के बीच जारी बातचीत निबार्ध गति से चलती रहेगी। जल्द ही कोर कमांडर स्तर की बैठक होने की भी संभावना है। जिसमें पेंगांग त्सो झील पर तनाव खत्म करने के मसले को भारतीय पक्ष एक बार फिर जोरशोर से उठा सकता है।
सेना करेगी जमीनी सर्वे से पुष्टि
चीन के साथ एलएसी से सेनाओं की वापसी के साथ तनाव घटाने को लेकर पिछले महीने 6 में 22 और 30 जून को तीन दौर की सैन्य कमांडर स्तर की बैठकें हो चुकी हैं। हर बार इनमें तनाव कम को लेकर अपनी सहमति देने के बाद भी चीनी सेना एक इंच भी पीछे नहीं हटी। बल्कि उसने 15 जून को गलवान घाटी के पेट्रोलिंग प्वाइंट -14 पर धोखे से अंजाम दी गई खूनी झड़प में 20 भारतीय सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना में 40 चीनी सैनिक भी मारे गए थे। ऐसे में इस बार भारत की सेना ने चीन पर किसी तरह का कोई विश्वास न करते हुए सेनाओं की वापसी की इस प्रक्रिया का जमीनी सर्वेक्षण करने का फैसला लिया है। जिसमें गलवान घाटी के आसपास के विवादित इलाकों में तैनात सैन्य कमांडर जमीनी स्तर पर पीएलए सेना की वापसी को लेकर व्यापक विश्लेषण करेंगे और उससे पुख्ता तौर पर संतुष्ट होने के बाद अपनी रिपोर्ट उत्तरी कमांड के प्रमुख ले़ जनरल वाई.के.जोशी और सेना मुख्यालय को सौंपेंगे।
बनेगा बफर जोन
एलएसी से सेनाओं की वापसी की यह प्रक्रिया चरणबद्ध ढंग से आगे बढ़ेगी। एक बार दोनों सेनाओं द्वारा मौजूदा विवादित जगह से बराबर की दूरी पर वापसी के बाद बीच में खाली हुई जगह को बफर जोन बनाया जाएगा। इस बफर जोन में भविष्य में नियमित गश्त के दौरान दोनों देशों की सेनाएं नहीं जाएंगी। इससे एलएसी पर विवाद या तनातनी के हालात उत्पन्न होने से बचा जा सकेगा।
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