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समाचारदेश Alert Star Digital Team Jun 17, 2020 07:33 PM

कोरोना महामारी के बीच विश्व में भारतीय औषधियों की चार गुना बढ़ी मांग: डॉ. शास्त्री

कोरोना महामारी के बीच विश्व में भारतीय औषधियों की चार गुना बढ़ी मांग: डॉ. शास्त्री

कोरोना महामारी के बीच विश्व में भारतीय औषधियों की चार गुना बढ़ी मांग: डॉ. शास्त्री

कोरोना महामारी ने विश्व की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। आर्थिक मंदी के इस दौर में नागरिकों की दुश्वारियां बढ़ी हैं। इन सबके बीच आयुर्वेद एक ऐसा क्षेत्र है जहां इस आपदा के समय में अवसर की आपार संभावनाएं है। कोरोना काल के तीन-चार महीनों में ही आयुर्वेद के उत्पादों की बिक्री 30-40 फीसदी बढ़ी है। इससे औषधीय पौधे लगाने वाले किसानों के साथ इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी लाभ मिल रहा है।

 

आपदा को अवसर में बदलने की दिशा में काम करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस क्षेत्र के लिए 4000 करोड़ रुपये का विशेष आर्थिक पैकेज प्रदान करने की घोषणा की है। आयुष मंत्रालय के तहत आने वाले नेशनल मेडिशनल प्लांट बोर्ड ने औषधीय पौधों की खेती को लेकर ब्लू प्रिंट तैयार किया है, जिससे देश में न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि औषधीय खेती में देश को दुनिया में भी विशेष पहचान मिलेगी। जड़ी-बूटियों के शोध और क्षेत्र में संभावनाओं के इस बारे में हिन्दुस्थान समाचार की विशेष संवाददाता विजयलक्ष्मी ने नेशनल मेडिशनल प्लांट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. जेएलएन शास्त्री से खास बात की। पेश है विशेष बातचीत के मुख्य अंश-

सवाल: औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने हाल ही में इस क्षेत्र को 4000 करोड़ रुपये की राशि देने की बात कही है। इस फंड से किस तरह औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा मिलेगा?

देखिए, कोरोना काल में औषधीय पौधों और इसके गुणों के बारे में लोगों में जागरुकता बढ़ी है। इसलिए लोग अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए औषधीय पौधों का सेवन करने लगे हैं। आयुर्वेदिक इंडस्ट्री में 4-6 गुना मांग बढ़ गई है। खासकर अश्वगंधा, सतावरी, गिलोय, तुलसी जैसे गुणकारी पौधों की मांग तेजी से बढ़ी है। आने वाले समय में अगर इन औषधीय पौधों की खेती को नहीं बढ़ाया गया तो मांग की पूर्ति करना मुश्किल हो जाएगा। नेशनल मेडिशनल प्लांट बोर्ड ने 10 लाख हेक्टेयर भूमि पर औषधीय पौधे लगाने की योजना बनाई है। सभी राज्यों को इस योजना से जोड़ा जाएगा। वृक्ष आयुष नाम के इस अभियान में औषधीय पौधों के कई कॉरिडोर तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें से अशोक सेतु कॉरिडोर, गूगल कॉरिडोर, एल्पाइन कॉरिडोर शामिल हैं। मौजूदा समय में 85 प्रतिशत औषधीय पौधों, जड़ी बूटियों की आपूर्ति वनों से हो रही है। इसके कारण कई औषधीय पौधों की प्रजाति विलुप्त भी हो रही हैं। जड़ी बूटियों की खेती पिछले 19 सालों में ढाई लाख हेक्टेयर तक सीमित है, जो काफी कम है। कोरोना काल में कई मजदूर अपने घरो को लौटे हैं, यह एक सही समय है जब हम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को इनकी सहायता से मजबूत कर सकेंगे और औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा दे सकेंगे।

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