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समाचारदेश Alert Star Digital Team May 15, 2020 07:48 PM

मोदी सरकार की स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत नीति से सदमे में चीन

मोदी सरकार की स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत नीति से सदमे में चीन

मोदी सरकार की स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत नीति से सदमे में चीन

महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि करोना काल में अब स्वदेशी आत्मनिर्भरता से भारत का कायापलट किया जाएगा. अगर इस बात से सबसे ज्यादा आहत कोई देश है तो वह मुल्क है पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना. यही वजह है कि जब से देश में करोना संक्रमण ने दस्तक दी, तब से चाइनीस राजनयिकों के लेख अंग्रेजी अखबारों में ज्यादा नजर आने लगे हैं. इसके जरिये कभी चीन वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट को हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ता हुआ नजर आता है तो कभी ड्रैगन हाथी की दोस्ती कराता है कभी हिंदी-चीनी भाई भाई के पुराने राग के साथ भारत सरकार की नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश लगा है.

जब मोदी सरकार ने भारत के साथ साझा सीमा रखने वाले देशों के एफडीआई पर अंकुश लगाया, तभी से चीन चौकस हो गया था. उसे इस बात का अंदाजा था कि अब हिंदुस्तान में सीधी उंगली से घी नहीं निकलेगा. लिहाजा भारत के लोकतंत्र को ही उसके खिलाफ हथियार बनाने की कोशिश की गई.

हिंदुस्तान दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी विदेशी राजनयिकों को भी है यहां फ्री प्रेस के जरिए वह अपना विचार रख सकते हैं. इसका फायदा उठाकर भारत चीन संबंधों के 70 साल पूरे होने पर चीन ने फुल पेज विज्ञापन दिए अपने राजनयिकों के जरिए भारत के जनमानस में चीन की छवि को सुधारने की कोशिश भी की है.

चीनी राजनयिक, चीनी अधिकारी, चीनी लेखक भारतीय अखबारों में खासतौर पर अंग्रेजी माध्यम के अखबारों में अभिव्यक्ति की आजादी की छूट के साथ लेखन कर सकते हैं, पर यह अधिकार भारतीय राजनयिकों को बीजिंग में हासिल नहीं है. चीन के अखबारों में भारतीय राजनयिक अरुणाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर या पाकिस्तान पर लेख नहीं लिख सकते हैं, क्योंकि चीन में तानाशाही है हिंदुस्तान में जम्हूरियत.

इसी का फायदा उठाकर चीन की चालाक कोशिश है कि अखबारों के जरिए भारतीय जनमानस में हिंदी चीनी भाई भाई का राग उसी तरह से गाया जाए जैसे तिब्बत को हथियाते समय, 1962 की जंग से पहले चीन गाया करता था. पर पड़ोसी ड्रैगन को याद रखना होगा यह माओ का मुल्क नहीं, गांधी का भारत है, जिसके स्वदेशी अभियान ने अंग्रेजी वस्तु की होली जला दी थी तो चीन की चीजें किस हद तक टिक पाएगी

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