होम यदि बदला कोरोना वायरस का स्वरूप तो बढ़ सकती है समस्या
यदि बदला कोरोना वायरस का स्वरूप तो बढ़ सकती है समस्या
आज पूरी दुनिया वैश्विक महामारी कोरोना से जूझ रही है। भारत भी उससे दो-दो हाथ कर रहा है। इसके पहले भी प्लेग, कालरा, हैजा, पोलियो, फ्लू जैसी महामारियों ने इंसानों को खतरे में डाला है लेकिन एक समय के बाद टीके, कारगर दवाओं व कुछ बीमारियों के प्रति हर्ड इम्यूनिटी विकसित होने से उन पर अंकुश लगा है। कुछ संक्रामकबीमारियों का वजूद काफी हद तक खत्म हो चुका है। जिन बीमारियों के वायरस के स्ट्रेन में बदलाव नहीं होता। उनके प्रति हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो जाती है।
जब किसी संक्रामक बीमारी से 60 से 70 फीसद लोग संक्रमित हो जाते हैं तो यह देखा गया है कि उसके प्रति लोगों में प्रतिरोधकता उत्पन्न हो जाती है। कोराना वायरस का संक्रमण भी तेजी से फैल रहा है। फिर भी जिन देशों में इसके संक्रमण से अधिक लोग चपेट में आए हैं वहां भी अभी 10 से 20 फीसद लोग इससे संक्रमित नहीं हुए हैं। कई जगहों पर तो सिर्फ तीन से पांच फीसद तक ही लोग संक्रमित हुए हैं। इसलिए इसके प्रति हर्ड इम्यूनिटी विकसित होने में वक्त लगेगा। फ्लू वायरस अक्सर अपना स्वरूप बदलते हैं। यही वजह है कि फ्लू के लिए हर साल या दूसरे साल अलग टीके बनते हैं।
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