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Alert Star Digital Team Apr 9, 2020 05:18 PM

मोगली के दीवानों के लिए खुशखबरी, दूरदर्शन पर शुरु हुआ जंगल बुक

मोगली के दीवानों के लिए खुशखबरी, दूरदर्शन पर शुरु हुआ जंगल बुक

मोगली के दीवानों के लिए खुशखबरी, दूरदर्शन पर शुरु हुआ जंगल बुक

लॉकडाउन के दौरान शहरों में सन्नाटे का आलम है। ऐसे में दूरदर्शन ने दर्शकों के लिए जंगल की सैर का बंदोबस्त किया है। करीब 27 साल बाद उसने 'जंगल बुक' का प्रसारण फिर शुरू कर दिया है। मूल रूप से जापानी में बना यह एनिमेशन धारावाहिक पहली बार 1993 में दूरदर्शन पर दिखाया गया था और बच्चों के साथ-साथ बड़ों में काफी लोकप्रिय रहा था, क्योंकि बड़ों में भी बचपन कहीं न कहीं तो दबा ही रहता है।

इसके मोगली, शेर खान, बघेरा, बालू जैसे किरदार घर-घर पहचाने जाने लगे थे और 'जंगल-जंगल बात चली है पता चला है' राष्ट्रीय गीत की तरह गुनगुनाया जाता था। विलायती 'जंगल बुक' में ठेठ देशी नामों को सुनकर कुछ लोगों को हैरानी जरूर हुई थी, लेकिन ब्रिटिश लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने 1895 में लिखी गई अपनी किताब 'द जंगल बुक' में किरदारों के यही नाम रखे थे। साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले किपलिंग का जन्म भारत (मुम्बई) में हुआ था और शायद यहां के जंगलों में घूमते हुए उन्हें यह नाम सूझे हों।

ब्रिटेन में बसने के बाद भी वे अपनी जन्मभूमि मुम्बई को नहीं भूले। अपनी एक छोटी-सी कविता में उन्होंने मुम्बई को 'मदर ऑफ सिटीज टू मी' (मेरे लिए शहरों की मां) बताया था। उनकी किताब 'द जंगल बुक' में एक ऐसे बच्चे मोगली की कहानी है, जो अपने परिजनों से बिछुड़ जाता है। जंगल में भेडिय़ों की टोली उसे पालती है। बघेरा नाम का काला पेंथर उसका दोस्त भी है और गुरु भी, जो उसे जंगल के कायदे सिखाता है। बालू नाम के भालू और का नाम के अजगर से भी मोगली की दोस्ती है, लेकिन बंगाली टाइगर शेर खान को मोगली फूटी आंख नहीं सुहाता। वह उसे 'इंसान का बच्चा' बताकर जंगल के जानवरों को उसके खिलाफ भडक़ाने की तिकड़मों में जुटा रहता है। क्या मोगली अपने असली मां-बाप से मिल पाएगा? रुडयार्ड किपलिंग की किताब में यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है।

उन्होंने निहायत सूझ-बूझ से एक ऐसी कहानी रची, जिसकी बुनियादी लय इंसान और जंगल के जानवरों के गहरे रिश्ते हैं। किपलिंग के देहांत (1936) के 31 साल बाद उनकी इस क्लासिक रचना पर हॉलीवुड में पहली फिल्म 'द जंगल बुक' (1967) डिज्नी स्टूडियो ने बनाई थी। यह एनिमेशन फिल्म थी। वहां दूसरी फिल्म भी इसी नाम से 2016 में बनी। इसमें मोगली समेत सभी किरदार एनिमेशन की दुनिया से निकलकर चलते-फिरते नजर आए। मोगली का किरदार नील सेठी ने अदा किया। इस फिल्म ने भारत समेत तमाम दुनिया में जबरदस्त कारोबार किया।

भारत में यह शाहरुख खान की 'फैन' के साथ सिनेमाघरों में पहुंची थी और 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार कर इसने ट्रेड पंडितों को चौंका दिया था। इसके हिन्दी संस्करण के संवाद ओम पुरी, इरफान खान, नाना पाटेकर और प्रियंका चोपड़ा की आवाज में डब किए गए थे। नैसर्गिक जंगलों और स्वच्छंद जानवरों की रोमांचक दुनिया पर हॉलीवुड में 'टच द स्काई', हटारी, टार्जन एंड द मर्मेड्स, 'ड्रम्स ऑफ डेस्टिनी' और 'टार्जन एंड द हंट्रेस' सरीखी कई उल्लेखनीय फिल्में बन चुकी हैं। हां, 'टार्जन द एप मैन' थोड़ी जंगल में मंगल टाइप की फिल्म थी। इसमें जंगलों और टार्जन के बजाय हॉलीवुड की बोल्ड हीरोइन बो डेरेक के शरीर सौष्ठव ने दर्शकों को ज्यादा लोटन कबूतर किया। इसी फिल्म से फटाफट प्रेरणा हासिल कर बॉलीवुड ने 'टार्जन' (1985) बनाई। निर्देशक बी. सुभाष की इस फिल्म में हेमंत बिर्जे को टार्जन बनाया गया।

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