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सहारनपुर : भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर कांशीराम जयंती 15 मार्च को बनाएंगे राजनीतिक दल
जनपद सहारनपुर के कस्बा छुटमलपुर निवासी 34 वर्षीय अंबेडकरवादी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर इस माह की 15 मार्च को कांशीराम जयंती के मौके पर राजनीतिक दल का गठन करने वाले है। यह दल 2022 के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार भी उतारेगा। दलितों नौजवानो के बीच पिछले पांच-छह वर्षों से सक्रिय चंद्रशेखर मायावती की बहुजन समाज पार्टी के लिए नई चुनौती के रूप में उभर रहा है। राजनैतिक जागरूकता बढने के साथ-साथ बसपा में चमारोें को जाटवों से समय-समय पर चुनौती मिलती रही है और कई प्रमुख चमार नेताओं को मायावती ने अपमानित कर बसपा से बाहर निकालने का काम किया है।
यह भी एक कारण चंद्रशेखर की भीम आर्मी के उभार का सहारनपुर जनपद में खासतौर से और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आमतौर से माना जा रहा है। चंद्रशेखर ने आज बताया कि नई पार्टी के गठन की प्रक्रिया के दौरान उनके संपर्क अभियान में उन्हें अच्छा समर्थन मिल रहा हैै। नए दलित युवा धार्मिक अल्पसंख्यक और पिछडा वर्ग के लोग उनके साथ आएंगे ही साथ ही बहुजन समाज पार्टी के ऐसे नेता जिनका वहां दम घुट रहा हैै। वह भी उनके साथ आने वाले है। उनकी पार्टी का वर्तमान में इरादा अपने बलबूते चुनाव लडने का है। हालाकि चंद्रशेखर को नजदीक से जानने वाले एक प्रमुख युवा सियासी नेता ने इस संवाददाता से बातचीत में दावा किया कि गैर भाजपाई वोटो के बिखराव को रोकने के लिए भीम आर्मी द्वारा स्थापित नए राजनैतिक दल का सपा, रालोद और कांग्रेस के साथ गठबंधन होगा।
चंद्रशेखर पिछले तीन वर्षों के दौरान राजनैतिक रूप से ज्यादा चर्चाओं में रहे। सहारनपुर के थाना बडगांव के गांव शब्बीरपुर में 8 मई को महाराणा प्रताप जयंती की शोभायात्रा के दौरान हुए संघर्ष के बाद चंद्रशेखर का नाम देश के लोगोें ने पहली बार तब जाना जब शब्बीरपुर में राजपूतों द्वारा दलितों के घरों में आगजनी और उनकी महिलाओं के साथ जमकर मारपीट की घटना को अंजाम दिए जाने की प्रतिक्रिया में सहारनपुर में 9-10 मई को भारी हिंसा और आगजनी हुई थी। इस मामले में चंद्रशेखर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में भी जेल में बंद रहे थे। जेल से छूटने के बाद देश भर में जहां कही भी दलित उत्पीडन की घटना सामने आती वहीं चंद्रशेखर अपनी हाजिरी दर्ज कराने पहुंच जाते। इन दिनों वह सीएए के खिलाफ हो रहे आंदोलनों और प्रदर्शनों को अपना भरपूर समर्थन देने में भागदौड करते दिख रहे है। चंद्रशेखर कभी भी मायावती को निशाना नहीं बनाते है लेकिन मायावती उन्हें अपने संभावित प्रतिद्वंद्वी के रूप में देख रही है और सर्तक भी है।
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