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समाचारदेश Alert Star Digital Team Feb 15, 2020 08:02 PM

जीएसटी बकाए पर ब्याज की गणना शुद्ध देनदारी के आधार पर की जाएगी: सीबीआईसी

जीएसटी बकाए पर ब्याज की गणना शुद्ध देनदारी के आधार पर की जाएगी: सीबीआईसी

जीएसटी बकाए पर ब्याज की गणना शुद्ध देनदारी के आधार पर की जाएगी: सीबीआईसी

नयी दिल्ली। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने शनिवार को देरी से जीएसटी दाखिल करने वालों व्यापारियों में बने भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया अब जीएसटी भुगतान में देरी पर ब्याज की गणना शुद्ध देनदारियों के आधार पर की जाएगी। यानी अब व्यापारियों को केवल नेट टैक्स पर लगने वाले लेट पेमेंट का ही भुगतान करना होगा। सीबीआईसी ने कहा है कि इस संबंध में जीएसटी कानून में संशोधन किए गए हैं।

सीबीआईसी ने अपने क्षेत्रीय अधिकारियों को हाल में निर्देश दिया है कि वे विलम्ब से भुगतान किए गए माल एवं सेवाकर के भुगतानों पर बकाया ब्याज की वसूली शुरू करें। अनुमान है कि ब्याज का बकाया 46,000 करोड़ रुपए तक हो गया है। इस निर्देश से उद्योग जगत में चिंता बतायी जा रही है। गौरतलब है कि हाल ही में सीबीआईसी ने अपने अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे देरी से जीएसटी भुगतान करने वालों से लेटपेमेंट के आधार पर टैक्स वसूली करें। सीबीआईसी ने कहा कि जीएसटी कानूनों के तहत अभी लेट पेमेंट इंटरेस्ट की गणना ग्रोस टैक्स लाइबेलिटी के आधार पर होती है। इस स्थिति पर तेलंगाना हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल 2019 के आदेश के द्वारा रोक लगा दी है।

1/n There are some discussions in social media w.r.t. interest calculation on delayed GST payments post a few media reports regarding Rs. 46000 Cr interest on the delayed GST payments to be collected by tax authorities. On this issue of interest calculation, it is clarified that-

उद्योग जगत की चिंताओं के बीच सीबीआईसी ने एक के बाद एक कई ट्वीट जारी करके स्पष्ट किया है कि केंद्र और राज्य सरकारों ने जीएसटी संबंधी अधिनियमों में पिछली तिथि से प्रभावी संशोधन कर दिए हैं। इसके बाद अब ब्याज की गणना कर के शुद्ध बकाए के आधार पर की जाएगी। एक ट्वीट में बोर्ड ने कहा है, 'अभी जीएसटी के अधिनियमों में विलम्ब से किए जाने वाले जीएसटी भुगतान पर ब्याज की गणना सकल देनदारी के आधार पर करने की छूट है' 'इस कानूनी स्थिति और तेलंगाना उच्च न्यायालय के ओदश के बावजूद केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने जीएसटी परिषद की सिफारिशों के आधार पर अपने-अपने सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियमों में संशोधन कर लिए हैं ताकि विलम्ब से किए जाने वाले जीएसटी भुगतान पर शुद्ध देनदारी के आधार पर ब्याज लगाया जा सके।'

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