होम तो उतर जाएं और सब ठीक है के बीच मध्य प्रदेश की सियासत
तो उतर जाएं और सब ठीक है के बीच मध्य प्रदेश की सियासत
मध्य प्रदेश में पंद्रह साल के सूखे को कांग्रेस ने हरियाली में बदल दी थी। लेकिन सरकार बनाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। यह वो एक ऐसा मौका था कि राज्य कांग्रेस का कोई क्षत्रप अपनी नाखुशी को जाहिर नहीं होने देना चाहता था हालांकि कई कैंप थे। परंपरा के मुताबिक राज्य कांग्रेस ने आलाकमान की इच्छा से कमलनाथ में भरोसा जताया और कमल कांग्रेस के नाथ बन गए। लेकिन उस नाथ के रास्ते में तरह तरह की अड़चनें आने लगीं। छोटी मोटी मुश्किलों का निपटारा कमल नाथ तो कर लेते थे। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब खुलेआम कहा कि वो किसानों और शिक्षकों के मुद्दे पर सड़कों पर उतरेंगे तो कांग्रेस के अंदर बेचैनी बढ़ी और मामले को सुलझाने की कोशिश शुरू हुई। सियासी मंथन के कई घंटे और निकला यह नतीजा
कमल नाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिनाक्षी नटराजन के बीच बैठक हुई और जो नतीजा निकला वो कुछ इस तरह था। दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया और कहा कि वचन पत्र पांच साल के लिए होता है न कुछ महीने के लिए। हमने बहुत से वादों को पूरा किया है और शेष वादों को पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जहां तक सिंधिया जी की बात है तो वो किसी के खिलाफ नहीं है, कमल नाथ जी के नेतृत्व में पूरी कांग्रेस एक है।
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