होम क्या आंखें सपनों में चीजों को देखती हैं?
आप चुपचाप, बगैर हिले-डुले सो रहे हैं मगर आपकी आंखें लगातार हरकत कर रही हैं। ऐसी नींद को त्वरित नेत्र गति यानी रैपिड आई मूवमेंट (आरईएम) की अवस्था कहते हैं। ऐसी ही नींद के दौरान आप सबसे साफ सपने देखते हैं।
आप चुपचाप, बगैर हिले-डुले सो रहे हैं मगर आपकी आंखें लगातार हरकत कर रही हैं। ऐसी नींद को त्वरित नेत्र गति यानी रैपिड आई मूवमेंट (आरईएम) की अवस्था कहते हैं। ऐसी ही नींद के दौरान आप सबसे साफ सपने देखते हैं। मगर वैज्ञानिकों के सामने सवाल यह था कि क्या हमारी गतिशील आंखें वास्तव में उन चीजों को देखती हैं?
आरईएम नींद का पता सबसे पहले 1950 के दशक में चला था। तब यह विचार बना था कि ऐसी हरकत करते हुए हमारी आंखें किसी काल्पनिक नजारे को स्कैन करती हैं। इस्राइल के तेल अवीव विश्वविद्यालय के युवाल निर का मत है कि यह विचार मूलत: सहजबोध पर टिका था, इसका कोई प्रमाण नहीं था। जो भी प्रमाण थे वे सुनी-सुनाई बातों पर आधारित थे। जैसे यदि नींद में किसी व्यक्ति की आंखें दाएं-बाएं डोल रही थीं, और उसे जगाया गया तो उसने बताया कि वह टेनिस के खेल का सपना देख रहा था।
यह देखा गया कि 80 प्रतिशत बार उनकी आंखों की गति और शारीरिक गतियों में तालमेल होता है। मगर ऐसे लोग बहुत कम होते हैं। प्राय: सपने देखते हुए लोगों का शरीर एकदम निश्चल रहता है। तो वैज्ञानिकों को इसके अध्ययन के लिए कुछ जुगाड़ तो जमाना था। कई वैज्ञानिक मानते हैं कि सपने में हम जो कुछ देखते हैं उसका सम्बंध आंखों से नहीं होता बल्कि ये चित्र सीधे दिमाग में बनते हैं। अपनी बात के प्रमाण के तौर पर वे कहते हैं कि त्वरित नेत्र गति भ्रूण में भी होती है और अंधे लोगों में भी। जाहिर है इन दोनों को दृष्टि का कोई अनुभव नहीं होता। इसलिए यह कहना गलत होगा कि वे आंखों से किसी चीज का अनुसरण कर रहे हैं। निर और उनके साथियों ने मामले की तहकीकात करने की ठानी। इसके लिए उन्होंने मिर्गी के ऐसे मरीजों को लिया जिनके मस्तिष्क में इलेक्ट्रोड्स लगे हों। ये इलेक्ट्रोड्स उनके उपचार में मदद के लिए लगाए गए थे और अधिकांशत: मस्तिष्क के उस हिस्से में लगे थे जो चित्रों के प्रति संवेदना दर्शाता है। इनकी मदद से दिमाग में चल रही गतिविधि का अवलोकन किया जा सकता है। प्रत्येक ऐसे मरीज को सुला दिया गया और रिकॉर्ड किया गया कि त्वरित नेत्र गति की अवस्था में मस्तिष्क के इस हिस्से में किस तरह की गतिविधि होती है। देखा गया कि हर बार आंख की हरकत के चौथाई सेकंड बाद मस्तिष्क के उस हिस्से में गतिविधि होती है। ऐसा ही तब भी होता है जब मरीज जागते हुए किसी चित्र को देखता है।
इससे इतना तो पता चलता ही है कि आंखों की गति के साथ मस्तिष्क में दृश्य संवेदन जैसी गतिविधि होती है। एक व्याख्या यह है कि नींद में जब यादों को याद किया जाता है तो तस्वीरें बनती हैं। निर का कहना है कि हर बार जब आंख गति करती है, तो मस्तिष्क में एक नई तस्वीर उभरती है। सपना इसी को कहते हैं।
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