होम Lucknow News: 69000 शिक्षक भर्ती विवाद, शिक्षा मंत्री के आवास पहुंचे अभ्यर्थी, नारेबाजी के बाद पुलिस ने हटाया
उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। शनिवार (25 अक्टूबर) को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर पहुंच गए और धरने पर बैठकर नारेबाजी करने लगे।
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। शनिवार (25 अक्टूबर) को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर पहुंच गए और धरने पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार हाईकोर्ट के आदेशों को जानबूझकर लटका रही है, जिसके चलते मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई निर्धारित है। उन्होंने कहा, “हम सरकार से निवेदन करते हैं कि वह सुप्रीम कोर्ट में अपने अधिवक्ता को भेजे और हमारे पक्ष में सुनवाई कराकर हमें न्याय दिलाए। हाईकोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में आया था, लेकिन अब तक उसे लागू नहीं किया गया है।”
अमरेंद्र ने यह भी कहा कि अब तक 22 से अधिक तारीखों पर सुनवाई टल चुकी है, जिससे अभ्यर्थियों में भारी निराशा है।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों धनंजय गुप्ता, रवि पटेल और अमित मौर्य ने बताया कि यह भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2018 में शुरू हुई थी, लेकिन परिणाम आने के बाद आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव किया गया। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने उनके पक्ष में फैसला दिया था और नियुक्ति देने का आदेश भी जारी किया था, मगर सरकार ने अब तक उस पर अमल नहीं किया।
अभ्यर्थियों ने मंत्री आवास के बाहर “शिक्षा मंत्री न्याय करो” के नारे लगाए। हालात को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। बाद में पुलिस ने सभी अभ्यर्थियों को बसों में बैठाकर इको गार्डन धरना स्थल पहुंचाया।
अभ्यर्थी उमाकांत मौर्य ने आरोप लगाया कि अंबेडकरनगर से लखनऊ आने वाले अभ्यर्थियों को रास्ते में ही पुलिस ने रोक लिया, जिससे भीड़ कम रही। उन्होंने कहा, “पुलिस कई अभ्यर्थियों से फोन पर बात कर उनकी जानकारी जुटा रही है। डर और दबाव के कारण कई लोग लखनऊ नहीं आ सके।”
अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार उनके आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, लेकिन वे न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखेंगे।
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