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समाचारखेल Alert Star Digital Team Mar 17, 2023 09:22 PM

जडेजा-राहुल की शतकीय साझेदारी से पहला वनडे जीता भारत,

जडेजा-राहुल की शतकीय साझेदारी से पहला वनडे जीता भारत,

जडेजा-राहुल की शतकीय साझेदारी से पहला वनडे जीता भारत,

केएल राहुल और रवींद्र जडेजा के बीच छठे विकेट की शतकीय साझेदारी की बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया को पहले वनडे में पांच विकेट से हरा कर तीन मैचों की सिरीज़ में 1-0 की बढ़त ले ली है.

 

केएल राहुल ने नाबाद 75 रन बनाए जबकि रवींद्र जडेजा ने नाबाद 45 रन बनाए. दोनों ने छठे विकेट के लिए नाबाद 108 रन जोड़े.

भारतीय पारी में इन दोनों बल्लेबाज़ों के अलावा कप्तान हार्दिक पंड्या ने 25 रन और शुभमन गिल ने 20 रन बनाए.

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए वनडे सिरीज़ के पहले मुक़ाबले में रोहित शर्मा की अनुपस्थिति में भारतीय टीम की कमान हार्दिक पांड्या ने संभाली. पंड्या ने टॉस जीत कर पहले गेंदबाज़ी करने का फ़ैसला किया.

ऑस्ट्रेलिया पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 35.4 ओवर में 188 रन पर ऑल आउट हो गई. ओपनर मिशेल मार्श ने सर्वाधिक 88 रन बनाए. वहीं कप्तान स्टीव स्मिथ ने 22 रन बनाए तो इंग्लिस ने भी 26 रन का योगदान दिया.

भारत की ओर से मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज ने तीन तीन विकेट लिए. जडेजा को दो विकेट मिले. कुलदीप यादव और कप्तान हार्दिक पंड्या ने एक-एक विकेट लिए.

वहीं जब भारतीय टीम बल्लेबाज़ी करने आई तो उसके भी शुरुआती तीन विकेट महज 16 रन पर आउट हो गए. इसके बाद चौथा विकेट 39 रन पर और आधी भारतीय टीम 83 रन पर पवेलियन लौट चुकी थी.

हालांकि इसके बाद केएल राहुल और रवींद्र जडेजा ने दोनों छोर संभाल लिया और अंत तक आउट हुए बग़ैर भारत को जीत दिलाई.

इस जीत के बाद भारतीय टीम ने आईसीसी की वनडे रैंकिंग में अपनी नंबर-1 की स्थिति को बरकरार रखा है.

वानखेड़े में 11 साल बाद मिली जीत

यह वानखेड़े स्टेडियम में अक्टूबर 2011 के बाद भारत की पहली जीत है. अक्टूबर 2011 में इंग्लैंड पर मिली छह विकेट की जीत के बाद से भारत यहां दक्षिण अफ़्रीका से 2015 में 214 रनों से हारा, न्यूज़ीलैंड से 2017 में 6 विकेट से हारा और ऑस्ट्रेलिया के हाथों 2020 में 10 विकेट से हार चुका है.

दोनों टीमों के बीच अब अगला मैच विशाखापत्तनम (19 मार्च) और सिरीज़ का आखिरी वनडे चेन्नई (22 मार्च) में खेला जाएगा.


मैच से पहले लिखी गई ये रिपोर्ट पढ़ें

इसी साल वनडे का वर्ल्ड कप भी भारत में खेला जाना है. इस कारण भी इस सिरीज़ को काफ़ी अहम माना जा रहा है.

भारतीय टीम इस साल अब तक छह वनडे खेल चुकी है और अब ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ इस सिरीज़ में तीन मैच खेल रही है.

उसके बाद भारत को वेस्ट इंडीज़ से वनडे मैच खेलना है और फिर होगा एशिया कप.

उसके बाद सितंबर में फिर ऑस्ट्रेलिया के साथ वनडे सिरीज़ खेली जाएगी. जबकि अक्तूबर-नवंबर के महीने में वनडे का वर्ल्ड कप खेला जाना है.

वहीं इस सिरीज़ के बाद भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को आईपीएल में भी खेलना है.

कंगारू टीम के सामने बड़ी चुनौती

ऑस्ट्रेलिया से भारतीय टीम बॉर्डर-गावस्कर टेस्ट सिरीज़ 2-1 से जीत चुकी है और टेस्ट सिरीज़ में स्पिनर्स का बोलबाला रहा.

वैसे तो वनडे मैच टेस्ट मैचों की तुलना में अलग अंदाज़ में खेले जाते हैं, लेकिन स्पिनर्स यहाँ भी कंगारू टीम के लिए चुनौती होंगे.

वैसे आख़िरी टेस्ट मैच को जिस अंदाज़ में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने ड्रॉ कराया, उससे ये उम्मीद की जा रही है कि उसके (आधे से अधिक) खिलाड़ी यहाँ की पिचों के लिए सेट हो चुके हैं.

साथ ही ऑस्ट्रेलिया टीम में इस सिरीज़ के लिए सफ़ेद गेंदों के विशेषज्ञ ग्लेन मैक्सवेल, मिचेल मार्श, सीन एबोट, मार्कस स्टॉयनिस, एडम जम्पा, जॉश इंग्लिश और एश्टन एगर शामिल हुए हैं.

इनमें से कई खिलाड़ियों को भारतीय पिचों का अच्छा अनुभव भी है, लिहाज़ा टीम मज़बूत दिख रही है.

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स्मिथ कर रहे पाँच साल बाद कप्तानी

ऑस्ट्रेलिया के नियमित कप्तान पैट कमिंस अपनी माँ के निधन की वजह से वापस लौट चुके हैं.

उनकी जगह स्टीव स्मिथ ने तीसरे और चौथे मैच में कप्तानी की थी.

तीसरा मैच ऑस्ट्रेलिया जीत गया था जबकि चौथा टेस्ट ड्रॉ रहा था.

स्मिथ पाँच साल बाद ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी कर रहे हैं. जनवरी 2018 में उनकी कप्तानी में खेले गए आख़िरी मैच में ऑस्ट्रेलिया को इंग्लैड के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.

वहीं भारत के ख़िलाफ़ उन्होंने जिन 10 वनडे मैचों में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी की है, उनमें से पाँच में जीत तो इतने में ही हार का सामना करना पड़ा था.

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भारतीय टीम के सामने चुनौतियाँ

दूसरी तरफ़ भारतीय टीम अपने नियमित कप्तान रोहित शर्मा के बग़ैर पहले वनडे में उतरी है.

रोहित पारिवारिक कारणों से पहला वनडे नहीं खेल रहे हैं.

उनकी जगह हार्दिक पंड्या कप्तानी संभाल रहे हैं. दूसरी ओर श्रेयस अय्यर भी पीठ की चोट की वजह से सिरीज़ से बाहर हैं.

जसप्रीत बुमराह और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ी तो पहले से ही टीम में नहीं हैं. यानी भारतीय टीम नियमित ओपनर, मध्यक्रम बल्लेबाज़, विकेटकीपर और शीर्ष गेंदबाज़ के बिना ही उतरी है.

ऐसे में जहाँ तेज़ गेंदबाज़ी की कमान मोहम्मद सिराज और अनुभवी मोहम्मद शमी संभाल रहे हैं, वहीं उन्हें युवा उमरान मलिक, शार्दुल ठाकुर, जयदेव उनदकट जैसे गेंदबाज़ों का साथ मिला है.

वहीं स्पिन का डिपार्टमेंट रवींद्र जडेजा के साथ कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर और युजवेंद्र चहल संभाल रहे हैं.

ये रिकॉर्ड बनने के आसार

बल्लेबाज़ी में जहाँ एक ओर सबकी नज़र शुभमन गिल पर है, जो पिछले चार वनडे में एक दोहरा शतक और दो शतक बना चुके हैं, तो केएल राहुल भी टीम में अपनी जगह बनाने का मौक़ा नहीं चूकना चाहेंगे.

शुभमन ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ अहमदाबाद टेस्ट मैच में भी शतक लगा चुके हैं.

दूसरी तरफ़ श्रीलंका के ख़िलाफ़ आखिरी वनडे में नाबाद 166 रनों की पारी खेल कर फ़ॉर्म में वापसी का संकेत दे चुके विराट कोहली ने अहमदाबाद में भी शतक लगाया है.

उन्हें वनडे में 13,000 रन बनाने के लिए केवल 191 रनों की ज़रूरत है.

अगर विराट का बल्ला चला, तो ये रिकॉर्ड इसी टूर्नामेंट में बन सकता है.

5,000 से अधिक रन बनाने वाले क्रिकेटरों में कोहली एकमात्र ऐसे बल्लेबाज़ हैं, जो वनडे में 57 की औसत से बल्लेबाज़ी करते हैं.

वहीं टी-20 क्रिकेट के बादशाह सूर्यकुमार पर भी इस सिरीज़ के दौरान नज़र रहेगी.

उनके बल्ले से 18 वनडे में अब तक दो अर्धशतकों और 28.87 की औसत से महज़ 433 रन ही निकले हैं.

सूर्यकुमार के लिए वनडे में अपनी उपयोगिता साबित करने के लिहाज़ से यह सिरीज़ अहम होगी.

कप्तान रोहित शर्मा ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहले टेस्ट में शतक तो ज़रूर लगाया, लेकिन उसके बाद पाँच पारियों में उनके बल्ले से केवल 122 रन ही निकले.

हालाँकि उससे पहले इसी साल रोहित छह वनडे में 83, 17, 42, 34, 51 और 101 रन बना चुके हैं.

वनडे में रोहित फ़ॉर्म में दिख रहे हैं तो नज़र ईशान किशन पर भी होगी, जिन्होंने दिसंबर के महीने में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दोहरा शतक तो लगाया था, लेकिन उसके बाद से केवल 5, नाबाद 8 और 17 रनों की पारी खेले हैं.

कांटे की टक्कर

दोनों टीमों के बीच अब तक हुए एकदिवसीय मुक़ाबलों का आँकड़ा देखें, तो कंगारू टीम का पलड़ा बहुत भारी दिखता है.

दोनों टीमों के बीच खेले गए 143 वनडे मैचों में से 80 मुक़ाबले कंगारू टीम ने जीते हैं, वहीं भारतीय टीम केवल 53 मैच ही जीत सकी है.

हालाँकि भारत अपनी घरेलू पिचों पर थोड़ी बेहतर स्थिति में दिखता है, क्योंकि यहाँ खेले गए 64 मैचों से वो 29 जीता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने उससे एक अधिक 30 मुक़ाबले जीते हैं.

ये तो 1980 से लेकर अब तक के आँकड़े हैं, लेकिन 2017 से अब तक बीते 20 मैचों की बात करें, तो वहाँ भारतीय टीम 12-8 से आगे है.

वहीं हाल में दोनों टीमों के प्रदर्शन की बात करें, तो जहाँ भारतीय टीम ने आख़िरी दो सिरीज़ न्यूज़ीलैंड और श्रीलंका के ख़िलाफ़ 3-0 के अंतर से जीती है.

वहीं ऑस्ट्रेलियाई टीम ने भी आख़िरी दो वनडे सिरीज़ इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ 3-0 से जीती है.

ऑस्ट्रेलियाई टीम पिछले 10 मैचों में से केवल एक हारी है, तो भारतीय टीम पिछले 10 मैचों में से 7 जीती है.

बीते 15 जनवरी को ही भारतीय टीम ने वनडे इतिहास की अपनी सबसे बड़ी जीत हासिल की थी.

तब उसने श्रीलंका को 317 रनों से हराया था.

भारत की जीत से रैंकिंग पर क्या फ़र्क पड़ेगा?

ये तो थी आँकड़ों की बात. अब बात करते हैं कि कैसे एक जीत हार से आईसीसी की टीम रैंकिंग में उलटफेर होने की संभावना है.

रैंकिंग में उलटफेर पहले मैच में जीत-हार से ही शुरू हो जाएगी.

अगर वानखेड़े में भारतीय टीम ने जीत से शुरुआत की, तो वो न केवल नंबर एक पर बनी ही रहेगी बल्कि उसकी रेटिंग में भी एक अंक का इज़ाफ़ा होगा.

आईसीसी की वनडे रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया फ़िलहाल दूसरे पायदान पर क़ाबिज़ है.

भारत से पहला वनडे हारने की स्थिति में उसकी रेटिंग में दो अंकों की गिरावट आएगी और वो दो पायदान नीचे यानी चौथे स्थान पर पहुँच जाएगा.

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अगर सिरीज़ का फ़ैसला भारत के पक्ष में 2-1 या 3-0 से हुआ, तो भारत न केवल नंबर-1 पर बना रहेगा बल्कि उसके रेटिंग अंकों में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा.

ऑस्ट्रेलिया के सिरीज़ हारने की स्थिति में न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड को फ़ायदा होगा.

टीम वनडे रैंकिंग में दूसरे और तीसरे पायदान पर पहुँच जाएगी.

हालाँकि वानखेड़े में अगर टीम इंडिया हार जाती है, तो उसे अपना नंबर-1 का ताज फ़िलहाल ऑस्ट्रेलिया को सौंपना होगा.

वहीं अगर ऑस्ट्रेलिया यह सिरीज़ 3-0 से जीत गया, तो वो न केवल नंबर एक पर पहुँचेगा, बल्कि ऐसी स्थिति में भारत को बड़ा नुक़सान होगा और वो चौथे पायदान पर खिसक जाएगा.

कुल मिलाकर यह वनडे सिरीज़ दोनों टीमों के लिए अपनी रैंकिंग को बरक़रार या बेहतर करने के लिहाज से अहम होगी.

वहीं वर्ल्ड कप में वो किस टीम संयोजन के साथ उतरेंगी, यह उसे भी आज़माने का मौक़ा है.

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