होम रेपो रेट में बढ़ोतरी ठीक नहीं... RBI MPC बैठक में 2 मेंबर ने किया था विरोध

प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Feb 22, 2023 08:17 PM

रेपो रेट में बढ़ोतरी ठीक नहीं... RBI MPC बैठक में 2 मेंबर ने किया था विरोध

रेपो रेट में बढ़ोतरी ठीक नहीं... RBI MPC बैठक में 2 मेंबर ने किया था विरोध

रेपो रेट में बढ़ोतरी ठीक नहीं... RBI MPC बैठक में 2 मेंबर ने किया था विरोध

बीते 8 फरवरी को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में रेपो रेट बढ़ाए जाने के फैसले का जबरदस्त विरोध हुआ था। एमपीसी के 6 सदस्यों में से दो सदस्य- आशिमा गोयल और जयंत वर्मा ने रेपो रेट बढ़ाए जाने के खिलाफ वोटिंग की थी।

 

क्या कहा जयंत वर्मा ने: ब्योरे के मुताबिक वर्मा ने कहा-2021-22 की दूसरी छमाही में मौद्रिक नीति मुद्रास्फीति को लेकर संतुष्ट थी, और हम 2022-23 में अस्वीकार्य रूप से उच्च मुद्रास्फीति के रूप में इसकी कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2022-23 की दूसरी छमाही में मौद्रिक नीति वृद्धि के बारे में आत्मसंतुष्ट हो गई है और मैं आशा करता हूं कि हम 2023-24 में अस्वीकार्य रूप से कम वृद्धि के रूप में इसकी कीमत नहीं चुकाएंगे। वर्मा ने कहा- मेरा मानना है कि एमपीसी के बहुमत से रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के दौरान मुद्रास्फीति के पूर्वानुमानों में हुई नरमी और बढ़ती वृद्धि चिंताओं के मौजूदा संदर्भ को ध्यान में नहीं रखा गया है।

वहीं, इस बैठक में डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा ने कहा था कि वैश्विक अनिश्चितता ने मुद्रास्फीति के खिलाफ लड़ाई को मुश्किल बना दिया है। इस दौरान आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि वैश्विक कारणों की वजह से काफी अनिश्चितता है। दरअसल, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का ब्योरा बुधवार को जारी हुआ, जिसमें यह जानकारी दी गई।

क्या कहा डिप्टी गवर्नर ने: एमपीसी के ब्योरे के मुताबिक पात्रा ने कहा-मुद्रास्फीति के खिलाफ लड़ाई वैश्विक नजरिए से मुश्किल है। पहले की आशंका की तुलना में अब एक सामान्य मंदी को लेकर कुछ आम सहमति बन रही है, हालांकि भौगोलिक असमानताएं पूर्वानुमान को जटिल बनाती हैं। कुल मिलाकर, वैश्विक मुद्रास्फीति का आउटलुक पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित हो रहा है।

क्या कहा गवर्नर ने: वहीं, शक्तिकांत दास ने कहा कि कुल मिलाकर भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक वित्तीय बाजार में अस्थिरता, गैर-तेल जिंस कीमतों में तेजी, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और मौसम संबंधी उतार-चढ़ाव के कारण काफी अनिश्चितता है। उन्होंने कहा कि दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी से भविष्य की मौद्रिक नीति कार्रवाइयों के लिए गुंजाइश मिलेगी।

आपको बता दें कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद रेपो रेट में एक बार फिर 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई और यह अब 6.5 प्रतिशत कर दिया गया है। आरबीआई ने पिछले साल मई के बाद से छठी बार ब्याज दर बढ़ाई। इस दौरान दरों में कुल 2.5 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई।

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