होम इंदिरा ने हटाया, राजीव ने सस्पेंड किया; एस जयशंकर ने सुनाया अपने पिता के सुब्रमण्यम का किस्सा
इंदिरा ने हटाया, राजीव ने सस्पेंड किया; एस जयशंकर ने सुनाया अपने पिता के सुब्रमण्यम का किस्सा
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को अपने पिता से जुड़ा एक किस्सा साझा किया। उन्होंने कहा कि मेरे पिता एक ब्यूरोक्रेट थे, जो बाद में सचिव बने। लेकिन पहले इंदिरा गांधी और फिर राजीव गांधी ने उनके साथ बहुत अन्याय किया।
गौरतलब है कि जयशंकर के पिता डॉक्टर के सुब्रमण्यम एक शानदार रणनीतिक विशेषज्ञ माने जाते हैं। एस जयशंकर ने यह बातें ब्यूरोक्रेट से मिनिस्टर बनने के अपने सफर की दास्तान सुनाते हुए बताईं।
परिवार की बातें
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एएनआई के साथ इंटरव्यू में अपने परिवार की भी तमाम बातें साझा कीं। जयशंकर ने बताया कि वह ब्यूरोक्रेट्स के परिवार से आते हैं। जयशंकर के मुताबिक वह एक बेहतरीन विदेश सेवा अधिकारी बनना चाहते थे और ऐसा सोचते हुए उनके सामने पिता का अक्स बन जाता था। जयशंकर ने बताया कि उनके पिता डॉक्टर के सुब्रमण्यम एक बेहतरी ब्यूरोक्रेट थे। उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत 1979 में जनता सरकार से की और देश के संभवत: सबसे युवा ब्यूरोक्रेट बने। बता दें कि जयशंकर के पिता का साल 2011 में निधन हो गया था और वह अपने बेटे को सचिव बनते हुए नहीं देख सके थे।
पिता के साथ हुआ था गलत
जयशंकर ने आगे बताया कि उनके पिता के साथ काफी गलत हुआ। जयशंकर के मुताबिक उनके पिता पहले ब्यूरोक्रेट थे और बाद में सचिव बने। वह सेक्रेट्री, डिफेंस प्रोडक्शन थे, जब 1980 में इंदिर गांधी सत्ता में वापस आईं और उन्हें पद से हटा दिया। जयशंकर बताते हैं कि सिर्फ इतना ही नहीं, आगे चलकर राजीव गांधी सरकार में भी उनके पिता का रास्ता रोकने की कोशिशें नहीं थमीं। तब उनसे किसी जूनियर को कैबिनेट सेक्रेट्री बनाने के लिए उन्हें हटा दिया गया था। जयशंकर ने बताया कि इसके बाद उनके पिता कभी भी सेक्रेट्री नहीं बने। उन्हें इस बात का मलाल रहा, लेकिन वह इस बारे में कभी बात नहीं करते थे। जयशंकर के मुताबिक यही वजह थी कि जब वह उनके बड़े भाई पहली बार सेक्रेट्री बने तो पिता को बहुत गर्व हुआ था।
ऐसे मिला मंत्री बनने का मौका
जयशंकर ने बताया कि जब 2011 में उनके पिता गुजरे तो मैं ग्रेड 1 अधिकारी बन पाया था, जैसे एक राजदूत। मैं सचिव नहीं बना था। पिता के गुजरने के बाद मैं सेक्रेट्री बना। उन्होंने बताया कि उस वक्त तक लक्ष्य बस सेक्रेट्री बनना ही थी तो मैंने वह लक्ष्य हासिल कर चुका था। 2018 में मैं टाटा संस में था। वहां सबकुछ सही चल रहा था। तभी यह राजनीतिक मौका आया। एस जयशंकर ने बताया कि मैं इसके लिए तैयार नहीं था तो मैंने समय लिया। जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट ज्वॉइन करने के लिए खुद उनसे पूछा था। उन्होंने बताया कि पहली बार पीएम मोदी से उनकी मुलाकात साल 2011 में हुई थी, जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर चीन के दौरे पर थे।
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