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समाचारदेश Alert Star Digital Team Feb 10, 2023 10:06 PM

बोहरा समुदाय से पीएम मोदी का है पुराना रिश्ता, अन्य मुस्लिमों से कैसे अलग?

बोहरा समुदाय से पीएम मोदी का है पुराना रिश्ता, अन्य मुस्लिमों से कैसे अलग?

बोहरा समुदाय से पीएम मोदी का है पुराना रिश्ता, अन्य मुस्लिमों से कैसे अलग?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को दाऊदी बोहरा समुदाय के साथ साझा किए गए अपने दशकों पुराने रिश्तों को याद किया। अलजामिया-तुस-सैफिया अरबी अकादमी के चौथे परिसर का उद्घाटन करने के बाद मोदी ने कहा कि मैं यहां परिवार के सदस्य की तरह हूं, प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं।

अलजामिया-तुस-सैफिया अरबी अकादमी दाऊदी बोहरा समुदाय का प्रमुख शिक्षण संस्थान है। मोदी ने कहा कि परिसर में आना अपने परिवार के पास आने जैसा है। उन्होंने समुदाय के साथ अपने रिश्तों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दाऊदी बोहरा समुदाय समय के अनुसार बदलाव लाने की कसौटी पर खरा उतरा है। इससे पहले पीएम इंदौर भी बोहरा समुदाय से मुलाकात कर चुके हैं।

विकास के लिए प्रयत्नशील बताया
शुक्रवार को अलजामिया-तुस-सैफिया अरबी अकादमी के मुंबई स्थित कैंपस का उद्धाटन करते हुए इस समुदाय को विकास के लिए प्रयत्नशील बताया। उन्होंने कहा कि अलजामिया-तुस-सैफिया अरबी अकादमी बदलते वक्त में विकास का प्रतीक बन चुका है। पीएम ने कहा कि दाऊदी बोहरा समुदाय हमेशा ही समय के साथ चलने वाला रहा है। जब किसी चीज के पीछे उद्देश्य के पीछे अच्छी भावना होती है तो उसका परिणाम भी सकारात्मक होता है। पीएम ने कहा कि अलजामिया-तुस-सैफिया अरबी अकादमी इसका ही उदाहरण है।

क्या इसके कुछ सियासी मायने हैं?
आखिर क्या वजह है कि पीएम मोदी इस समुदाय पर खास फोकस बनाए हुए हैं। क्या 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले इसके कुछ सियासी मायने भी हैं? इसके लिए आपको थोड़ा सा पीछे जाना होगा। पिछले महीने पीएम मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं से हाशिए पर पड़े समुदायों के करीब जाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि इसके लिए यह भी परवाह नहीं करनी चाहिए कि वह हमारी पार्टी को वोट देते हैं या नहीं।

बोहरा समुदाय का इतिहास
बोहरा नाम गुजराती शब्द वहारु से आया है, जिसका अर्थ होता है व्यापार करना। एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका के मुताबिक बोहरा समुदाय में शिया बहुसंख्यकों के अलावा, अक्सर व्यापारी वर्ग के सुन्नी अल्पसंख्यक शामिल हैं। यह आमतौर पर किसान होते हैं। मिस्र में पैदा हुए मुस्ताली संप्रदाय ने बाद में अपने धार्मिक केंद्र को यमन में ट्रांसफर कर दिया। बाद में इसने 11वीं शताब्दी में मिशनरियों के जरिए भारत में पैर जमाए। 1539 के बाद भारतीय समुदाय काफी बड़ा हो गया। इसके बाद बोहरा संप्रदाय की गद्दी यमन से गुजरात के पाटन जिला स्थित सिद्धपुर में आ गई।

साल 2013 में किया था ऐसा
मुंबई में बोहरा समुदाय के बीच पीएम मोदी का एक महीने के अंदर यह दूसरा कार्यक्रम है। इससे पहले वह इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन कार्यक्रम में भी इस समुदाय से मिले थे। इसे 2024 के चुनावों के साथ-साथ मुंबई के सिविक पोल्स से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वैसे साल 2013 में जब नरेंद्र मोदी ने अपने प्रधानमंत्री कैंपेन की शुरुआत की थी तो इसका सबसे अहम चेहरा जफर सरेशवाला थे। द प्रिंट के मुताबिक जफर बोहरा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले मुस्लिम व्यापारी हैं।

स्पष्ट है मैसेज
एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय बोहरा समुदाय की कुल आबादी करीब 10 से 12 लाख है। द प्रिंट के मुताबिक इसमें से कई विदेशों में बस चुके हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारतीय मुस्लिम आबादी में बोहरा की कुल संख्या करीब 10 फीसदी है। एक भाजपा नेता के मुताबिक अरबी अकादमी के उद्धाटन में पहुंचकर मोदी ने बिल्कुल स्पष्ट मैसेज दे दिया है। इस नेता के मुताबिक अगले लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए बेहद अहम हैं। ऐसे में सभी को जोड़कर चलने की रणनीति काफी कारगर साबित होगी। उन्होंने कहा कि बोहरा समुदाय का काफी प्रभाव है।

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