होम कम लोग पहुंचते हैं अदालत, ज्यादातर आबादी मौन रहकर सह रही पीड़ा: चीफ जस्टिस NV रमण

समाचारदेश Alert Star Digital Team Jul 30, 2022 11:01 PM

कम लोग पहुंचते हैं अदालत, ज्यादातर आबादी मौन रहकर सह रही पीड़ा: चीफ जस्टिस NV रमण

कम लोग पहुंचते हैं अदालत, ज्यादातर आबादी मौन रहकर सह रही पीड़ा: चीफ जस्टिस NV रमण

कम लोग पहुंचते हैं अदालत, ज्यादातर आबादी मौन रहकर सह रही पीड़ा: चीफ जस्टिस NV रमण

चीफ जस्टिस एन. वी. रमण ने न्याय तक पहुंच को 'सामाजिक उद्धार का उपकरण' बताया है। उन्होंने शनिवार को कहा कि जनसंख्या का बहुत कम हिस्सा ही अदालतों में पहुंच सकता है और अधिकतर लोग जागरुकता व आवश्यक माध्यमों के अभाव में मौन रहकर पीड़ा सहते रहते हैं।


न्यायमूर्ति रमण ने अखिल भारतीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की पहली बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लोगों को सक्षम बनाने में प्रौद्योगिकी बड़ी भूमिका निभा रही है। उन्होंने न्यायपालिका से 'न्याय देने की गति बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी उपकरण अपनाने' की अपील की।

जस्टिस रमण ने कहा, 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की इसी सोच का वादा हमारी (संविधान की) प्रस्तावना प्रत्येक भारतीय से करती है। वास्तविकता यह है कि आज हमारी आबादी का केवल एक छोटा प्रतिशत ही न्याय देने वाली प्रणाली से जरूरत पड़ने पर संपर्क कर सकता है। जागरुकता और आवश्यक साधनों की कमी के कारण अधिकतर लोग मौन रहकर पीड़ा सहते रहते हैं।'

'न्याय तक पहुंच सामाजिक उद्धार का साधन'
चीफ जस्टिस ने कहा, 'आधुनिक भारत का निर्माण समाज में असमानताओं को दूर करने के लक्ष्य के साथ किया गया था। लोकतंत्र का मतलब सभी की भागीदारी के लिए स्थान मुहैया कराना है। सामाजिक उद्धार के बिना यह भागीदारी संभव नहीं होगी। न्याय तक पहुंच सामाजिक उद्धार का एक साधन है।'

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