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जाति की राजनीति की मौत की मुनादी और प्रो इंकम्बेंसी के नए ट्रेंड की शुरुआत
2017 की जीत को बीजेपी 2022 में दोहरा पाएगी इसको लेकर काफी संशय और सवाल थे। कोरोना की तबाही सामने थी, किसानों का विरोध सामने था, जातिगत संतुलन को लेकर भी तरह-तरह की बातें की जा रही थी। लेकिन अब कोई सवाल नहीं रहा। मोदी ने ये दिखा दिया कि उनके रहते हुए कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं। एक राज्य पहाड़ का एक राज्य समंदर किनारे का एक राज्य गंगा किनारे का एक राज्य पूर्वोत्तर का। पांच राज्य में से चार राज्य ऐसे जिसमें भौगोलिक, सामाजिक, राजनीतिक हर तरह से भिन्नता है। लेकिन इन चार राज्यों में एक समानता दिखी। बीजेपी की विजय की समानता। पीएम मोदी पर कायम जनता के भरोसी की समानता। लखनऊ से पणजी तक देहरादून से इंफाल तक एक राजनीतिक व्यक्ति के मनोयोग से चुनौतियों के चक्रव्यूह को भेदते हुए बीजेपी इतिहास रचती है।
पांच में से चार राज्यों में भाजपा की जीत से गुजरात और हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में बढ़त मिलने की उम्मीद है। पार्टी फिर से 'प्रो-इनकंबेंसी' पर भरोसा करेगी,पीएम नरेंद्र मोदी की "प्रफार्मेंस पॉलिटिक्स" और "डबल-इंजन" सरकार के आधार पर वोट मांग रही है। साथ ही इस दावे के साथ कि बीजेपी ने जो वादा किया था उसे पूरा किया। भाजपा नेताओं ने न केवल पिछली सरकारों के "कमजोर" प्रदर्शन को उजागर किया, बल्कि "अंत्योदय" (पंक्ति में अंतिम व्यक्ति का उदय) के मंत्र के साथ सभी मोर्चों पर काम किया। पार्टी मुख्यालय में अपने विजय भाषण में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि यह फैसला मोदी सरकार की नीतियों और योजनाओं का एक और बड़ा समर्थन है। “फैसला देश में राजनीति के भविष्य के पाठ्यक्रम के बारे में भी एक संकेत है। मोदी ने देश के राजनीतिक लोकाचार को बदल दिया है।
कांटो के बीच से जीत का फूल निकालकर पिरोई गई मालाएं यूं ही नरेंद्र मोदी के गले का हार नहीं बनती। सबूत ये कि पांच राज्यों में चार में विजय का भगवा लहराने के अगले दिन अहले सुबह गुजरात की सड़कों पर नरेंद्र मोदी केसरिया टोपी पहने स्वागत के पुष्पों के बीच लोगों का अभिवादन करते दिखे। 9 किलोमीटर लंबा रोड शो को प्रधानमंत्री के गृह राज्य के लिहाजे से मत आंकई बल्कि ये उस राज्य में वी फॉर विक्टरी का साइन दिखाते हुए हैं जहां नौ महीने के भीतर चुनाव होने हैं और लगभग पिछले 27 सालों से बीजेपी काबिज है। यूपी में बीजेपी का वोट प्रतिशत 39.7 प्रतिशत से 41.6 प्रतिशत पहुंच जाता है। उत्तराखंड में मुख्यमंत्रियों को बदलने के बाद भी बहुमत पाती है। गोवा में नाराजगी के बाद भी सरकार बनाने की दिशा में कदम बढ़ाती है। मणिपुर में सरकार बीजेपी के ही रहते सीट भी बढ़ती है और वोट शेयर भी। गोवा राज्य में पिछली दफा सीटों के मामले में कांग्रेस से पिछड़ने के बाद भी बाजी जरूर मार ली। लेकिन उसकी थोड़ी सी टीस मन में थी जिसे इस बार के चुनाव में पूरी करते हुए अपने सीटों में इजाफा करते हुए 13 से 20 तक के आंकड़े तक पहुंचाया।
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