होम Quad पर संकट के संकेत? अमेरिका के फैसले से उठे सवाल, शशि थरूर बोले- ‘क्या यह आखिरी कील है?’

समाचारदेश Alert Star Digital Team Jun 17, 2026 05:32 PM

Quad पर संकट के संकेत? अमेरिका के फैसले से उठे सवाल, शशि थरूर बोले- ‘क्या यह आखिरी कील है?’

अमेरिका के एक अहम रक्षा संबंधी फैसले ने भारत समेत कई रणनीतिक विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिकी प्रशासन ने आठ साल पहले किए गए बदलाव को पलटते हुए यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया है।

Quad पर संकट के संकेत? अमेरिका के फैसले से उठे सवाल, शशि थरूर बोले- ‘क्या यह आखिरी कील है?’

अमेरिका के एक अहम रक्षा संबंधी फैसले ने भारत समेत कई रणनीतिक विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिकी प्रशासन ने आठ साल पहले किए गए बदलाव को पलटते हुए यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया है। इस कदम के बाद इंडो-पैसिफिक रणनीति और Quad जैसे बहुपक्षीय मंचों के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

शशि थरूर ने उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल खड़े किए। उन्होंने लिखा, “क्या यह क्वाड के ताबूत में एक और कील है?” इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग के आदेश की प्रति भी साझा की।

थरूर की टिप्पणी के बाद विदेश नीति और सुरक्षा मामलों के जानकारों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अमेरिका अपनी इंडो-पैसिफिक प्राथमिकताओं को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।

आखिर अमेरिका ने क्या बदलाव किया?

अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल नाम परिवर्तन है और इससे कमांड की संरचना, जिम्मेदारियों या क्षेत्रीय प्रतिबद्धताओं में कोई बदलाव नहीं होगा। विभाग का कहना है कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम को बहाल करना उसकी ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने का प्रयास है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कमांड 1947 में स्थापित की गई थी और लंबे समय तक इसी नाम से कार्य करती रही थी।

70 साल तक इसी नाम से संचालित होती रही कमांड

यूएस पैसिफिक कमांड की स्थापना 1 जनवरी 1947 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति Harry S. Truman के कार्यकाल में हुई थी। यह अमेरिका की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी यूनिफाइड कॉम्बैटेंट कमांड मानी जाती है।

इसका संचालन क्षेत्र अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है, जिससे यह वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

2018 में क्यों जोड़ा गया था ‘इंडो’?

साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री James Mattis ने इसका नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया था। उस समय अमेरिका ने तर्क दिया था कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की सुरक्षा चुनौतियां अब एक-दूसरे से गहराई से जुड़ चुकी हैं।

तब अमेरिका की रणनीति में भारत की भूमिका को अधिक महत्व देने और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘इंडो’ शब्द को नाम में शामिल किया गया था।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कमांड?

हवाई स्थित यह सैन्य कमांड प्रशांत महासागर, हिंद महासागर के बड़े हिस्से, पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ क्षेत्रों की निगरानी करती है।

इंडो-पैसिफिक ढांचे के तहत यही कमांड भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग का प्रमुख आधार रही है। संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

Quad को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

विशेषज्ञों का मानना है कि नाम से ‘इंडो’ शब्द हटने का प्रतीकात्मक महत्व हो सकता है। हालांकि अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उसकी नीतियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन इस कदम को कुछ विश्लेषक इंडो-पैसिफिक रणनीति के संदेश में बदलाव के रूप में देख रहे हैं।

यही वजह है कि Quad के भविष्य और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। फिलहाल अमेरिका की ओर से यह साफ किया गया है कि यह केवल नाम परिवर्तन है, न कि किसी रणनीतिक प्रतिबद्धता में कमी का संकेत।

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