होम महिला वकीलों को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व? सुप्रीम कोर्ट ने BCI से मांगा अंतिम फॉर्मूला, 14 जुलाई तक देना होगा प्रस्ताव
महिला वकीलों की भागीदारी बढ़ाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) के एक प्रस्ताव को सकारात्मक संकेत दिए हैं।
महिला वकीलों की भागीदारी बढ़ाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) के एक प्रस्ताव को सकारात्मक संकेत दिए हैं। अदालत ने कहा है कि राज्य बार काउंसिलों की कार्यकारी समितियों में महिला वकीलों के लिए निर्धारित सह-नामांकन सीटों को भरने के लिए BCI द्वारा सुझाया गया तरीका उचित प्रतीत होता है। साथ ही कोर्ट ने सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद अंतिम प्रस्ताव पेश करने का निर्देश दिया है।
मंगलवार (16 जून, 2026) को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ राज्य बार काउंसिलों की कार्यकारी समितियों में महिला वकीलों को 30 प्रतिशत प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अधिकांश राज्य बार काउंसिलों के चुनाव पूरे हो चुके हैं और परिणाम भी घोषित किए जा चुके हैं। अब केवल महिला वकीलों के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत सह-नामांकन सीटों को भरने की प्रक्रिया तय किया जाना बाकी है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारतीय विधिज्ञ परिषद की ओर से दिया गया सुझाव व्यावहारिक और उचित दिखाई देता है।
उन्होंने कहा, 'बीसीआई ने एक उचित सुझाव दिया है कि जिन असफल उम्मीदवारों को सबसे अधिक वोट मिले हैं, उन्हें सह-नामांकन के जरिए शामिल किया जा सकता है.'
अदालत की यह टिप्पणी उन महिला उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जो चुनाव तो लड़ती हैं, लेकिन मामूली अंतर से जीत हासिल नहीं कर पातीं।
BCI ने अदालत को सुझाव दिया है कि सह-नामांकन की प्रक्रिया चुनावी प्रदर्शन के आधार पर होनी चाहिए। इसके तहत उन महिला उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाए जिन्होंने चुनाव में हिस्सा लिया हो, लेकिन जीत से चूक गई हों और असफल उम्मीदवारों में सबसे अधिक वोट प्राप्त किए हों।
परिषद का मानना है कि इस व्यवस्था से प्रतिनिधित्व प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और लोकतांत्रिक बन सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने BCI की ओर से पेश वकील राधिका गौतम को निर्देश दिया कि वे नव-निर्वाचित राज्य बार काउंसिल सदस्यों और अन्य संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा कर सह-नामांकन के लिए एक समान, पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था तैयार करें।
अदालत ने कहा कि अंतिम प्रस्ताव तैयार करते समय सभी हितधारकों की राय को शामिल किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो।
मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने BCI को निर्देश दिया है कि वह 14 जुलाई तक अपना अंतिम प्रस्ताव अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही राज्य बार काउंसिलों और भारतीय विधिज्ञ परिषद की कार्यकारी समितियों में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का निर्देश दे चुका है।
अदालत के निर्देश के अनुसार, कुल सीटों में से 20 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से आरक्षित होंगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत सीटें सह-नामांकन के जरिए भरी जाएंगी। वर्तमान सुनवाई इसी सह-नामांकन प्रक्रिया के स्वरूप को अंतिम रूप देने से संबंधित है।
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