होम यूपी में बाटी-चोखा vs ब्राह्मण भोज: 2027 के लिए अखिलेश ने चला PDA दांव, शिवपाल ने खोले दरवाजे
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। नए साल के मौके पर समाजवादी पार्टी (SP) ने लखनऊ में बाटी-चोखा भोज का आयोजन कर बीजेपी की कथित ब्राह्मण पॉलिटिक्स का जवाब देने की कोशिश की है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। नए साल के मौके पर समाजवादी पार्टी (SP) ने लखनऊ में 'बाटी-चोखा' भोज का आयोजन कर बीजेपी की कथित 'ब्राह्मण पॉलिटिक्स' का जवाब देने की कोशिश की है। इसे अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का ही एक हिस्सा माना जा रहा है।
बीजेपी के कुछ ब्राह्मण विधायकों की अलग बैठक की खबरों के बीच सपा ने 'बाटी-चोखा' पार्टी आयोजित की।
यूपी की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक (करीब 10-12%) किंगमेकर की भूमिका निभाता है। सपा की नजर इसी वोट बैंक में सेंध लगाने पर है, जो पारंपरिक रूप से बीजेपी का माना जाता है।
बीजेपी की ताकत: यूपी बीजेपी में संगठन और सत्ता में ब्राह्मणों की अच्छी पकड़ है। उनके पास 46 ब्राह्मण विधायक, 7 मंत्री और 1 डिप्टी सीएम हैं। राज्य की 60 से अधिक सीटों पर ब्राह्मण वोटर निर्णायक हैं।
सपा की रणनीति साफ है— अपने कोर वोट बैंक (Yadav-Muslim) को बचाए रखना और PDA के जरिए ओबीसी-दलितों को जोड़ना, साथ ही बीजेपी के नाराज सवर्णों (खासकर ब्राह्मणों) को अपने पाले में लाना।
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