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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Mar 23, 2023 08:46 PM

पूनिया की बजाय सीपी जोशी पर BJP ने क्यों खेला दांव, चुनाव से पहले ब्राह्मणों को साधने की कवायद

पूनिया की बजाय सीपी जोशी पर BJP ने क्यों खेला दांव, चुनाव से पहले ब्राह्मणों को साधने की कवायद

पूनिया की बजाय सीपी जोशी पर BJP ने क्यों खेला दांव, चुनाव से पहले ब्राह्मणों को साधने की कवायद

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनिया को हटाकर सांसद सीपी जोशी को पार्टी की कमान सौंपी है। पार्टी का यह निर्णय बेहद चौंकाने वाला है। क्योंकि प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह लगातार सतीश पूनिया की पैरवी कर रहे थे।

पूनिया को मदनलाल सैनी के निधन के बाद पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। पूनिया करीब तीन साल तक पद पर रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले पूनिया को हटाकर ब्राह्मणों का साधने की कवायद की है। ब्राह्मण वोट बैंक का साधने के लिए पार्टी ने सीपी जोशी पर दांव खेला है। सीपी जोशी चित्तौड़गढ़ से लगातार दूसरी बार सांसद बने हैं। चुनाव में वह रिकाॅर्ड वोटों से जीते थे। राजस्थान की राजनीति में ब्राह्मणों का वर्चस्व हुआ करता था। कांग्रेस ने हरदेव जोशी को मुख्यमंत्री बनाया था। विधानसभा मं 50-60 विधायक ब्राह्मण ही होते थे, लेकिन सोशल इंजीनियरिंग के चलते कांग्रेस और भाजपा ने ब्राह्मणों को टिकट देना कर कर दिया। हाल ही में जयपुर में हुई ब्राह्मम महापंचायत में ब्राह्मणों की सीएम बनाने की मांग भी उठाई गई थी। राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों में हर विधानसभा सीट पर 10-5 हजार वोटर ब्राह्मण होते है। जो हार-जीत में निर्णायक भूमिका निभाते रहे है।

वसुंधरा राजे की नाराजगी

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राजस्थान की राजनीति में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया और सतीश पूनिया के बीच अदावत किसी से छिपी हुई नहीं है। पूनिया वसुंधरा राजे के सीएम फेस घोषित करने की मांग का विरोध करते रहे हैं। सतीश पूनिया बार-बार कहते रहे हैं कि पीएम मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा जाएगा। वसुंधरा राजे समर्थकों को पूनिया का यह बयान कभी रास नहीं आया। वसुंधरा राजे ने कई बार इशारों में पूनिया का नाम लिए बिना उन पर जमकर निशाना साधा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी आलाकमान पूनिया से इसलिए नाराज था कि उन्होंने वसुंधरा राजे की कई अहम मौकों पर अनदेखी की है। शायद यही वजह है कि बीजेपी की जन आक्रोश रैली के दौरान जेपी नड्डा के कार्यक्रम में कुर्सियों खाली रही।

जाट वोटबैंक पर पड़ सकता है असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूनिया का हटाने से जाट नाराज हो सकते हैं। चुनाव में जातिया समीकरण बीजेपी के खिलाफ जा सकते हैं। राजस्थान की सियासत को जाट वोट बैंक हमेशा प्रभावित करता रहा है। कांग्रेस से चुनाव में मुद्दा भी बना सकती है। कांग्रेस ने गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष बना रखा है। डोटासरा जाट समुदाय से आते हैं। ऐसे में कांग्रेस जाटों की अनदेखी का मुद्दा बनाकर बीजेपी को घेर सकती है। पद से हटाने के बाद पूनिया ने कहा-मैं हृदय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जी और केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त करता हूं, और पार्टी के निर्णय का स्वागत करता हूं।

गहलोत ने ब्राह्मणों को लुभाया

राजस्थान में ब्राह्मण वोट बीजेपी का माना जाता रहा है। लेकिन विधानसभा चुनाव 2018 में ब्राह्मणों ने बीजेपी के सोशल इंजीनियरिंग के फाॅर्मूले से नाराज हो कर दूरी बना ली थी। कांग्रेस में महेश जोशी और सीपी जोशी जैसे बड़े नेताओं का उदय हुआ। सीएम गहलोत ने EWS आरक्षण में रियायत देकर बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगा दी थी। गहलोत ने मुख्य सचिव ऊषा शर्मा और डीजीपी उमेश मिश्रा को बनाकर ब्राह्मण को साधने का काम किया। गहलोत की चाल से बीजेपी के समीकरण गड़बड़ा गए। मौजूदा समय में प्रदेश भाजपा में कोई भी ब्राह्मण चेहरा प्रमुख भूमिका में नहीं था। इसी तरह केंद्र की भाजपा सरकार और राष्ट्रीय संगठन में भी राजस्थान से कोई ब्राह्मण चेहरा प्रभावी भूमिका में नहीं है।

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