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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Mar 23, 2023 08:25 PM

शुक्रवार के दिन करें ये आसान उपाय, धन की कमी होगी दूर

शुक्रवार के दिन करें ये आसान उपाय, धन की कमी होगी दूर

शुक्रवार के दिन करें ये आसान उपाय, धन की कमी होगी दूर

हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन वैभव और सुख समृद्धि की देवी माना जाता है। इनकी पूजा के लिए शुक्रवार का दिन श्रेष्ठ माना गया है। भक्त इस दिन देवी मां को प्रसन्न करने के लिए उनकी विधिवत पूजा करते है और व्रत भी रखते है लेकिन इस दिन व्रत पूजन के साथ अगर श्री लक्ष्मी अष्टोत्तरनामावली का पाठ किया जाए तो देवी मां शीघ्र प्रसन्न होकर कृपा करती है और धन की कमी को दूर कर देती है, तो हम आपके लिए लेकर आए है ये चमत्कारी पाठ।

 

श्री लक्ष्मी अष्टोत्तरनामावली

ध्यानम्
वन्दे पद्मकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदां
हस्ताभ्यामभयप्रदां मणिगणैर्नानाविधैर्भूषिताम्।
भक्ताभीष्टफलप्रदां हरिहरब्रह्मादिभिः सेवितां
पार्श्वे पङ्कजशङ्खपद्मनिधिभिर्युक्तां सदा शक्तिभिः ॥
सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतरांशुकगन्धमाल्यशोभे ।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम् ॥
ओं प्रकृतिं विकृतिं विद्यां सर्वभूतहितप्रदाम् ।
श्रद्धां विभूतिं सुरभिं नमामि परमात्मिकाम् ॥
वाचं पद्मालयां पद्मां शुचिं स्वाहां स्वधां सुधाम् ।
धन्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं नित्यपुष्टां विभावरीम् ॥
अदितिं च दितिं दीप्तां वसुधां वसुधारिणीम् ।
नमामि कमलां कान्तां कामाक्षीं क्रोध सम्भवम् ॥
अनुग्रहप्रदां बुद्धिमनघां हरिवल्लभाम् ।
अशोकाममृतां दीप्तां लोकशोकविनाशिनीम् ॥
नमामि धर्मनिलयां करुणां लोकमातरम् ।
पद्मप्रियां पद्महस्तां पद्माक्षीं पद्मसुन्दरीम् ॥
पद्मोद्भवां पद्ममुखीं पद्मनाभप्रियां रमां ।


पद्ममालाधरां देवीं पद्मिनीं पद्मगन्धिनीम् ॥
पुण्यगन्धां सुप्रसन्नां प्रसादाभिमुखी प्रभाम् ।
नमामि चन्द्रवदनां चन्द्रां चन्द्र सहोदरिम्‌ ॥
चतुर्भुजां चन्द्ररूपामिन्दिरामिन्दु शीतलाम् ।
आह्लादजननीं पुष्टिं शिवां शिवकरं सतीम्‌ ॥
विमलां विश्वजननीं तुष्टिं दारिद्र्यनाशिनीम् ।
प्रीतिपुष्करिणीं शान्तां शुक्लमाल्याम्बरां श्रियम् ॥
भास्करीं बिल्वनिलयां वरारोहां यशस्विनीम् ।
वसुन्धरामुदाराङ्गीं हरिणीं हेममालिनीम् ॥
धनधान्य करीं सिद्धिं स्त्रैणसौम्यां शुभप्रदाम् ।
नृपवेश्मगतानन्दां वरलक्ष्मीं वसुप्रदाम् ॥
शुभां हिरण्यप्राकारां समुद्रतनयां जयाम् ।
नमामि मङ्गलां देवीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम् ॥
विष्णुपत्नीं प्रसन्नाक्षीं नारायणसमाश्रिताम्।
दारिद्र्य विध्वंसिनी देवी सर्वोपद्रववारिणीम् ॥
नवदुर्गा महाकालीं ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकाम् ।
त्रिकालज्ञानसम्पन्नां नमामि भुवनेश्वरीम् ॥
लक्ष्मी क्षीरसमुद्रराजतनयां श्रीरङ्गधामेश्वरीं
दासीभूतसमस्तदेववनितां लोकैकदीपाङ्कुराम् ।
श्रीमन्मन्दकटाक्षलब्धविभवब्रह्मेन्द्रगङ्गाधरां।


त्वां त्रैलोक्यकुटुम्बिनीं सरसिजां वन्दे मुकुन्दप्रियाम् ॥
मातर्नमामि कमले कमलायताक्षि
श्रीविष्णुहृत्कमलवासिनि विश्वमातः ।
क्षीरोदजे कमलकोमलगर्भगौरि
लक्ष्मीः प्रसीद सततं नमतां शरण्ये ॥
त्रिकालं यो जपेत् विद्वान् षण्मासं विजितेन्द्रियः ।
दारिद्र्यध्वंसनं कृत्वा सर्वमाप्नोत्ययत्नतः ॥
देवीनाम सहस्रेषु पुण्यम्‌ अष्टोत्तरम्‌ शतम् ।
येन श्रियमवाप्नोति कोटिजन्मदरिद्रतः ॥
भृगुवारे शतं धीमान् पठेद्वत्सरमात्रकम् ।
अष्टैश्वर्यमवाप्नोति कुबेर इव भूतले ॥
दारिद्रय मोचनं नाम स्तोत्रमम्बापरं शतम् ।
येन श्रियमवाप्नोति कोटिजन्मदरिद्रितः ॥
भुक्त्वा तु विपुलान् भोगानस्याः सायुज्यमाप्नुयात् ।
प्रातःकाले पठेन्नित्यं सर्वदुःखोपशान्तये ।
पठंस्तु चिन्तयेद्देवीं सर्वाभरणभूषिताम् ॥

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