होम Iran-US Deal का असर! 4% लुढ़का Crude Oil, क्या अब भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? जानिए पूरी गणित

समाचारअर्थ व बाजार Alert Star Digital Team Jun 15, 2026 04:14 PM

Iran-US Deal का असर! 4% लुढ़का Crude Oil, क्या अब भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? जानिए पूरी गणित

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद वैश्विक तेल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली है। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की संभावनाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

Iran-US Deal का असर! 4% लुढ़का Crude Oil, क्या अब भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? जानिए पूरी गणित

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद वैश्विक तेल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली है। मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद और होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की संभावनाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इसका फायदा भारतीय उपभोक्ताओं को भी मिलेगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत देखने को मिलेगी।

शांति समझौते के बाद फिसले कच्चे तेल के दाम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक शांति समझौते की घोषणा के बाद तेल बाजार में सकारात्मक माहौल बना। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत से अधिक गिरकर करीब 83.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड लगभग 5 प्रतिशत टूटकर 80.87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम रहता है और होर्मुज स्ट्रेट सामान्य रूप से संचालित होता है, तो तेल आपूर्ति पर दबाव घट सकता है, जिससे कीमतों में और नरमी आने की संभावना बनी रहेगी।

भारत में फिलहाल क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल-डीजल के दाम?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसकी मुख्य वजह यह है कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां हाल के महीनों में हुए नुकसान की भरपाई करने में जुटी हैं।

पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान कच्चे तेल की कीमतें करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। उस समय कंपनियों ने पूरी लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला था। हालांकि मई के मध्य से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7 से 8 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, लेकिन कंपनियां अब भी अपने पुराने घाटे को संतुलित करने की कोशिश कर रही हैं।

टैक्स कटौती के बाद राहत की सीमित गुंजाइश

ईंधन की कीमतों में तत्काल राहत नहीं मिलने की एक वजह केंद्र सरकार द्वारा पहले की गई टैक्स कटौती भी है। मार्च में सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 3 रुपये प्रति लीटर कम कर दी थी, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को शून्य कर दिया गया था।

चूंकि टैक्स पहले ही काफी कम स्तर पर पहुंच चुका है, इसलिए सरकार के पास टैक्स कटौती के जरिए अतिरिक्त राहत देने की संभावनाएं फिलहाल सीमित मानी जा रही हैं।

आयात पर निर्भरता भी बन रही है बड़ी चुनौती

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में केवल अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट ही पर्याप्त नहीं होती। रुपये और डॉलर के विनिमय दर, शिपिंग लागत और बीमा खर्च जैसे कारक भी तेल आयात की वास्तविक लागत को प्रभावित करते हैं।

इसी वजह से वैश्विक बाजार में गिरावट का असर भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

कितनी सस्ती हो सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमत?

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका लाभ आम उपभोक्ताओं को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि ब्रेंट क्रूड कई सप्ताह या एक महीने तक 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बना रहता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियों की लागत, बाजार स्थिति और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा।

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Read More Articles

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)