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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team May 26, 2026 07:16 PM

UP में ग्राम प्रधान बने प्रशासक, लेकिन बड़े फैसलों पर नहीं चलेगी मनमानी! DM की मंजूरी के बिना नहीं होगा ये काम

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों में देरी के बीच राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया है। हालांकि अब ग्राम प्रधान पहले जैसी पूरी ताकत के साथ काम नहीं कर पाएंगे।

UP में ग्राम प्रधान बने प्रशासक, लेकिन बड़े फैसलों पर नहीं चलेगी मनमानी! DM की मंजूरी के बिना नहीं होगा ये काम

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों में देरी के बीच राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया है। हालांकि अब ग्राम प्रधान पहले जैसी पूरी ताकत के साथ काम नहीं कर पाएंगे। सरकार के आदेश के मुताबिक, प्रशासनिक और नीतिगत मामलों में अंतिम अधिकार जिलाधिकारी यानी डीएम के पास ही रहेगा।

ग्राम प्रधानों को बनाया गया प्रशासक

उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान ग्राम प्रधानों को अस्थायी तौर पर प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, 27 मई 2026 से पूर्व ग्राम प्रधान अपने-अपने गांवों में प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे।

सरकारी आदेश में कहा गया है कि ग्राम पंचायतों के कार्यकाल की समाप्ति 26 मई 2026 के बाद जिलाधिकारियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे पूर्व ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में नामित करें।

क्या-क्या काम नहीं कर पाएंगे प्रशासक?

हालांकि प्रशासक बनाए गए ग्राम प्रधानों के अधिकार सीमित रहेंगे। आदेश में साफ कहा गया है कि प्रशासक केवल सामान्य और रूटीन कार्य ही कर सकेंगे। उन्हें किसी भी तरह का नीतिगत फैसला लेने की अनुमति नहीं होगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई विशेष या जरूरी मामला सामने आता है, जिसमें नीतिगत निर्णय की आवश्यकता हो, तो उसका प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के पास भेजा जाएगा। डीएम की मंजूरी मिलने के बाद ही ऐसा कोई फैसला लागू हो सकेगा।

असली अधिकार अब भी जिलाधिकारी के पास

नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक नियंत्रण काफी हद तक जिलाधिकारियों के हाथ में रहेगा। यानी ग्राम प्रधान प्रशासक तो होंगे, लेकिन अंतिम फैसला जिला प्रशासन की मंजूरी से ही होगा।

आदेश में कहा गया है कि प्रशासक द्वारा कोई भी नीति विषयक निर्णय सीधे नहीं लिया जा सकेगा। इससे साफ है कि पंचायत स्तर पर बड़े फैसलों के लिए डीएम की अनुमति अनिवार्य होगी।

सीएम योगी के निर्देश पर जारी हुआ आदेश

सरकारी आदेश के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह फैसला लिया गया है। नई ग्राम पंचायतों के गठन और पहली बैठक होने तक या अधिकतम छह महीने की अवधि तक यह व्यवस्था लागू रहेगी।

सरकार ने कहा है कि पंचायतों के नए चुनाव होने तक गांवों में नियमित प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसलिए यह कदम उठाया गया है।

क्यों जरूरी हुई यह व्यवस्था?

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्षों का होता है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद जब तक नई पंचायतों का गठन नहीं हो जाता, तब तक राज्य सरकार को प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार होता है। इसी प्रावधान के तहत अब पूर्व ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया है।

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