होम योगी सरकार का नया रिकॉर्ड, बिना शराब बिक्री बढ़ाए यूपी में बढ़ा हजारों करोड़ का राजस्व
उत्तर प्रदेश में आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत में ही रिकॉर्ड राजस्व वृद्धि दर्ज कर नई चर्चा छेड़ दी है। सरकार का दावा है कि यह बढ़ोतरी शराब बिक्री बढ़ाने से नहीं, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था, डिजिटल मॉनिटरिंग और राजस्व लीकेज रोकने के कारण हुई है।
उत्तर प्रदेश में आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत में ही रिकॉर्ड राजस्व वृद्धि दर्ज कर नई चर्चा छेड़ दी है। सरकार का दावा है कि यह बढ़ोतरी शराब बिक्री बढ़ाने से नहीं, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था, डिजिटल मॉनिटरिंग और राजस्व लीकेज रोकने के कारण हुई है।
आबकारी विभाग के मुताबिक, अप्रैल 2026 में प्रदेश को ₹5,251 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। जबकि अप्रैल 2025 में यह आंकड़ा ₹4,319.46 करोड़ था। यानी सिर्फ एक साल में अप्रैल महीने के भीतर ही ₹931.54 करोड़ की अतिरिक्त बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अधिकारियों का कहना है कि यह वृद्धि प्रशासनिक सुधारों और तकनीकी निगरानी व्यवस्था का सीधा परिणाम है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011-12 में उत्तर प्रदेश को आबकारी विभाग से ₹8,139 करोड़ का राजस्व मिला था, जो 2016-17 तक बढ़कर ₹14,273 करोड़ पहुंचा। हालांकि उस समय लक्ष्य के मुकाबले उपलब्धि प्रतिशत लगातार गिर रहा था और 2016-17 में यह केवल 74.15 प्रतिशत रह गया था।
विशेषज्ञों के मुताबिक, उस दौर में राजस्व रिसाव, अवैध कारोबार और कमजोर निगरानी बड़ी समस्या थी।
योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद आबकारी विभाग में बड़े स्तर पर सुधार लागू किए गए। इनमें ई-टेंडरिंग, सप्लाई चेन की डिजिटल ट्रैकिंग, ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम, बारकोड आधारित निगरानी और ऑनलाइन मॉनिटरिंग जैसे कदम शामिल हैं।
इसके साथ ही जिला स्तर पर जवाबदेही तय की गई और अवैध शराब कारोबार तथा तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए।
इन सुधारों का असर अगले ही वर्षों में राजस्व आंकड़ों में दिखाई देने लगा। वर्ष 2018-19 में पहली बार विभाग ने लक्ष्य से अधिक 104.03 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की और ₹23,928 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया।
इसके बाद राजस्व संग्रह लगातार बढ़ता गया।
इस तरह 2016-17 की तुलना में प्रदेश का आबकारी राजस्व लगभग चार गुना तक पहुंच गया है।
आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता “सिस्टम करेक्शन मॉडल” का परिणाम है। इसके तहत शराब बिक्री बढ़ाने की बजाय राजस्व लीकेज रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और डिजिटल गवर्नेंस मजबूत करने पर फोकस किया गया।
पहले जहां अधिकतर प्रक्रियाएं मैनुअल थीं और मानवीय हस्तक्षेप ज्यादा था, वहीं अब अधिकांश व्यवस्थाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित हो चुकी हैं। इससे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में कमी आई है।
जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का आबकारी मॉडल अब केवल राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं रह गया है। यह डेटा आधारित मॉनिटरिंग, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शी प्रशासन का उदाहरण बनकर उभरा है।
2026-27 के शुरुआती आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश आबकारी राजस्व के नए रिकॉर्ड बना सकता है।
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