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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेशवायरल न्यूज़ Alert Star Digital Team Jan 27, 2026 07:34 PM

शंकराचार्य विवाद: उमा भारती ने योगी के अफसरों को दी नसीहत, बोलीं- सबूत मांगना आपकी हैसियत से बाहर, मर्यादा में रहें

प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रहे धर्मयुद्ध में अब मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की फायरब्रैंड नेता उमा भारती की एंट्री हो गई है.

शंकराचार्य विवाद: उमा भारती ने योगी के अफसरों को दी नसीहत, बोलीं- सबूत मांगना आपकी हैसियत से बाहर, मर्यादा में रहें

लखनऊ/प्रयागराज: प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रहे 'धर्मयुद्ध' में अब मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की फायरब्रैंड नेता उमा भारती की एंट्री हो गई है. मंगलवार (27 जनवरी 2026) को उमा भारती ने इस विवाद पर अपनी बेबाक राय रखते हुए मेला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने योगी सरकार के अधिकारियों को स्पष्ट नसीहत दी है कि किसी संत से उसके शंकराचार्य होने का सबूत मांगना प्रशासनिक अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और यह सीधे तौर पर मर्यादा का उल्लंघन है.

'शंकराचार्य का सबूत मांगना प्रशासन का काम नहीं'

उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि इस विवाद का कोई सकारात्मक हल जल्द निकल आएगा. हालांकि, उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, “प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांग कर प्रशासन ने मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है. यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों एवं विद्वत परिषद का है.” उमा भारती ने साफ किया कि प्रशासन का काम व्यवस्था बनाना है, धर्मगुरुओं की पदवी की जांच करना नहीं.

'योगी विरोधी खुशफहमी न पालें, मैं सीएम के साथ हूं'

जब उमा भारती के इस बयान को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ माना जाने लगा, तो उन्होंने तुरंत दूसरा पोस्ट कर स्थिति साफ कर दी. उन्होंने विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा, “योगी विरोधी खुशफहमी ना पालें, मेरा कथन योगी जी के विरुद्ध नहीं है. मैं उनके प्रति सम्मान, स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं. किंतु मैं इस बात पर कायम हूं कि प्रशासन कानून-व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण करे लेकिन किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है. यह सिर्फ शंकराचार्य या विद्वत परिषद कर सकते हैं.”

क्या है नोटिस और विवाद की असली वजह?

गौरतलब है कि मौनी अमावस्या पर शाही स्नान को लेकर यह विवाद गहराया था. मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है और जब तक अपील निस्तारित नहीं होती, कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता. प्रशासन का कहना था कि इसके बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर में खुद को शंकराचार्य घोषित करते हुए बोर्ड लगाए हैं. इसके जवाब में शंकराचार्य की टीम ने प्रशासन पर संतों की सदियों पुरानी परंपराओं में हस्तक्षेप करने और अपमानित करने का आरोप लगाया था.

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