होम सुप्रीम कोर्ट बदलेगा 40 साल पुरानी पर्यावरण याचिकाओं का नाम, CJI की दो टूक
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण (Environment) से जुड़े दशकों पुराने तीन अहम मामलों में एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। 1984-85 में मशहूर पर्यावरणविद् और वकील एम. सी. मेहता (M.C. Mehta) द्वारा दाखिल की गई इन जनहित याचिकाओं (PIL) का अब केस टाइटल (नाम) बदला जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण (Environment) से जुड़े दशकों पुराने तीन अहम मामलों में एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। 1984-85 में मशहूर पर्यावरणविद् और वकील एम. सी. मेहता (M.C. Mehta) द्वारा दाखिल की गई इन जनहित याचिकाओं (PIL) का अब केस टाइटल (नाम) बदला जाएगा। कोर्ट का कहना है कि इन मामलों में मुख्य फैसला दशकों पहले ही सुनाया जा चुका है, लेकिन लगातार नए आवेदनों के जुड़ने से ऐसा भ्रम पैदा होता है कि सुप्रीम कोर्ट 40 साल से इन मामलों को नहीं सुलझा पाया है।
'संसद में उठते हैं सवाल, नहीं उठा सकता ये शर्मिंदगी'
दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत ने कड़े शब्दों में स्थिति साफ की। उन्होंने कहा, "इन मामलों के लंबित दिखने के चलते लोग बेवजह ऐसा समझते हैं कि सुप्रीम कोर्ट 40 साल से इन केसों का निपटारा नहीं कर पा रहा है। संसद में भी इसे लेकर कई बार सवाल उठाए जाते हैं। मैं यह शर्मिंदगी उठाने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हूँ।"
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को सख्त निर्देश दिए हैं कि इन तीनों मामलों को अब नए नाम से सूचीबद्ध (List) किया जाए। अब सुप्रीम कोर्ट सिर्फ उन्हीं आवेदनों को सुनेगा जिनकी सुनवाई शीर्ष अदालत में होनी जरूरी है; बाकी बचे आवेदनों को संबंधित हाई कोर्ट (High Court) में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
किन 3 ऐतिहासिक मामलों का बदला जाएगा नाम?
अब तक ये तीनों ही केस सुप्रीम कोर्ट की सूची में 'एम. सी. मेहता बनाम भारत सरकार' के नाम से चलते आ रहे थे। जिन मूल याचिकाओं का नाम बदला जाएगा, वे इस प्रकार हैं:
सुप्रीम कोर्ट इन तीनों मामलों में पहले ही अपना विस्तृत फैसला सुना चुका है, लेकिन अंतरिम आवेदनों (Interim Applications) की वजह से ये आज तक पेंडिंग केस की लिस्ट में नजर आते थे।
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।