होम जातीय जनगणना पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रोक लगाने की मांग ठुकराई; कहा- बिना आंकड़ों के कैसे बनेंगी योजनाएं?

समाचारदेश Alert Star Digital Team May 20, 2026 01:30 PM

जातीय जनगणना पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रोक लगाने की मांग ठुकराई; कहा- बिना आंकड़ों के कैसे बनेंगी योजनाएं?

जातिगत जनगणना को लेकर दायर याचिका पर Supreme Court of India ने बड़ा फैसला सुनाते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जनगणना में जातियों के आधार पर आंकड़े शामिल करना या नहीं करना पूरी तरह सरकार का नीतिगत मामला है और न्यायपालिका इसमें दखल नहीं दे सकती।

जातीय जनगणना पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, रोक लगाने की मांग ठुकराई; कहा- बिना आंकड़ों के कैसे बनेंगी योजनाएं?

जातिगत जनगणना को लेकर दायर याचिका पर Supreme Court of India ने बड़ा फैसला सुनाते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि जनगणना में जातियों के आधार पर आंकड़े शामिल करना या नहीं करना पूरी तरह सरकार का नीतिगत मामला है और न्यायपालिका इसमें दखल नहीं दे सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि पिछड़े वर्गों और अन्य सामाजिक समूहों के लिए प्रभावी कल्याणकारी योजनाएं तैयार करने के लिए उनके सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन का सही डेटा होना जरूरी है।

जातिगत गणना रोकने की मांग वाली याचिका खारिज

यह याचिका हैदराबाद निवासी सुधाकर गुम्मुला की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका में हाल ही में शुरू हुई राष्ट्रीय जनगणना प्रक्रिया से जातिगत गणना को बाहर रखने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि जाति आधारित आंकड़ों के संग्रह से सामाजिक और राजनीतिक जटिलताएं बढ़ सकती हैं। साथ ही यह भी आशंका जताई गई कि इस डेटा का विभिन्न एजेंसियों द्वारा दुरुपयोग किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह सरकार का अधिकार क्षेत्र

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस Surya Kant, जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस Vipul M. Pancholi की बेंच ने की।

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जनगणना में जातिगत आंकड़ों को शामिल करना एक नीतिगत निर्णय है, जो केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।

कल्याणकारी योजनाओं के लिए सही डेटा जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि कल्याणकारी योजनाओं को लागू करते समय पिछड़े वर्गों और दूसरे सामाजिक समूहों की वास्तविक स्थिति को समझना बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार के पास सही और विस्तृत आंकड़े होना आवश्यक है।

अदालत ने माना कि जनगणना के माध्यम से ऐसे आंकड़े जुटाए जा सकते हैं, जो भविष्य की योजनाओं और नीतियों को प्रभावी बनाने में मदद करेंगे।

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