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समाचारदेश Alert Star Digital Team Aug 20, 2026 07:14 PM

Jantar Mantar Protest पर SC का बड़ा Action! Pellet Gun से Tear Gas तक पुलिस कार्रवाई की होगी जांच

जंतर-मंतर पर हालिया छात्र विरोध-प्रदर्शन और उसके दौरान हुई हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई पावर्ड कमेटी गठित की है।

Jantar Mantar Protest पर SC का बड़ा Action! Pellet Gun से Tear Gas तक पुलिस कार्रवाई की होगी जांच

जंतर-मंतर पर हालिया छात्र विरोध-प्रदर्शन और उसके दौरान हुई हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई पावर्ड कमेटी गठित की है। यह कमेटी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सुरक्षाकर्मियों की ओर से कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए जाने के आरोपों के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई हिंसा की भी जांच करेगी।

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में बनी कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए बनाई गई कमेटी की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी को सौंपी है। कमेटी में न्यायपालिका, पुलिस और जांच एजेंसियों से जुड़े अनुभवी लोगों को शामिल किया गया है।

कमेटी के पांच सदस्य हैं:

  • जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी — पूर्व जज, सुप्रीम कोर्ट और कमेटी के अध्यक्ष
  • जस्टिस रवि शंकर झा — पूर्व चीफ जस्टिस, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट
  • जस्टिस शालिन्दर कौर — पूर्व जज, दिल्ली हाई कोर्ट
  • ऋषि कुमार शुक्ला — पूर्व सीबीआई निदेशक
  • एल. आर. बिश्नोई — पूर्व डीजीपी, मेघालय

Pellet Gun, Electric Lathi और Tear Gas के इस्तेमाल की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को पुलिस कार्रवाई के तरीके की गहराई से जांच करने का निर्देश दिया है। इसमें प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन, इलेक्ट्रिक लाठी और बिना चेतावनी आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोप भी शामिल हैं।

कमेटी यह भी देखेगी कि भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने जरूरत से ज्यादा बल तो नहीं इस्तेमाल किया और क्या कुछ पुलिसकर्मी वर्दी के बिना कार्रवाई में शामिल थे।

जांच का उद्देश्य केवल घटना की जिम्मेदारी तय करना नहीं है, बल्कि भविष्य में भीड़ नियंत्रण और विरोध-प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग को लेकर आवश्यक सुझाव देना भी होगा।

महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा की भी होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित हिंसा, उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों को भी जांच के दायरे में रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा और गंभीर चोटों से संबंधित मामलों पर कमेटी प्राथमिकता के साथ अपनी रिपोर्ट देगी।

इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और उनकी निजता के कथित उल्लंघन से जुड़े आरोपों की भी जांच की जाएगी।

पुलिस पर हमले और संपत्ति के नुकसान का भी होगा आकलन

कमेटी केवल सुरक्षाबलों की कार्रवाई की जांच तक सीमित नहीं रहेगी। प्रदर्शनकारियों या कथित असामाजिक तत्वों की ओर से पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मियों पर किए गए हमलों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।

ड्यूटी के दौरान घायल हुए सुरक्षाकर्मियों की स्थिति और उन्हें हुए नुकसान की जानकारी भी कमेटी जुटाएगी। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन भी किया जाएगा।

घायलों को तत्काल बेहतर चिकित्सा सुविधा और अंतरिम आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के मुद्दे पर भी कमेटी विचार करेगी।

CCTV, Drone और Body Camera फुटेज पुलिस को देने होंगे

जांच को पारदर्शी रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को घटना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य कमेटी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इनमें CCTV फुटेज, ड्रोन से रिकॉर्ड की गई तस्वीरें या वीडियो, Body Camera की रिकॉर्डिंग और Wireless Logs शामिल हैं।

इसके अलावा पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाएगा। ऐसे लोग अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए भी कमेटी के सामने शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

कमेटी की जांच लंबे समय तक जारी रहेगी

चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कमेटी को जल्द से जल्द अंतरिम रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि कमेटी का काम केवल मौजूदा घटनाओं की जांच तक सीमित नहीं रहेगा। वह इन मुद्दों की लगातार समीक्षा करेगी और समय-समय पर अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने रखेगी।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। अब कमेटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों की कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुरूप थी या कहीं जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया।

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