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समाचारदेश Alert Star Digital Team Aug 20, 2026 07:28 PM

Delhi Master Plan 2047 लागू! 40 लाख नए घर, 695 KM Metro और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर से बदलेगा राजधानी का नक्शा

दिल्ली के भविष्य को लेकर लंबे समय से तैयार किए जा रहे Master Plan Delhi 2047 को अब आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को इसकी गजट अधिसूचना जारी की।

Delhi Master Plan 2047 लागू! 40 लाख नए घर, 695 KM Metro और हाई-डेंसिटी कॉरिडोर से बदलेगा राजधानी का नक्शा

दिल्ली के भविष्य को लेकर लंबे समय से तैयार किए जा रहे Master Plan Delhi 2047 को अब आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को इसकी गजट अधिसूचना जारी की। इस प्लान का लक्ष्य अगले दो दशकों में दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित करना है।

मास्टर प्लान में बढ़ती आबादी के लिए करीब 40 लाख नए घरों से लेकर मेट्रो नेटवर्क को लगभग 695 किलोमीटर तक विस्तार देने, Transit Oriented Development, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, यमुना किनारे साइकिल ट्रैक, हरित क्षेत्र और पुराने इलाकों के पुनर्विकास तक कई बड़े बदलावों का खाका तैयार किया गया है।

2047 तक दिल्ली में जुड़ेंगे करीब 90 लाख नए लोग

दिल्ली के Master Plan 2047 के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती आबादी है। अनुमान के मुताबिक 2047 तक राजधानी की आबादी करीब 3.2 करोड़ हो सकती है, जबकि वर्तमान आबादी लगभग 2.3 करोड़ बताई गई है। यानी अगले करीब दो दशकों में दिल्ली में लगभग 90 लाख अतिरिक्त लोग जुड़ सकते हैं।

इन लोगों के लिए करीब 40 लाख अतिरिक्त घरों की जरूरत का अनुमान लगाया गया है। चूंकि दिल्ली में नई जमीन की उपलब्धता सीमित है, इसलिए प्लान में ज्यादा लोगों को मौजूदा जमीन पर बसाने के लिए High Density Development पर जोर दिया गया है।

207 वर्ग किलोमीटर में Transit Oriented Development

Master Plan 2047 में मेट्रो, नमो भारत और रेलवे कॉरिडोर के आसपास करीब 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सघन विकास के लिए चिह्नित किया गया है। इसे Transit Oriented Development (TOD) क्षेत्र के तौर पर विकसित किया जाएगा।

मेट्रो कॉरिडोर, नमो भारत या रेलवे स्टेशन से 500 मीटर के दायरे में आने वाली जमीन को इस व्यवस्था के तहत शामिल किया जाएगा। यहां ज्यादा FAR यानी Floor Area Ratio की अनुमति मिलने से एक ही भूखंड पर अधिक निर्माण संभव होगा। अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में सिर्फ इन क्षेत्रों में करीब 17 लाख फ्लैट बनाए जा सकते हैं।

Urban Extension Road-2 के दोनों ओर 250 मीटर तक ऊंची रिहायशी इमारतों के विकास की संभावना भी रखी गई है। इस क्षेत्र में High Density Corridor Zone विकसित करने का प्रस्ताव है, जहां आवास, दुकान, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स जैसी गतिविधियां एक साथ हो सकेंगी।

TDR से सड़क और सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए जमीन जुटाना आसान होगा

प्लान में Transferable Development Rights (TDR) को भी जगह दी गई है। इसके तहत यदि सड़क चौड़ीकरण या किसी सार्वजनिक परियोजना के लिए किसी व्यक्ति की जमीन का हिस्सा लिया जाता है तो उसे उसी स्थान पर सीधे नकद मुआवजे के बजाय किसी दूसरे स्थान पर अतिरिक्त निर्माण का अधिकार दिया जा सकता है।

यह Development Right खरीदा और बेचा भी जा सकता है। इससे जमीन अधिग्रहण से जुड़े वित्तीय बोझ को कम करने और लंबे समय से जमीन के कारण अटकी सड़क तथा पुनर्विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

ज्यादा आबादी के साथ ऊंची इमारतों पर भी फोकस

दिल्ली में सीमित जमीन पर ज्यादा लोगों को बसाने के लिए Land Density और Building Height के नियमों पर भी नए सिरे से काम किया जाएगा। हालांकि, ज्यादा घनत्व वाली बसावट के साथ पानी, सीवर, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी उसी अनुपात में मजबूत करना जरूरी होगा।

Master Plan में इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए भूमि उपयोग और बुनियादी ढांचे के विस्तार का ढांचा तैयार किया गया है।

416 KM से बढ़कर करीब 695 KM होगा Metro Network

दिल्ली का मौजूदा मेट्रो नेटवर्क करीब 416 किलोमीटर बताया गया है। योजना के तहत इसमें लगभग 279 किलोमीटर और जोड़े जाने की संभावना है, जिससे नेटवर्क करीब 695 किलोमीटर तक पहुंच सकता है।

इसके साथ नमो भारत यानी RRTS नेटवर्क को भी लगभग 383 किलोमीटर तक विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। इससे दिल्ली को गाजियाबाद, मेरठ, पानीपत, करनाल और अलवर जैसे शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के 82 किलोमीटर हिस्से के संचालन के बाद दिल्ली और मेरठ के बीच यात्रा समय एक घंटे से कम होने की बात भी सामने रखी गई है।

आनंद विहार से सराय काले खां तक बनेंगे Multi-Modal Transport Hub

Master Plan में तीन प्रमुख क्षेत्रों को मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के तौर पर विकसित करने की योजना है। इसमें आनंद विहार-कड़कड़डूमा, कश्मीरी गेट और निजामुद्दीन-सराय काले खां क्षेत्र शामिल हैं।

इन हब में मेट्रो, बस, रेलवे, नमो भारत और ऑटो रिक्शा जैसी अलग-अलग परिवहन सुविधाओं को एक जगह जोड़ने की कोशिश होगी। यात्रियों के लिए Multi-Level Interchange के साथ Skywalk, Subway और Pedestrian Bridge जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इन हब के 500 मीटर के दायरे में TOD परियोजनाओं को भी हब की योजना के अनुरूप विकसित करना होगा।

दिल्ली में Parking Space घटाने की योजना

Master Plan 2047 का एक महत्वपूर्ण बदलाव निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने से जुड़ा है। इसके तहत कुछ क्षेत्रों में Parking Space को कम करने की योजना है, ताकि लोग निजी वाहनों के बजाय मेट्रो और Public Transport का अधिक इस्तेमाल करें।

पूरी दिल्ली के लिए एक Unified Parking Plan तैयार करने की भी बात कही गई है। फिलहाल पार्किंग से जुड़ी जिम्मेदारियां MCD, NDMC, DDA और Metro जैसी अलग-अलग एजेंसियों के बीच बंटी हुई हैं।

यमुना किनारे 52 KM का Cycle Track

दिल्ली में Sustainable Mobility को बढ़ावा देने के लिए यमुना के किनारे करीब 52 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक विकसित करने का प्रस्ताव है। प्लान में पैदल चलने, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

इसके साथ Electric और Hydrogen Fuel आधारित वाहनों को प्रोत्साहित करने तथा Charging और Refuelling Infrastructure विकसित करने की भी योजना है।

Wholesale Market को बढ़ावा, Warehouses शहर से बाहर

व्यापारिक गतिविधियों को लेकर भी Master Plan में बदलाव किए गए हैं। Wholesale Markets के लिए FAR बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिससे मौजूदा जमीन पर अधिक निर्माण और कारोबार की जगह उपलब्ध हो सके।

दूसरी ओर, Warehouses के FAR को कम करने और उन्हें शहर के अंदर फैलाने के बजाय बाहरी Logistics Clusters में विकसित करने को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे शहर के भीतर भारी लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

College और Institute अब एक ही Education Category

शिक्षा क्षेत्र में College और Institute को अलग-अलग श्रेणियों में रखने के बजाय Educational Institute नाम से एक कैटेगरी में लाने का प्रस्ताव है। इससे भूमि उपयोग और भवन मंजूरी की प्रक्रिया को सरल बनाने का लक्ष्य है।

इसके अलावा नरेला में करीब 138 हेक्टेयर क्षेत्र में Education Hub विकसित करने की योजना है। इसमें विश्वविद्यालय, Research Institutes, Skill Training Centres और Startups के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

Single Window System से आसान होगी मंजूरी

निर्माण और विकास परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने के लिए Single Window System विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य अलग-अलग विभागों से अलग-अलग मंजूरी लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

इससे पहले DDA ने Unified Building Bye-Laws 2016 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत नक्शा पास कराने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, Chief Inspector of Factories, दिल्ली जल बोर्ड और वन विभाग से अलग-अलग NOC लेने की शर्त हटाई गई है।

'जहां झुग्गी, वहां मकान' पर जोर

झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास के लिए प्लान में 'जहां झुग्गी, वहां मकान' के सिद्धांत को आगे बढ़ाया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को उनके मौजूदा स्थान के आसपास ही पक्का आवास उपलब्ध कराना है, ताकि उनके रोजगार और सामाजिक नेटवर्क पर कम असर पड़े।

ऐसी पुनर्विकास परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए अधिक FAR का प्रावधान किए जाने की बात कही गई है। अनधिकृत कॉलोनियों में सड़क, पानी, सीवर और कनेक्टिविटी सुधारने के साथ उन्हें शहर के औपचारिक ढांचे में शामिल करने का भी प्रस्ताव है।

पुरानी कॉलोनियों और DDA Flats का होगा Redevelopment

Master Plan में दिल्ली की पुरानी हो चुकी कॉलोनियों के पुनर्विकास को भी महत्व दिया गया है। DDA Housing Schemes, Plotted Development, Rehabilitation Colonies, Government Housing, Cooperative Group Housing Societies और Private Group Housing के Redevelopment का रास्ता खोलने की बात कही गई है।

पुराने दो मंजिला DDA Flats के पुनर्निर्माण के लिए भी नीति को आगे बढ़ाया गया है। नरायना विहार जैसी योजनाओं में कई आवास 50 साल से ज्यादा पुराने हैं और कुछ ढांचे कमजोर हो चुके हैं। नए प्रावधानों के तहत निर्धारित FAR, Ground Coverage, Height, Fire Safety और Structural Safety नियमों का पालन करते हुए इनके पुनर्विकास की अनुमति मिल सकती है।

Outer Delhi में Land Pooling और Flexi Road

बाहरी दिल्ली के क्षेत्रों में Land Pooling Policy को आगे बढ़ाने की योजना है। इसमें जमीन मालिक अपनी भूमि को एक साथ पूल करते हैं और विकास के बाद उन्हें विकसित जमीन का हिस्सा मिलने की व्यवस्था होती है।

Master Plan में Flexi Road की अवधारणा भी शामिल की गई है। इसका उद्देश्य सड़क नेटवर्क को जमीन की वास्तविक स्थिति के अनुसार लचीला बनाना है, ताकि छोटे या अनुपयोगी भूखंड न बनें। दिल्ली के बाहरी छोर के गांवों में Low Density Development का प्रावधान रखा गया है।

Jobs, Startups और Industrial Clusters को बढ़ावा

नरेला के Education Hub के अलावा प्लान में Investment-ready Business Districts, Modern Industrial और Logistics Clusters तथा Special Economic Zones विकसित करने की योजना है।

नरेला में Rithala-Kundli Corridor के Metro Depot के लिए भूमि उपयोग में बदलाव को भी मंजूरी मिलने की बात कही गई है। इससे शिक्षा, रोजगार, उद्योग और लॉजिस्टिक्स के लिए नए विकास क्षेत्रों को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी।

Green Cover, Yamuna और Ridge को मिलेगा नया फोकस

Master Plan के अनुसार दिल्ली का करीब 22 प्रतिशत क्षेत्र फिलहाल Green Area में आता है। इसे और बढ़ाने के लिए Green Connect नेटवर्क विकसित करने की योजना है। यह पार्क, जंगल, Biodiversity Parks, बावड़ियों और Green Corridors को आपस में जोड़ने का काम करेगा।

Delhi Ridge से Yamuna तक के क्षेत्र को एक Ecological Unit के तौर पर देखने की योजना है। Najafgarh, Trans-Yamuna और Barapullah Drainage Basins में नालों, Wetlands और Lakes को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया जाएगा। यमुना के O-Zone को सुरक्षित रखने का भी प्लान में उल्लेख है।

Sports, Health और Heritage को भी मिलेगी जगह

दिल्ली में Sports Infrastructure को Social Infrastructure का हिस्सा माना गया है। प्लान में इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, शिवाजी स्टेडियम, DDA के 23 Sports Complexes और तीन Golf Courses का उल्लेख है।

नरेला, द्वारका और रोहिणी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की नई खेल सुविधाएं विकसित करने की योजना है। Health Sector में अस्पतालों, Medical Colleges और Wellness Centres का विस्तार करने तथा दिल्ली को Medical Tourism के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

Heritage के क्षेत्र में पुरानी इमारतों के Adaptive Reuse, पारंपरिक बाजारों के Redevelopment और Heritage Walks को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है।

AI और Digital Twin से होगा दिल्ली का Future Planning

Master Plan 2047 को लागू करने के लिए Time-Bound Approvals, Digital Land Management, Phased Development और Land Value Capture जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

प्लान में जमीन की बढ़ी हुई कीमत से होने वाले लाभ को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में लगाने और Speculative Activities को नियंत्रित करने के लिए Regulatory Framework की बात भी कही गई है।

Technology के स्तर पर AI-Based Planning और Digital Twin जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करने की योजना है। इसके क्रियान्वयन में केवल DDA की भूमिका नहीं होगी। केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, MCD, NDMC, DMRC, NCRTC, दिल्ली जल बोर्ड और DUSIB समेत कई एजेंसियां मिलकर Master Plan 2047 को जमीन पर उतारेंगी।

इस तरह Master Plan Delhi 2047 सिर्फ नए घर और सड़कें बनाने की योजना नहीं है, बल्कि बढ़ती आबादी, Public Transport, Housing, Environment, Employment, Education, Heritage और Urban Infrastructure को एक साथ बदलने का दीर्घकालिक खाका है।

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