होम अमेठी में 6.40 करोड़ के Loan Scam का खुलासा! फर्जी Appointment Letter से 64 लोन, 12 पर केस
अमेठी में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की आंतरिक जांच में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के लोन घोटाले का मामला सामने आया है।
अमेठी में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की आंतरिक जांच में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के लोन घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि राजीव गांधी पॉलीटेक्निक, मुसाफिरखाना और ग्रामोद्योग सेवा संस्थान के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर अलग-अलग SBI शाखाओं से करीब 6.40 करोड़ रुपये के एक्सप्रेस क्रेडिट लोन स्वीकृत कराए गए। मामले में बैंक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने 12 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बैंक की आंतरिक जांच के अनुसार, 15 मार्च 2022 से 15 जून 2024 के बीच अलग-अलग जिलों में स्थित SBI शाखाओं से कुल 64 एक्सप्रेस क्रेडिट लोन स्वीकृत कराए गए। इनमें से 11 लोन अमेठी जिले की शाखाओं से लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
बैंक की तहरीर के मुताबिक, इन लोन के लिए संबंधित लोगों को राजीव गांधी पॉलीटेक्निक और ग्रामोद्योग सेवा संस्थान का कर्मचारी बताया गया था। उपलब्ध बैंक रिकॉर्ड के आधार पर कथित वित्तीय धोखाधड़ी की रकम लगभग 6.40 करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि, SBI ने स्पष्ट किया है कि अंतिम राशि अभिलेखों के मिलान और सत्यापन के साथ ब्याज, शुल्क तथा अन्य वित्तीय समायोजनों के बाद निर्धारित की जाएगी।
मामले में बैंक के मुख्य प्रबंधक राहुल सिंह ने मंगलवार को मुसाफिरखाना कोतवाली में शिकायत दी। इसी तहरीर के आधार पर पुलिस ने 12 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
बैंक की जांच में आरोप लगाया गया है कि कथित फर्जी कर्मचारियों के नाम पर खोले गए SBI खातों में पहले पॉलीटेक्निक के HDFC और Bank of Baroda के चालू खातों से डमी क्रेडिट के तौर पर रकम भेजी गई। इसके बाद इन खातों को संस्थान के वास्तविक कर्मचारियों के वेतन खाते के तौर पर दिखाने की कथित कोशिश की गई।
जांच के अनुसार, इसी आधार पर संबंधित लोगों की नियुक्ति, वेतन और आय से जुड़े रिकॉर्ड तैयार किए गए, जिनका इस्तेमाल आगे लोन लेने के लिए किया गया।
पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप है कि कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति पत्र, वेतन पर्चियां और Form-16 तैयार किए गए। इन दस्तावेजों को बैंक के सामने वास्तविक दस्तावेजों के रूप में पेश किया गया। इसके आधार पर संबंधित व्यक्तियों को पॉलीटेक्निक या संस्थान का कर्मचारी दर्शाया गया और उनके नाम पर एक्सप्रेस क्रेडिट लोन स्वीकृत कराए गए।
SBI की आंतरिक जांच में इन दस्तावेजों और लोन खातों के बीच कई स्तरों पर संदिग्ध लेनदेन सामने आने का दावा किया गया है।
बैंक की शिकायत में पॉलीटेक्निक के मैनेजर अमित द्विवेदी, प्रधानाचार्य देवेंद्र प्रसाद शुक्ला, निदेशक सरोज कुमार और सहायक राहुल नायक समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं। बैंक ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर आपसी सहयोग और सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उनके आधार पर बैंक से लोन हासिल किए।
जांच में यह भी सामने आया कि शुरुआत में कुछ लोन खातों में किस्तों का भुगतान किया गया था। हालांकि, बाद में कई खाते Non-Performing Asset (NPA) में बदल गए। इसके बाद बैंक ने पूरे मामले की जांच शुरू की।
बैंक के अनुसार, अमित द्विवेदी, पुष्पा देवी, राहुल नायक और अंकित शुक्ला समेत अन्य लोगों के नाम पर एक्सप्रेस क्रेडिट लोन स्वीकृत किए गए। इसके अलावा अमित कुमार पांडेय, अंकिता, अनुराज और शैलेंद्र कुमार सहित अन्य व्यक्तियों पर भी पॉलीटेक्निक का कर्मचारी बनकर लोन लेने का आरोप है।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जिन लोगों को संस्थान का कर्मचारी बताया गया, उनकी वास्तव में नियुक्ति हुई थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि बैंक में जमा किए गए कथित फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए और इस पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी।
मामले की जांच के लिए बैंक ने पुलिस को कई अहम दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। इनमें कर्मचारियों की सूची, लोन खातों का विवरण, कथित फर्जी नियुक्ति पत्र, वेतन पर्चियां और Form-16 की प्रतियां शामिल हैं।
इसके अलावा बैंक ने लोन खातों के स्टेटमेंट और पैसों के लेनदेन से जुड़ा Fund Trail भी पुलिस को सौंपा है। इन दस्तावेजों के आधार पर जांच एजेंसी लोन स्वीकृत होने से लेकर रकम के इस्तेमाल और उसके ट्रांसफर तक की पूरी कड़ी खंगाल रही है।
मुसाफिरखाना कोतवाल विवेक सिंह ने बताया कि बैंक की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस लोन खातों, बैंक में जमा किए गए दस्तावेजों और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उन्हें बैंक में पेश करने और लोन स्वीकृत कराने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही बैंक से प्राप्त रकम को कहां-कहां ट्रांसफर किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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