होम 26 जून 1975 को लोकतंत्र की हुई गिरफ्तारी:वरिष्ट समाजवादी नेता अशोक शम्सा
देश आजाद कराने वाले नेता महान,कुशाग्र,निडर, कुशल ,व्यवहारी व चरित्रवान थे
26 जून 1975 भारत के लोकतंत्र में राजनीतिक आतंक का शर्मनाक काला दिन था। महात्मा गांधी का आन्दोलन ,आजादी व स्वराज्य के लिए था। आजादी मिली स्वराज्य के लिए संविधान में संकल्प लिया । देश की राज-व्यवस्था में इतिहास और विचारधारा का सबसे अधिक महत्व रहता है। देश आजाद कराने वाले नेता महान,कुशाग्र,निडर, कुशल ,व्यवहारी व चरित्रवान थे। आजादी के तुरंत बाद वैचारिक हिंसा ने महात्मा को गोली से मार दिया। गांधी के राम-राज्य की जिम्मेदारी कांग्रेस पर थी। चमकदार कपड़े वाले कांग्रेसी और समाजवादी बहुत दिनों तक साथ नहीं रह सके। सरकार और विपक्ष,दोनों के पास गांधी थे मगर सरकार अंग्रेज़ियत पर चल रही थी। बड़े काम हुए और सामाजिक, राजनीतिक ढ़ांचा,विभिन्नता में एकता को मजबूत करने में लगा ।लेकिन 1967 आते आते ,जनता का कांग्रेस से मोहभंग होने लगा।राजनीतिक गर्माहट ने गरीब, किसान,युवा , मजदूर,छात्र कर्मचारी सभी ,कांग्रेस हटाओ के लिए लाम बंद हो गए।कांग्रेस जनान्दोलनों को पुलिस हिंसा से दबाने लगी। राजनीति में नये समीकरण बने ,कई राज्यों में कांग्रेस सरकारें चली गईं लेकिन इसका लाभ जनता को अधिक नहीं मिला। भ्रष्ट व अवसरवादी नेताओं ने विचारधारा की राजनीति छोड़ कर, सत्ता में जाकर खुद को मजबूत किया।जनता में सरकारों के खिलाफ गुस्सा बढ़ता गया। केन्द्र की इंदिरा गांधी सरकार का विरोध कांग्रेस के अंदर होने लगा। कांग्रेस टूट गई। 1974 में कांग्रेस के खिलाफ जनान्दोलन, जे पी आन्दोलन बन गया। यह व्यवस्था परिवर्तन का आन्दोलन था। इसी समय इंदिरा गांधी का चुनाव,इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी नेता राजनारायण की चुनाव याचिका पर रद्द कर दिया। इंदिरा गांधी सरकार छोड़ना नहीं चाहती थी ।जे पी आन्दोलन तेज था 26 जून 1976 को आपातकाल (Emergency) की घोषणा कर दी ।
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