होम मंत्री जी को बरकारार रखना चाहिए बुजुर्गों का सम्मान स्वरूप रेल टिकट पर मिलने वाली छूट , रियायत नहीं सम्मान थी:वरिष्ठ पत्रकार संजीव शुक्ला
प्राचीन भारत के गुरुकुलों व विद्यालयों में “मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः व आचार्य देवो भवः” इन मंत्रों का उद्घोष प्रतिदिन सुना जाता था, परंतु पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव व तीव्र गति के शहरीकरण की वजह से भारतीय समाज की संरचना में परिवर्तन आ रहे हैं
लखनऊ। बुढ़ापा एक सामान्य मानवीय प्रक्रिया है जो मानव जीवन चक्र में स्वाभाविक रूप से चलती रहती है। इस प्रकिया में मानव शरीर के अंगों के कामकाज की क्षमता में गिरावट आती है, परंतु, ज्ञान, गहन अंतर्दृष्टि और विविध अनुभवो का भंडार होता है। प्राचीन भारत के गुरुकुलों व विद्यालयों में “मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः व आचार्य देवो भवः” इन मंत्रों का उद्घोष प्रतिदिन सुना जाता था, परंतु पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव व तीव्र गति के शहरीकरण की वजह से भारतीय समाज की संरचना में परिवर्तन आ रहे हैं एवं हम अपने संस्कार व बुजुर्गों के प्रति सम्मान के भाव को खोते जा रहे है।सरकार द्वारा बुजुर्गो को दी रहे कोई भी छूट दरअसल सरकार की मेहरबानी नहीं बल्कि उनके प्रति एक सम्मान भी होती है। रेल मंत्रालय ने अब ट्रेन में सफर करने वाले सीनियर सिटीजन का कोटा खत्म कर दिया है। सीनियर सिटीजन को अब सामान्य लोगों की तरह किराया लगेगा। संसद में रेल मंत्री ने कहा कि इससे रेलवे को काफी नुकसान होता था, इस वजह से मंत्रालय ने यह फैसला किया है कि सीनियर सिटीजन्स को मिलने वाला कोटा पूरी तरह से बंद किया जाएगा।बता दें कि 60 से अधिक उम्र के पुरुष और 58 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को रेलवे में सीनियर सिटीजन की कैटगरी में रखा जाता है।
राजधानी, शताब्दी, दूरंतो समेत सभी मेल एक्सप्रेस ट्रेनों में पुरुषों को टिकट के बेस फेयर में 40 फीसदी और महिलाओं को 50 फीसदी की छूट दी जाती थी। बुजुर्गों को टिकट का जितना किराया होता था, उसमें 50% की छूट मिलती थी, जिसे अब खत्म कर गया है। यानी अब से सीनियर सिटीजन्स को टिकट में कोई भी रियायत नहीं मिलेगी। उन्हें भी सामान्य वर्ग की तरह पूरा टिकट लेना पड़ेगा।लॉकडाउन के बाद रेल सेवाएं सामान्य होने से, जो लोग फिर से रेल टिकट में छूट की पुरानी व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद कर रहे थे। उनके लिए बुरी खबर है। रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने साफ कर दिया है कि पहले से ही यात्रियों का किराया कम है। ऐसे में टिकट पर और रियायत नहीं दी जा सकती है। रेल मंत्री के बयान से साफ है कि कोविड-19 से पहले सीनियर सिटीजन को रेल टिकट पर मिलने वाली छूट अब बहाल नहीं की जाएगी। और सीनियर सिटीजन को पूरा किराया देकर ही यात्रा करनी होगी। आप को बता दें की भारत में सीनियर सिटीजन्स को दो श्रेणियों में बांटा गया है। जिन व्यक्तियों की उम्र 60 से 79 वर्ष के बीच हैं उनको ‘सीनियर सिटीजन्स’कहा जाता है। जिनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है उनको सुपर सीनियर सिटीजन्स की श्रेणी में रखा जाता है।भारत में 60 से 79 वर्ष के बीच के सीनियर सिटीजन्स को 3 लाख रुपये प्रति वर्ष तक की आय पर इनकम टैक्स देने की जरूरत नहीं है. इसके अलावा सुपर सीनियर सिटीजन को 5 लाख/वर्ष की इनकम पर इनकम टैक्स देने की जरूरत नहीं है।
इसके अलावा आपने बसों में सीनियर सिटिडन के लिए बस सीट रिजर्व देखी होंगी। बस यात्रा स्टेट गवर्नमेंट द्वारा सीनियर सिटीजन को बस में भी ऑफर के तौर पर डिस्काउंट दिया जाता है। इसलिए बसों में सीट उनके लिए पहले से ही रिजर्व रहती हैं। यहां तक की मेट्रो में उनके रिजर्व रहती हैं।भारत के सीनियर सिटीजन्स को बैंकों में जमा धन पर अधिक ब्याज मिलता है। लोन सस्ते रेट पर मिल जाता है इसके अलावा सरकार की तरफ से इस तरह की विभिन्न स्कीम के रिटर्न पर टैक्स भी नहीं लगाया जाता है। पर क्या इससे पहले आपको ये पता था।सीनियर सिटीजन को बैंक और अस्पतालों में भी कई प्रकार के डिस्काउंट दिये जाते हैं। जैसे कि सीनियर सिटीजन के लिए अस्पतालों में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए और जांच कराने के लिए अलग से लाइन रहता है।देश और प्रदेश की सरकारें वृद्ध लोगों को वृद्धावस्था पेंशन देतीं हैं। वर्तमान में दिल्ली की केजरीवाल सरकार 60-69 वर्ष तक के वृद्ध लोगों को हर माह 2000 रुपये और 70 साल से अधिक के वृद्धों के लिए 2500 रुपये हर महीने देती है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार अपने यहाँ 60 वर्ष से अधिक के वृद्धों को 800 रुपये हर महीने देती है।सरकार ने सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए कैंसर, मोटर न्यूरॉन रोग, एड्स इत्यादि जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज पर होने वाले चिकित्सा खर्चों के लिए छूट सीमा को बढ़ा दिया है।
अब वर्ष 60 से ऊपर के सभी वृद्ध जन आयकर अधिनियम की धारा 80 DDB के तहत ऊपर लिखी गयी बीमारियों के लिए 1 लाख रुपये तक के इलाज पर इनकम टैक्स में रिबेट ले सकते हैं।मालूम हो की वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष और महिला) को जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी द्वारा जारी पहचान पत्र जारी किया जाता है इन कार्डों की सहायता से वे अस्पतालों, बस स्टैंडों आदि में पानी और बिजली के बिलों के भुगतान के लिए अलग-अलग कतारें लगा सकते हैं। हमारे समाज में संवादहीनता को खत्म करने की पहल होनी चाहिए। सामंजस्य स्थापित करने की समझ सभी के अंदर विकसित होनी चाहिए, ताकि भारतीय समाज की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण संस्था परिवार पूरे दमखम के साथ चिर नवीन बनी रहे, इसमें न कभी कोई घुन लगे, न कोई दीमक। और भारत अपनी भारतीयता के साथ अपने संस्कारों के साथ अपने कल और आज के साथ नित नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सके। वास्तव में विकसित देश होने का प्रमाण इस बात में निहित है कि वह न केवल अपनी युवा आबादी का पालन-पोषण करता है बल्कि अपने वृद्धों की भी समान रूप से देखभाल करता है।उपर्युक्त फैसले यह बताते है की बुजुर्गों को मिलने वाली सुविधा को पूर्व की सरकारे नफे नुक्सान से नहीं बल्कि सम्मान से देखती थी।
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