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प्रशांत किशोर की एंट्री से देश में विपक्ष कौन का मुद्दा और गरमाया
एक ओर यूपी, पंजाब और अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर देश में सियासी माहौल गरम है तो दूसरी तरफ़ विपक्ष का नेतृत्व कौन कर रहा है इसे लेकर भी एक नई बहस छिड़ी हुई है.
इस साल हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस एक बार फिर हाशिए पर सिमटती दिखी, तो बंगाल में बीजेपी को जीत से रोकने वाली तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी विपक्ष को एक नया चेहरा देने की कवायद में जुटी हैं. अब उन्होंने ख़ुल कर कांग्रेस पर हमला बोलना शुरू कर दिया है.
इसी कड़ी में चुनावी रणनीतिकार के तौर पर मशहूर प्रशांत किशोर ने भी गुरुवार को एक बार फिर कांग्रेस पार्टी पर खुल कर हमला किया.
प्रशांत किशोर ने इस बार कांग्रेस के विपक्ष का नेतृत्व करने की क्षमता पर सवाल उठाया और कहा कि जो पार्टी बीते 10 सालों में 90 फ़ीसद चुनाव हार गई है उसे विपक्ष के नेतृत्व का फ़ैसला भी लोकतांत्रिक तरीक़े से होने देना चाहिए.
इस दौरान उन्होंने बिना नाम लिए ये भी कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व का व्यक्तिगत तौर पर किसी को दैवीय अधिकार नहीं है.
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "कांग्रेस जिस विचार और स्थान (स्पेस) का प्रतिनिधित्व करती है, वो एक मज़बूत विपक्ष के लिए काफ़ी अहम है. लेकिन इस मामले में कांग्रेस नेतृत्व का व्यक्तिगत तौर पर किसी को दैवीय अधिकार नहीं है; वो भी तब जब पार्टी पिछले 10 सालों में 90 फ़ीसद चुनावों में हारी है. विपक्ष के नेतृत्व का फ़ैसला लोकतांत्रिक तरीक़े से होने दें."
इसके साथ ही बीते कुछ दिनों से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और कांग्रेस के बीच चल रही रस्साकशी में प्रशांत किशोर की भी एंट्री हो गई है.
दरअसल, बुधवार को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने मुंबई में एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाक़ात की. उसके बाद उन्होंने पत्रकारों के सवालों पर ये कहा था कि "अब कोई यूपीए नहीं है."
संयुक्त प्रगतशील गठबंधन यानी यूपीए कांग्रेस की अगुआई में कई दलों को मिलाकर बना गठबंधन था. 2014 में बीजेपी के केंद्र की सत्ता में आने से पहले डॉक्टर महमोहन सिंह यूपीए में शामिल दलों के समर्थन से ही प्रधानमंत्री थे.
ममता बनर्जी ने बुधवार को राहुल गांधी का नाम लिए बगैर उन पर भी हमला किया. उन्होंने कहा कि, "अगर वो देश में रहते ही नहीं हैं, आधा टाइम विदेश में रहते हैं, तो राजनीति कैसे होगी. राजनीति में निरंतर प्रयास आवश्यक है."
कांग्रेस को नकारते हुए यूपीए के घटक दलों को एकजुट करने के अभियान में ममता बनर्जी ने बुधवार को शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं से मुलाक़ात की.
कांग्रेस पर हमलावर ममता ने ये भी कहा था कि पार्टी ने सिविल सोसाइटी के मुद्दे पर उनकी बात नहीं सुनी. इस दौरान ममता ने कहा, "मैंने बहुत बार कांग्रेस को कहा कि एक एक्सपर्ट टीम बनाओ जो हमें गाइड करे लेकिन कांग्रेस ने नहीं सुना. हम चाहते हैं कि पूरे हिंदूस्तान में आप सिविल सोसायटी की एक कमिटी बनाएं और हमें बताएं कि क्या करना है. अगर किसी बेगुनाह को जेल में बंद किया है तो उसे बाहर निकालने की कोशिश करेंगे."
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