होम काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण से पहले अस्सी घाट के पास के घरों की दीवारें, छत, फर्श अचानक टूट रहे
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के लोकार्पण से पहले अस्सी घाट के पास के घरों की दीवारें, छत, फर्श अचानक टूट रहे
13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों होने वाला है और इधर वहां से तीन किमी दूर अस्सी घाट के किनारे एक अजीब घटना सामने आई है.
यहां गंगा किनारे गंगोत्री विहार कॉलोनी के करीब 35 घरों की दीवारें, छत, दरवाजे और फर्श अचानक से टूट रहे हैं. कई घरों के दरवाजे पूरी तरह से अलग हो चुके हैं. वहीं, कई घर तो बीचों-बीच से ऐसे फटे हैं कि 2 भाग में बंट चुके हैं. छत भी अजीब ढंग से गिर गई हैं. ऐसा लगा रहा कि इस एरिया में कोई भूकंप आया हो.
काफी संख्या में लोग यहां से विस्थापित हो रहे हैं. 10 मकानों को छोड़कर लोग निकल गए हैं, बाकी के घर भी लोग छोड़ रहे हैं। आसपास के लोग कॉलोनी के नीचे से गई पाइपलाइन को इसका कारण मान रहे हैं। लोगों के मुताबिक बीएचयू के प्रोफेसर स्नेह ने मौके पर निरीक्षण भी किया. इस पर काम शुरू कराने की बात विधायक जी ने भी कही, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है.
ज़ी मीडिया से खास बातचीत में यहां के निवासियों ने बताया कि इस क्षेत्र में लगातार दरारें बढ़ती जा रही हैं. हम घर में डरकर रहने को मजबूर हैं. कोई देखने और सुनवाई करने वाला नहीं है. ऐसे में उनकी मांग है कि जल्द से जल्द इस मामले को संज्ञान में लेकर उचित कार्यवाही की जाए, जिससे वह सुरक्षित तरीके से बिना किसी डर के अपने घर में रह सकें. उनके मुताबिक यह दिक्कत पाइपलाइन डालने की वजह से ही होती है पिछली बार भी ऐसा ही हुआ था. इलाके के लोगों की मानें तो अफसर तभी जागेंगे जब यहां पर दो-चार लोगों की जान चली जाएगी और कोई बड़ा हादसा होगा.
गुरुप्रसाद रिक्शा चलाते हैं. मेहनत की कमाई से पाई-पाई जोड़कर मकान बनाया. उनकी पत्नी भी मजदूरी करती हैं. उनका कहना है कि रहने के लिए जैसे तैसे एक छोटा सा मकान बनाया, लेकिन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की पाइप लाइन के चलते उनका घर पूरी तरह धराशाई होता जा रहा है. फिलहाल उनको सिर्फ आश्वासन मिला है. उनकी सरकार से मांग है कि उनको जल्द न्याय मिले और वह अपने घर में बिना किसी दहशत और डर के रह सकें.
यहीं की रहने वाली सुनीता देवी के मुताबिक जब 2016 में यहां पाइप लाइन बिछाई गई थी तब भी ऐसा ही हुआ था और अब दोबारा यही स्थिति आ गई है. उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं. कोई हादसा होने की चिंता में वह ठीक से रह भी नहीं पा रही हैं. उनकी मांग है कि उनके मकान को दुरुस्त कराया जाए, साथ ही समस्या का समाधान किया जाए.
सुनीता के मुताबिक यहां के करीब 20 घर दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं. वह खुद अपने परिवार के साथ सड़क पर रहने को मजबूर हैं.डर के चलते अपने घरों में नहीं जा पा रही हैं. इसी डर के चलते रात सड़कों पर गुजार रही हैं.
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