होम RSS प्रमुख मोहन भागवत ने Gen Z से संवाद में शिक्षा, लोकतंत्र और आंदोलनों पर रखी राय
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने Gen-Z के साथ संवाद कार्यक्रम में लोकतंत्र, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की भूमिका पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि किसी की आवाज नहीं सुनी जाती है तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जा सकता है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने Gen-Z के साथ संवाद कार्यक्रम में लोकतंत्र, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की भूमिका पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि किसी की आवाज नहीं सुनी जाती है तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जा सकता है। हालांकि, उनका कहना था कि आंदोलन का उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार (System Correction) लाना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध भी संवाद का एक माध्यम है और आम सहमति बनाने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मोहन भागवत ने कहा, 'लोकतंत्र में विरोध भी आम सहमति बनाने का एक तरीका है. कई तरह के विचार सामने आते हैं और बातचीत के बाद आम सहमति बनती है. यह बातचीत संवाद के जरिए हो सकती है. अगर अलग-अलग वजहों से बात नहीं सुनी जाती तो आंदोलन किया जा सकता है. लेकिन ऐसा आम सहमति बनाने के लिए किया जाना चाहिए, न कि बंटवारा करने के लिए.'
RSS प्रमुख ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में अभी कई सुधारों की जरूरत है और Gen-Z द्वारा उठाए जा रहे कुछ सवाल उचित हैं।
उन्होंने कहा, 'भारत की शिक्षा व्यवस्था में बहुत कुछ करने की जरूरत है और ऐसा नहीं हो रहा है इसलिए यह मुद्दा उठाया जा रहा है. Gen Z के बारे में मेरे अनुभव की बात करें तो जब हम उनकी उम्र के थे तो हम बड़ों की बात मान लेते थे, कभी सवाल नहीं उठाते थे. अब, Gen Z और Gen Alpha सवाल पूछते हैं, उन्हें तार्किक जवाब और प्यार चाहिए. लोकतंत्र में यही तरीका है. इसे अंग्रेजी में 'डिबेट' कहते हैं, हम इसे 'शास्त्रार्थ' कहते हैं - वहाँ कोई बहस नहीं होती, बल्कि दो पक्ष होते हैं- 'पूर्व' और 'उत्तर.'
मोहन भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन उसका तरीका संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'हम सभी पहलुओं को देखते हैं और हर किसी का अपना नजरिया होता है. हमें बहुत सारे विचार और विरोधी विचार मिलते हैं, जो मिलकर सच्चाई की पूरी तस्वीर बनाते हैं. ऐसा जरूर होना चाहिए. मैं यह नहीं कहूंगा कि Gen-Z को विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में विरोध करने और काम करने के कुछ तरीके होते हैं. संविधान बनाने वालों ने, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के भाषणों में, इस बारे में संकेत दिए हैं. इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए.'
उन्होंने आगे कहा, 'Gen Z विरोध करने के लिए आवाज नहीं उठा रही है, वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें कुछ दिक्कतें हैं, जिसे ठीक किया जाना चाहिए. आंदोलन मेरे या आपके खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम को ठीक करने के लिए होना चाहिए.'
छात्र आंदोलनों और प्रदर्शनकारियों को 'देश-विरोधी' कहे जाने के सवाल पर मोहन भागवत ने नई पीढ़ी का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें इस तरह से नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'अगर Gen Z विरोध कर रहा है तो वे देश-विरोधी नहीं हैं. वे हमारे ही लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं. मुझे नहीं लगता कि Gen Z ऐसी है. मुझे लगता है कि नई पीढ़ी Gen Z और Gen Alpha हमारी मौजूदा पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार है. देशभक्ति और सेवा की सच्ची अपील उन पर असर करती है.'
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