होम कानून वापसी की टाइमिंग पर उठ रहे सवाल । विपक्षी दलों पर बरसे PM मोदी

समाचारदेश Alert Star Digital Team Nov 19, 2021 10:42 PM

कानून वापसी की टाइमिंग पर उठ रहे सवाल । विपक्षी दलों पर बरसे PM मोदी

कानून वापसी की टाइमिंग पर उठ रहे सवाल । विपक्षी दलों पर बरसे PM मोदी

कानून वापसी की टाइमिंग पर उठ रहे सवाल । विपक्षी दलों पर बरसे PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह सबेरे राष्ट्र के नाम संबोधन देने के बाद उत्तर प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे के लिए महोबा पहुंचे। जहां पर उन्होंने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इतना ही नहीं उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्षियों पर जमकर निशाना साधा और कहा कि किसानों को हमेशा समस्याओं में उलझाए रखना ही कुछ राजनीतिक दलों का आधार रहा है। ये समस्याओं की राजनीति करते हैं और हम समाधान की राष्ट्रनीति करते हैं। हम बात विपक्षियों की टिप्पणियों पर भी करेंगे। जो कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान के बाद सामने आईं हैं। कुछ नेताओं ने तो इसकी टाइमिंग पर ही सवाल खड़ा कर दिया और अंत में बात तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू की करेंगे। जिन्होंने भावुक होगा बहुत बड़ा संकल्प ले लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महोबा से अपने तीन दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने महोबा, हमीरपुर, बांदा व ललितपुर में 3,240 करोड़ रुपए की अर्जुन सहायक परियोजना, भावनी बांध परियोजना, रतौली बांध परियोजना, मसगांव-चिल्ली स्प्रिंकलर परियोजना का लोकार्पण किया। इसके बाद उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि महोबा की ऐतिहासिक धरती पर आकर एक अलग ही अनुभूति होती है।

 

उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले मैंने महोबा से ही देश की मुस्लिम बहनों से वादा किया था कि मैं उन्हें तीन तलाक की कुप्रथा से मुक्ति दिलाऊंगा। ये वादा भी पूरा हो चुका है। वहीं विपक्षियों पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक शासन करने वालों ने बारी-बारी से बुंदेलखंड को उजाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यहां के जंगलों, संसाधनों को कैसे माफिया के हवाले किया गया, ये किसी से छिपा नहीं है। लेकिन अब इन्हीं माफियाओं पर बुलडोजर चल रहा है, तो कुछ लोग हाय-तौबा मचा रहे हैं। ये लोग कितनी भी तौबा मचा लें, यूपी के विकास के काम, बुंदेलखंड के विकास के काम रुकने वाले नहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया। जिसके बाद मिली जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मुझे दुख है कि हम कुछ किसानों को इन कानूनों के लाभ के बारे में समझाने में सफल नहीं हुए। प्रधानमंत्री ने हमेशा इन कानूनों के जरिये कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने की कोशिश की। लेकिन ऐसी स्थिति पैदा हो गई कि कुछ किसानों को इन कानूनों में दिक्कतें दिखाई दीं।

 

गृह मंत्री अमित शाह ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कृषि कानूनों से जुड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐलान स्वागत योग्य और एक राजनेता की तरह उठाया गया कदम है। जैसा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सरकार हमारे किसानों की सेवा करती रहेगी और उनके प्रयासों का हमेशा समर्थन करेगी। वहीं, अकाल तख्त के 30वें जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि हमारी चिंता यह है कि कुछ लोगों ने इस आंदोलन को सिख बनाम भारत सरकार के रूप में चित्रित करने की कोशिश की है। इतना ही नहीं इसे सिख बनाम हिंदुओं के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया है। वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। 

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