होम डॉलर के मुकाबले पस्त हुआ रुपया, मजबूत GDP ग्रोथ के बाद क्यों आई गिरावट, जानें वजह

समाचारअर्थ व बाजार Alert Star Digital Team Dec 1, 2025 04:56 PM

डॉलर के मुकाबले पस्त हुआ रुपया, मजबूत GDP ग्रोथ के बाद क्यों आई गिरावट, जानें वजह

सोमवार के कारोबारी दिन भारतीय करेंसी मार्केट में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। भारतीय रुपया की कीमत डॉलर के मुकाबले फिसलकर ₹89.76 के ऑल-टाइम लो पर पहुंच गई। रुपया अपने दो सप्ताह पहले बने लो रिकॉर्ड ₹89.49 से भी नीचे फिसल गया है।

डॉलर के मुकाबले पस्त हुआ रुपया, मजबूत GDP ग्रोथ के बाद क्यों आई गिरावट, जानें वजह

सोमवार के कारोबारी दिन भारतीय करेंसी मार्केट में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। भारतीय रुपया की कीमत डॉलर के मुकाबले फिसलकर ₹89.76 के ऑल-टाइम लो पर पहुंच गई। रुपया अपने दो सप्ताह पहले बने लो रिकॉर्ड ₹89.49 से भी नीचे फिसल गया है।

चौंकाने वाली बात यह है कि यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब पिछले दिनों भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की शानदार जीडीपी ग्रोथ दर्ज की है। यानी, एक ओर तो देश की जीडीपी तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है।

रुपये में गिरावट के 3 मुख्य कारण

बाजार जानकारों के अनुसार, रुपये में हो रही इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  1. विदेशी पोर्टफोलियो द्वारा बिकवाली (FPI Outflow): विदेशी निवेशक भारतीय बाजार पर दांव लगाने से परहेज कर रहे हैं। साल 2025 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी मार्केट से $16 बिलियन डॉलर से अधिक की निकासी की है। इतनी बड़ी निकासी से करेंसी पर दबाव बढ़ जाता है।
  2. ट्रेड डेफिसिट में बढ़ोतरी: भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ता को लेकर अभी तक कोई परिणाम नहीं आया है, और अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ का असर ट्रेड बैलेंस पर देखने को मिल रहा है। अक्टूबर महीने में देश का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचा, जिसके कारण डॉलर की मांग में बढ़ोतरी हुई और रुपया कमजोर हुआ।
  3. डॉलर की मांग में वृद्धि: ट्रेड डेफिसिट के बढ़ने से आयात बिलों के भुगतान के लिए डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जिससे रुपये पर दबाव आता है।

रुपये में गिरावट का क्या होगा असर?

रुपया कमजोर होने का असर सीधे लोगों की जेब पर पड़ता है, क्योंकि डॉलर में खरीदी जाने वाली वस्तुओं की कीमत बढ़ जाती है।

  • आयात लागत: इसका सबसे बड़ा प्रभाव इंपोर्ट कॉस्ट पर दिखता है।
  • महंगी होंगी वस्तुएं: कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोना, मशीनरी और फर्टिलाइजर्स की कीमतों में इजाफा हो सकता है। इन सभी की कीमत बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो जाती हैं।
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