होम हम रामचरितमानस के खिलाफ नहीं, अखिलेश यादव बोले- ताड़न का अर्थ सभी को पता, योगी चौपाई पढ़कर सुना दें
हम रामचरितमानस के खिलाफ नहीं, अखिलेश यादव बोले- ताड़न का अर्थ सभी को पता, योगी चौपाई पढ़कर सुना दें
रामचरितमानस पर उठे विवाद को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने विधानसभा में बीजेपी को घेरने की कोशिश की। अखिलेश ने कहा कि हम रामचरितमानस के खिलाफ नहीं हैं। आपने हमारा स्टेटमेंट सुना होगा।
सवाल केवल कुछ चौपाइयों का है। कहा कि सदन में सत्ता पक्ष के लोग हों या विपक्ष के लोग, सभी से पूछ लीजिए ताड़न का अर्थ क्या है। सभी को उसका अर्थ पता है। अगर चौपाई गलत नहीं हैं तो नेता सदन (सीएम योगी) उन चौपाइयों को पढ़कर सुना दें। इसलिए हमने कहा है कि जो गलत है वो गलत है। यह पांच हजार साल पुरानी समस्या है। शुद्र कोई जन्म से नहीं होता है।
विधानसभा में बजट को लेकर हो रही चर्चा के दौरान रामधारी सिंह दिनकर की किताब रश्मिरथी लेकर सदन में पहुंचे अखिलेश ने उसकी कई पंक्तियां पढ़ीं और सीएम योगी से पूछ ही लिया कि शुद्र कौन है। अखिलेश ने सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर की तरफ इशारा करते हुए भी पूछा कि आप शुद्र हो या नहीं।
राजभर जवाब देने के लिए उठे लेकिन स्पीकर ने उन्हें अपनी बारी आने पर ही बोलने की हिदायत देते हुए बैठा दिया। इस पर अखिलेश ने कहा कि आपकी हंसी बता रही है कि आप जातीय जनगणना पर हमारे साथ हो। किसी के प्रेशर में मत आना।
अखिलेश ने कहा कि भगवान सबके एक हैं, किसी एक के नहीं हैं। चंदा (राम मंदिर निर्माण के लिए) आप लेते हैं तो क्या भगवान आपके हो गये, लेकिन जो गलत है वह गलत है। उन्होंने मानस की एक चौपायी में ताड़न शब्द का जिक्र करते हुए कहा कि आप किसी एक को खड़ा कर दें कि ताड़न शब्द का क्या अर्थ है। हम भी 10 को खड़ा कर सकते हैं। क्या एक को खड़ा करके ताड़न का मतलब बताएंगे। आप बताइए कि उप्र की स्थिति क्या है।
योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को 'श्रीरामचरितमानस' के बारे में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधान पार्षद स्वामी प्रसाद मौर्य की टिप्पणी और उससे उपजे विवाद को लेकर विधानसभा में आरोप लगाया कि सपा इस पवित्र ग्रंथ को जलाकर 100 करोड़ हिंदुओं को अपमानित कर रही है।
आदित्यनाथ ने स्वामी मौर्य द्वारा आपत्तिजनक बतायी जा रही मानस की चौपायी की व्याख्या करते हुए सदन में कहा, ''महोदय यह वही पंक्ति है- ''ढोल, गंवार शूद्र, पशु, नारी। सकल ताड़न के अधिकारी।'' योगी ने कहा था कि दरअसल, ढोल एक वाद्य यंत्र है। गंवार का मतलब अशिक्षित से है। शूद्र का मतलब श्रमिक वर्ग से है किसी जाति विशेष से नहीं। उन्होंने ताड़न का मतलब दो उदाहरणों के साथ देखभाल और देखना बताया।
मंगलवार को इसी मामले पर जातियों को लेकर रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता सुनाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यह लड़ाई आज की नहीं है। यह लड़ाई पांच हजार साल पुरानी है। उन्होंने कहा कि मैंने रामचरितमानस के बारे में नहीं पूछा था। मैंने कहा था कि नेता सदन बताएं कि शूद्र क्या है। उन्होंने कहा कि यही शूद्र अगर आपके ढाल नहीं बने तो आप सत्ता में कभी नहीं आ सकते हैं।
उन्होंने योगी आदित्यनाथ के 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद पांच कालिदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास को गंगाजल से धुलवाने पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या आप किसी घर में गये होंगे तो गंगाजल से धोया होगा, यह कहां का सिद्धांत है।
उल्लेखनीय है अखिलेश यादव बतौर मुख्यमंत्री (2012-2017) पांच कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते थे। यादव ने सवाल किया कि क्या नेता सदन बताएंगे कि शूद्र गलत है, कोई जांघ से पैदा नहीं हो सकता और किसी का घर गंगाजल से नहीं धुलवा सकते।
यादव ने सदन में योगी की एक टिप्पणी पर कहा कि किसी के पिता के बारे में कोई बोलेगा तो दूसरा भी किसी के पिता के खिलाफ बोल सकता है। अगर आप परंपराओं पर चलना चाहते हैं तो यह परंपरा आपको छोड़नी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि अगर परंपराओं की ही बात होगी तो हो सकता है कि आपने भी बहुत से रीति रिवाज नहीं मानी। यह ठीक नहीं लगेगा अगर मैं कहूं, क्योंकि ऐसी शिक्षा मुझे नेताजी ने नहीं दी है।
86 में 56 एसडीएम यादव, अखिलेश ने दिया जवाब
शनिवार को सीएम योगी ने विधानसभा में अखिलेश यादव पर निशाना साधा था। सीएम योगी ने अपनी सरकार में हो रही पारदर्शी नियुक्तियों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि अखिलेश सरकार में 86 में से 56 एसडीएम एक ही जाति के चुने गए थे। योगी के आरोपों का सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को जवाब दिया।
सीएम योगी ने भले ही किसी जाति का नाम नहीं लिया था लेकिन अखिलेश खुलकर बोले। अखिलेश ने कहा कि यहां सभी को पता है कि एक जाति का मतलब क्या है। अखिलेश अपनी सरकार में एसडीएम बने सभी जातियों की लिस्ट लेकर विधानसभा पहुंचे थे।
अखिलेश ने बताया कि 2011 में 86 में से 56 नहीं केवल 5 एसडीएम यादव जाति के चुने गए थे। उन्होंने बताया कि 2012 में 4 यादव, 2013 में छह यादव और 2015 में तीन यादव चुने गए थे। अखिलेश ने सीएम योगी की तरफ इशारा करते हुए दोहराया कि उन्हें अपनी बात को साबित करने के लिए सदन में 86 में से 56 यादव वाली सूची रखनी चाहिए। अखिलेश ने यह भी जोड़ा कि मामला विशेषाधिकार का भी बनता है।
सीएम योगी ने क्या कहा था
यूपी विधानमंडल बजट सत्र के छठवें दिन शनिवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सपा सरकार और अखिलेश यादव पर हमला बोलेते हुए कहा था कि हमने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया लेकिन इनके (सपा) राज में यूपीएससी से चयनित एसडीएम के 86 में से 56 उम्मीदवार एक ही जाति से थे। तब प्रदेश में ये कमाल होता था। सीएम योगी जब यह आरोप लगा रहे थे उसी वक्त खड़े होकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लिस्ट सदन में टेबल करने की मांग की जिस पर सीएम योगी ने कहा कि लिस्ट भी उपलब्ध करा देंगे।
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