होम नैतिकता की मिसाल या बन गई मजबूरी, क्यों केजरीवाल को सिसोदिया और जैन का लेना पड़ा इस्तीफा?
नैतिकता की मिसाल या बन गई मजबूरी, क्यों केजरीवाल को सिसोदिया और जैन का लेना पड़ा इस्तीफा?
भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन ने आखिरकार अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। यही नहीं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फौरन दोनों नेताओं के इस्तीफों को स्वीकार कर लिया है।
आम आदमी पार्टी इसे नैतिकता बता रही है तो दूसरी तरफ भाजपा ने पूरे घटनाक्रम पर जोरदार हमला बोला है। भाजपा का कहना है कि आम आदमी पार्टी जिस मनीष सिसोदिया को पारदर्शिता की प्रतिमूर्ति बताते नहीं थकती थी, अब उनका इस्तीफा ले लिया है। क्या यह नैतिकता की मिसाल है या ऐसा करना आम आदमी पार्टी की मजबूरी बन गई थी। इस रिपोर्ट में करते हैं इन पहलुओं की पड़ताल...
सिसोदिया पर अदालतों के रुख से बैकफुट पर भी AAP सरकार
दिल्ली के शराब घोटाले में सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी ने एक दिन पहले तक केंद्र के खिलाफ अपना आक्रामक तेवर बरकरार रखा था। दूसरे दिन मंगलवार को जब सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी के खिलाफ मनीष सिसोदिया की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और हाईकोर्ट जाने की सलाह दी तब आम आदमी पार्टी को करारा झटका लगा था। भाजपा ने प्रेस कांफ्रेंस कर आम आदमी पार्टी पर जोरदार हमला बोला। वहीं आम आदमी पार्टी बैकफुट पर नजर आ रही थी।
पार्टी की साफ सुथरी छवि की चिंता
ऐसे में जब देश के कई राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। साथ ही अगले साल लोकसभा के चुनाव होने हैं। भाजपा ने एलान किया कि वह घर-घर जाकर सिसोदिया के कथित भ्रष्टाचार को जनता को बताएगी। दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन पहले से ही जेल में बंद थे। विरोधी दल बार बार अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार में डूबे नेताओं को बचाने का आरोप लगा रहे थे। ऐसे में अरविंद केजरीवाल पर लगातार मंत्रियों के इस्तीफे लेने का दबाव बन रहा था। यही नहीं पार्टी की साफ सुथरी छवि को चोट पहुंच रही थी।
सुप्रीम कोर्ट के रुख से झटका
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह साफ हो गया था कि मामले को पहले हाईकोर्ट सुनेगा। पहले हाईकोर्ट का फैसला आएगा उसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट याचिका पर विचार करेगा। सुप्रीम कोर्ट के रुख से आम आदमी पार्टी को समझ आ गया था कि मामला लंबा खिंच सकता है। दिल्ली सरकार के एक मंत्री सत्येंद्र जैन पहले से ही जेल में बंद हैं। ऐसे में सिसोदिया के जेल जाने की आशंका भी गहराने लगी थी। वहीं विपक्षी भाजपा दो-दो मंत्रियों के जेल जाने की बात कह कर हमला बोलने लगी थी।
सुस्त पड़ सकती प्रमुख योजनाओं की रफ्तार
दिल्ली सरकार में केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया की जिम्मेदारी दूसरे नंबर की थी। वह दिल्ली सरकार के 33 में से 18 विभागों को संभाल रहे थे। यदि अदालत सिसोदिया को न्यायिक हिरासत में जेल भेज देती तो शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी व लोक निर्माण विभाग से जैसे अहम विभागों के कामकाज प्रभावित होने लगते। इन विभागों के जरिए जनता से जुड़ी कई प्रमुख योजनाएं संचालित होती हैं। ऐसे में सिसोदिया के जेल जाने से दिल्ली में प्रमुख योजनाओं की रफ्तार सुस्त पड़ सकती थी।
कई चुनौतियों से निजात पाने की कोशिश
सिसोदिया के जेल जाने से यदि दिल्ली सरकार का कामकाज प्रभावित होता जो अरविंद केजरीवाल विरोधियों के हमले में घिरते चले जाते। माना जा रहा है कि दिल्ली सरकार का कामकाज सुचारू रूप से चले और जनता से किए गए वादे पूरे किए जा सकें इसके लिए भी इन मंत्रियों पर इस्तीफे का दबाव बनने लगा था। माना जा रहा है कि केजरीवाल ने सिसोदिया और सत्येंद्र जैन का इस्तीफा लेकर एकसाथ कई चुनौतियों का जवाब देने की कोशिश की है। वैसे वक्त ही बताएगा कि यह कोशिश कितनी कारगर साबित हुई।
मजबूरी में हटाया- BJP
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि भाजपा के दबाव के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त अपने दो मंत्रियों को मजबूरी में हटाना पड़ा है। उनके पास अब कोई रास्ता ही नहीं बचा था। सत्येंद्र जैन पिछले नौ महीनों से जेल में बंद थे जिनकी जमानत भी नहीं हो रही थी। इसके बावजूद केजरीवाल ने उनको मंत्री बनाए रखा गया था। मनीष सिसोदिया के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आ चुके हैं। जब पानी सिर से गुजरा तब जाकर उनको हटाया गया है।
AAP ने बताया, क्यों दिया इस्तीफा
वहीं आम आदमी पार्टी ने प्रेस कांफ्रेंस करके कहा है कि केंद्र सरकार ने मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें परेशान कर रही है। इन ईमानदार मंत्रियों ने अपना इस्तीफा अरविंद केजरीवाल जी को भेजा है। चूंकि दिल्ली में बेहद छोटी कैबिनेट है। दिल्ली सरकार में मुख्यमंत्री और उनके साथ छह मंत्री काम करते हैं। सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के पास अहम विभाग थे। इनकी अनुपस्थिति में दिल्ली के लोगों का काम प्रभावित नहीं हो इसी वजह से इन्होंने अपने इस्तीफे दिए हैं।
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