होम PoK में बगावत की आग तेज! इन्फ्लुएंसर रनिमा शाजमा का बड़ा बयान, बोलीं- ‘हिंदुस्तान से हाथ मिला लो’
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है. गुरुवार को आंदोलन का 16वां दिन रहा, जहां रावलकोट समेत कई इलाकों में हजारों लोग अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे रहे.
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है. गुरुवार को आंदोलन का 16वां दिन रहा, जहां रावलकोट समेत कई इलाकों में हजारों लोग अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे रहे. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी प्रशासन और सेना आंदोलन को दबाने के लिए विभिन्न तरह के दबाव बना रही है.
PoK की चर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रनिमा शाजमा ने एक वीडियो जारी कर पाकिस्तान सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया कि लोगों के साथ हो रहे व्यवहार और कथित दमन को देखते हुए PoK के लोगों को भारत के साथ संबंध मजबूत करने पर विचार करना चाहिए.
रनिमा शाजमा ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने कभी भी PoK के लोगों के हितों को प्राथमिकता नहीं दी और वर्तमान हालात इस बात को और स्पष्ट करते हैं. उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है.
रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्रित होकर अपनी मांगों को उठा रहे हैं. आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि वे अपने राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं.
अवामी एक्शन कमेटी के सदस्य सरदार अमान खान ने भी सभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान की नीतियों की आलोचना की. उन्होंने कहा कि क्षेत्र के भविष्य का फैसला वहां के लोगों को करने दिया जाना चाहिए और जनता की आवाज को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.
प्रदर्शनकारियों और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं. रिपोर्टों के अनुसार, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने और कई स्थानों पर लोगों को कठिनाइयों का सामना करने की शिकायतें सामने आई हैं.
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा कश्मीर को लेकर किए जाने वाले दावों और जमीनी हालात में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है. इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शनकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
आंदोलन में शामिल होने के आरोप में 128 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किए जाने की खबरें सामने आई हैं. साथ ही कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि धरनों में शामिल होने पर सेवानिवृत्त सैनिकों के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
इन कदमों के बाद प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच टकराव और बढ़ता दिखाई दे रहा है. आंदोलन से जुड़े संगठन इसे जनता की आवाज दबाने का प्रयास बता रहे हैं.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया बयान को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है. संसद में दिए गए उनके बयान पर आंदोलनकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ऐसे बयान क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को आहत करने वाले हैं और इससे असंतोष और बढ़ सकता है.
PoK में 9 जून से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब लंबे आंदोलन का रूप ले चुका है. प्रदर्शनकारी लगातार अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं, जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार और प्रशासन हालात को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं.
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर कोई राजनीतिक समाधान निकल पाता है या नहीं.
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