होम भिंडरावाले की राह पर अमृतपाल, भारत के लिए बन सकता है सिरदर्द; कैसे हुआ उभार?
भिंडरावाले की राह पर अमृतपाल, भारत के लिए बन सकता है सिरदर्द; कैसे हुआ उभार?
'वारिस पंजाब दे' के नए नेता के रूप में अमृतपाल सिंह संधू का उदय पंजाब ही नहीं बल्कि भारत के लिए भी चिंता का विषय है। अमृतपाल सिंह की हालिया गतिविधियों ने केंद्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों को चौंका दिया है।
खालिस्तान के अलगाववादी विचार को खुले तौर पर आगे बढ़ाते हुए, अमृतपाल राष्ट्रवाद के सिद्धांत को चुनौती दे रहा है। अमृतपाल का तर्क है कि जब 'हिंदू राष्ट्र' की मांग हो सकती है तो सिख संप्रभुता के लिए अलग 'खालिस्तान' की मांग क्यों नहीं कर सकता।
पंजाब में हो रहा भिंडरावाले 2.0 का उदय?
अमृतपाल सिंह की कथित विचारधारा जरनैल सिंह भिंडरावाले की है। यहां तक कि वह जरनैल सिंह भिंडरावाले की तरह कपड़े भी पहनता है और उसे अपनी "प्रेरणा" कहता है। जरनैल सिंह भिंडरांवाले पंजाब में सिखों के धार्मिक समूह दमदमी टकसाल का प्रमुख लीडर था। भारतीय सेना द्वारा 1 से 8 जून 1984 के बीच आपरेशन ब्लू स्टार के दौरान खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले खत्म कर दिया गया था। अमृतपाल के मामले में सुरक्षा प्रतिष्ठानों का मानना है कि अभी "भयभीत होने का समय अभी नहीं आया है।" साथ ही उनका यह भी मानना है कि पंजाब में अमृतपाल सिंह का उदय अच्छे संकेत नहीं हैं। ठीक इसी तरह भिंडरावाले का उदय हुआ था। हालांकि पहले की तरह अब बाहरी ताकतें भारत में खत्म हो चुकी हैं। पंजाब में भी चरमपंथी हिंसा अब नहीं दिखती है।
क्यों भिंडरावाले जैसा है ताजा घटनाक्रम?
भिंडरावाले ने एक बड़े पत्रकार की हत्या कर दी थी। जैसे ही पुलिस ने उसका और उसके आदमियों का पीछा किया, वैसे ही उसके समूह ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया। सरकार को आखिरकार घोषणा करनी पड़ी की कि मामले में भिंडरावाले के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। इसके बाद भिंडरावाले हीरो बन गया। ठीक उसी तरह अमृतपाल सिंह के समर्थकों ने पुलिस पर दबाव बनाते हुए अपने सहयोगी लवप्रीत सिंह उर्फ तूफान को रिहा करा लिया।
असल में ‘‘भिंडरावाले 2.0’’ है अमृतपाल सिंह?
अमृतपाल सिंह केवल खालिस्तान समर्थक है या वह असल में ‘‘भिंडरावाले 2.0’’ है? सफेद चोला और गहरे नीले रंग की पगड़ी पहने तथा अक्सर हथियारबंद समर्थकों के साथ घिरे रहने वाला कट्टरपंथी उपदेशक अमृतपाल कुछ समय से पंजाब में काफी सक्रिय है। अमृतसर शहर के बाहरी इलाके में अजनाला में सैकड़ों हथियारबंद लोगों द्वारा एक थाने में घुसने की घटना के केंद्र में रहा 29 वर्षीय अमृतपाल वह नाम है जिसने केंद्र और राज्य, दोनों सरकार को निशाने पर लिया है। उसने सत्ता प्रतिष्ठान को झुकने और एक प्रमुख सहयोगी को रिहा करने के लिए मजबूर किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी दी।
बृहस्पतिवार को अमृतपाल के कुछ समर्थकों ने हथियार लहराए, अवरोधक तोड़ दिए तथा अजनाला में एक थाने पर धावा बोल दिया, जहां अपहरण के एक मामले में आरोपी लवप्रीत सिंह उर्फ तूफान को रिहा करने की मांग की गई। अधिकारियों के मुताबिक, झड़प के दौरान कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। रूपनगर जिले के चमकौर साहिब निवासी बरिंदर सिंह को कथित रूप से अगवा करने और पिटाई करने के आरोप में अमृतपाल सिंह और उसके 30 समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
भिंडरावाले के गांव में बना था ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रमुख
दुबई में रह चुके अमृतपाल सिंह को हाल में अभिनेता और कार्यकर्ता दीप सिद्धू द्वारा स्थापित संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रमुख नियुक्त किया गया था। सिद्धू की पिछले साल फरवरी में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। यह कार्यक्रम मारे गए आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले के पैतृक गांव मोगा जिले के रोड में आयोजित किया गया था। इससे पहले अमृतपाल सिंह अपने परिवार के ट्रांसपोर्ट के कारोबार में काम करता था। सिंह को उस संगठन का प्रमुख बनाया गया जिसे सिद्धू ने ‘‘पंजाब के अधिकारों की रक्षा करने और सामाजिक मुद्दों को उठाने के’’ नाम पर बनाया था।
अमित शाह को दे चुका इंदिरा जैसा अंजाम भुगतने की धमकी
भिंडरावाले का अनुयायी होने का दावा करने वाले अमृतपाल सिंह ने पिछले कुछ हफ्तों के दौरान कुछ विवादित भाषण दिए हैं। अमृतसर के जल्लूपुर खेड़ा गांव का रहने वाला सिंह मारे गए आतंकी भिंडरावाले की तरह हथियारबंद लोगों के साथ घूमता है। अमृतपाल के कुछ समर्थक उसे ‘‘भिंडरावाले 2.0’’ कहते हैं। उसने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को हाल में कथित तौर पर धमकी दी थी, जिसमें कहा गया था कि उनका हश्र पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसा होगा।
कट्टरपंथी अतीत का कोई रिकॉर्ड नहीं है
द इंडियन एक्सप्रेस ने पंजाब पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से कहा है कि अमृतपाल के कट्टरपंथी अतीत का कोई रिकॉर्ड नहीं है। अमृतसर जिले के बाबा बकाला डिवीजन के जल्लूपुर खेड़ा गाँव में जन्मा अमृतपाल 2012 में दुबई चला गया था। तब वह 19 वर्ष का था। अपने चाचा के साथ उनके परिवहन व्यवसाय में काम करता था। यह दिखाने के लिए कोई सबूत मौजूद नहीं है कि वह किसी भी तरह से दुबई या अन्य जगहों पर किसी कट्टरपंथी आंदोलन से जुड़ा था। वह हाल तक एक मोना सिख (बिना दाढ़ी और पगड़ी वाला सिख) था। इसलिए उसका ट्रांसफॉर्मेशन हैरान करने वाला है। हालांकि अभी भी संदेह है कि उसे कुछ ताकतें सहारा दे रही हैं। लेकिन न तो पंजाब पुलिस और न ही केंद्र सरकार को इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी है कि अमृतपाल के उदय और गतिविधियों के पीछे कौन है?
पाकिस्तान रच रहा साजिश!
अमृपाल कहता है कि पंजाब के युवा नशे में इसलिए हैं क्योंकि उन्होंने अमृत (पवित्र जल) नहीं चखा (सिख धर्म में बपतिस्मा की एक परंपरा) है। उसका कहना है कि केंद्र सरकार सिखों को इसलिए अपमानित कर रहा है क्योंकि सिख कमजोर हैं; वे कमजोर हैं क्योंकि उन्होंने अमृत का स्वाद नहीं चखा है। पिछले साल अक्टूबर से वह युवाओं के लिए बपतिस्मा समारोह आयोजित कर रहा है। भिंडरावाले भी सिक्खों को शुद्ध होने के लिए कहता था। सूत्रों ने कहा कि अमृतपाल के उदय को किसान विरोध के दौरान बनाए गए अविश्वास के माहौल और पंजाब की राजनीति में उतार-चढ़ाव की स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
खालिस्तान का विचार व्यावहारिक रूप से मर चुका था, लेकिन भारत और विदेशों में कुछ तत्वों ने फायदा उठाने की कोशिश की है। कट्टरवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए पंजाब सीमा पर बड़ी संख्या में ड्रोन देखे गए हैं। यह एक संकेत है कि पाकिस्तान हथियार भेजकर मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। पंजाब में भिंडरावाले के नेतृत्व में भी अलगाववादी ताकतें सशक्त हो रही थीं जिन्हें पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा था।
एनआरआई से की है अमृतपाल ने शादी
इस महीने की शुरुआत में, सिंह ने अपने पैतृक गांव जल्लूपुर खेड़ा में एक सादे समारोह में ब्रिटेन में रहने वाली अनिवासी भारतीय (एनआरआई) किरणदीप कौर से शादी की। यह पूछे जाने पर कि क्या वह अपनी एनआरआई पत्नी के साथ अमृतसर में ही रहेगा जैसा कि वह युवाओं से विदेश नहीं जाने के लिए कहता रहा है, अमृतपाल सिंह ने कहा कि उसकी शादी ‘रिवर्स माइग्रेशन’ का एक उदाहरण है। सिंह ने कहा कि वह और उसकी पत्नी पंजाब में रहेंगे।
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।