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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Jun 24, 2026 08:29 PM

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया दावा! 200 किलो चांदी की ईंटों का क्या हुआ? सिंधी समाज ने उठाए बड़े सवाल

अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा विवाद के बीच अब सिंधी समाज की ओर से भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विश्व सिंधी सेवा संगम के पदाधिकारियों और दानदाताओं ने दावा किया है कि उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए वर्ष 2021 में 200 किलो चांदी की ईंटें दान की थीं

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया दावा! 200 किलो चांदी की ईंटों का क्या हुआ? सिंधी समाज ने उठाए बड़े सवाल

अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा विवाद के बीच अब सिंधी समाज की ओर से भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विश्व सिंधी सेवा संगम के पदाधिकारियों और दानदाताओं ने दावा किया है कि उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए वर्ष 2021 में 200 किलो चांदी की ईंटें दान की थीं, लेकिन आज तक उन्हें इस दान की कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी गई। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा है कि दान में दी गई चांदी का आखिर उपयोग कहां और कैसे किया गया।

2021 में मंदिर निर्माण के लिए दी गई थीं 200 चांदी की ईंटें

सिंधी समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार यह मामला उस समय का है जब राम मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभिक चरण में था। समाज के लोगों ने मिलकर एक-एक किलो वजन की 200 चांदी की ईंटें तैयार करवाई थीं और उन्हें मंदिर निर्माण के लिए दान स्वरूप सौंपा था।

बताया गया है कि उस समय दान की गई चांदी का मूल्य करीब डेढ़ करोड़ रुपये था। समाज के लोगों का कहना है कि यह चांदी राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी चंपत राय को सौंपी गई थी।

रसीद नहीं मिलने पर उठे सवाल

विश्व सिंधी सेवा संगम के राजू मनवानी ने बताया कि 26 जनवरी 2021 को यह चांदी मंदिर निर्माण के लिए सौंपी गई थी। उनका कहना है कि दान स्वीकार करने के बावजूद उस समय कोई रसीद जारी नहीं की गई।

न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान राजू मनवानी ने कहा कि चंपत राय ने उस समय चांदी की जांच और उसके उपयोग की प्रक्रिया का हवाला देते हुए तत्काल रसीद देने से इनकार किया था। इसके बाद से अब तक दान की गई चांदी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

दान की गई चांदी का इस्तेमाल कहां हुआ?

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अब सिंधी समाज यह जानना चाहता है कि उनके द्वारा दान की गई 200 किलो चांदी का उपयोग आखिर किस उद्देश्य के लिए किया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया है कि क्या इस चांदी को पिघलाकर मंदिर निर्माण में इस्तेमाल किया गया या फिर इसका कोई अन्य उपयोग हुआ।

राजू मनवानी ने यह भी कहा है कि मौजूदा समय में इस चांदी की कीमत कई गुना बढ़ चुकी है। उनके अनुसार वर्ष 2021 में जिसकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये थी, उसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 6 से 7 करोड़ रुपये के बीच आंकी जा रही है।

चढ़ावा विवाद के बीच बढ़ी पारदर्शिता की मांग

राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और दान विवादों के बीच विभिन्न पक्षों की ओर से पारदर्शिता की मांग लगातार तेज हो रही है। सिंधी समाज का कहना है कि दानदाताओं को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनके द्वारा दिए गए योगदान का उपयोग किस प्रकार किया गया।

अब इस मामले में सिंधी समाज की ओर से उठाए गए सवालों के बाद चांदी की ईंटों और उनके उपयोग को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर ट्रस्ट या जांच एजेंसियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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