होम शरद या उद्धव, अजित या शिंदे..बीजेपी और कांग्रेस गठबंधन के सीट बंटवारे में किसका चला सिक्का?

समाचारदेश Alert Star Digital Team Oct 29, 2024 08:19 PM

शरद या उद्धव, अजित या शिंदे..बीजेपी और कांग्रेस गठबंधन के सीट बंटवारे में किसका चला सिक्का?

शरद या उद्धव, अजित या शिंदे..बीजेपी और कांग्रेस गठबंधन के सीट बंटवारे में किसका चला सिक्का?

शरद या उद्धव, अजित या शिंदे..बीजेपी और कांग्रेस गठबंधन के सीट बंटवारे में किसका चला सिक्का?

महाराष्ट्र के चुनावी दंगल का पहला पड़ाव खत्म हो गया है. राज्य की सभी 288 सीटों पर नामांकन दाखिल करने की समय-सीमा खत्म हो चुकी है. पर्चा दाखिल करने के बाद दोनों गठबंधन के बीच सीट शेयरिंग का विवाद भी पूरी तरह सुलझ गया है.

महाराष्ट्र में एनडीए की तरफ से सबसे ज्यादा सीटों पर बीजेपी और इंडिया गठबंधन की तरफ से कांग्रेस चुनाव लड़ रही है.

हालांकि, सवाल अजित पवार, शरद पवार, एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे को लेकर है. पार्टियों में टूट की वजह से पिछले 5 साल में यही 4 नेता महाराष्ट्र की सियासत के केंद्र में थे.

88 सीट झटकने में कामयाब रहे सीनियर पवार

शरद पवार की संयुक्त एनसीपी पिछली बार 125 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. 2023 में पार्टी में टूट हो गई और बड़े नेताओं के साथ भतीजे अजित एनडीए में चले गए. लोकसभा चुनाव में शरद पवार को 9 सीटें मिली थी. विधानसभा वार देखा जाए तो शरद की पार्टी को इस बार सिर्फ 55 के आसपास सीटें मिलनी थीं, लेकिन शरद पवार ने इंडिया गठबंधन से 88 सीटें झटक ली है.

शरद पवार की पार्टी अब तक 88 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुकी है. इनमें अधिकांश सीटें ऐसी हैं, जहां से 2019 में एनसीपी चुनाव लड़ चुकी है. शरद पवार 88 सीट लेने में कैसे कामयाब हुए, यह सियासी चर्चा का विषय बना हुआ है.

पवार को अधिकांश पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा की सीटें मिली हैं. यह पवार का गढ़ कहा जाता है.

बड़ी बगावत करने वाले अजित 60 से कम पर सिमटे

2023 में अजित पवार ने बड़ी बगावत की थी. 42 विधायकों के साथ-साथ अजित ने एनसीपी के सभी बड़े नेताओं को अपने पाले में ले लिया था. एनडीए में अजित की हिस्सेदारी बड़ी मानी जा रही थी, लेकिन उन्हें 60 से भी कम सीटें ही लड़ने के लिए मिली हैं.

अजित को सेटिंग-गेटिंग के साथ-साथ उन सीटों पर ही लड़ने का मौका मिला है, जहां उनके पास मजबूत उम्मीदवार थे. हालांकि, अजित के अधिकांश उम्मीदवार चाचा शरद के कैंडिडेट के खिलाफ ही मैदान में ताल ठोक रहे हैं.

उद्धव ठाकरे ने मारी एकनाथ शिंदे से बाजी

2022 में शिवसेना में टूट हुई. एक गुट एकनाथ शिंदे के साथ है तो दूसरा गुट उद्धव ठाकरे के साथ. उद्धव ठाकरे गुट कांग्रेस और शरद पवार के साथ गठबंधन के तहत चुनावी मैदान में है. वहीं दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे का गठबंधन बीजेपी और अजित पवार के साथ है.

सीट बंटवारे में एकनाथ शिंदे के मुकाबले उद्धव ठाकरे ने बाजी मार ली है. उद्धव गुट अब तक 85 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुका है. गुट की तरफ से 95 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की रणनीति है.

उद्धव ने उन सीटों पर भी उम्मीदवार उतारा है, जहां पिछली बार कांग्रेस मजबूत थी. इनमें बांद्रा पूर्व, रामटेक और नासिक पश्चिमी सीट शामिल हैं.

दूसरी तरफ शिंदे को 80 से भी कम सीटों पर लड़ने का मौका मिला है. शिंदे गुट को मुंबई और ठाणे-कोकण की ही अधिकांश सीटों पर लड़ने का मौका मिला है. 2019 में संयुक्त शिवसेना ने 124 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे.

सीट बंटवारे में बीजेपी और कांग्रेस को नुकसान

सीट बंटवारे में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को नुकसान हुआ है. 2019 में बीजेपी 152 सीटों पर उम्मीदवार उतारी थी. इस बार पार्टी ने 148 सीटों पर कैंडिडेट खड़े किए हैं. बीजेपी के साथ-साथ उसकी छोटी पार्टियों को भी नुकसान हुआ है.

आरपीआई (अठावले) को पिछली बार 6 सीटों पर लड़ने को मिली थी. इस बार उसे सिर्फ 1 सीटों पर लड़ने का मौका मिला है. सीट शेयरिंग में कांग्रेस को भी नुकसान उठाना पड़ा है. कांग्रेस ने इस बार 102 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं.

कहा जा रहा है कि पार्टी कुछ और सीटें चाह रही है, लेकिन गठबंधन में अब उसकी डिमांड पूरी हो, इसकी संभावनाएं कम है. 2019 में कांग्रेस पार्टी ने 125 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. हालांकि, उसे जीत सिर्फ 44 सीटों पर ही मिली थी.

288 सीटों पर 20 नवंबर को चुनाव, 23 को नतीजे

महाराष्ट्र विधानसभा की सभी 288 सीटों पर 20 नवंबर को चुनाव प्रस्तावित है. इन सीटों पर 23 नवंबर को नतीजे आएंगे. महाराष्ट्र में इस बार महामुकाबला एनडीए (बीजेपी, शिवसेना-शिंदे और एनसापी-अजित) का इंडिया (कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव) और एनसीपी-शरद) का है.

राज्य में सरकार बनाने के लिए 145 विधायकों की जरूरत होती है. 2019 में 105 सीटों पर जीत हासिल कर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. कांग्रेस को सबसे कम 44 सीटों पर जीत मिली थी. शिवसेना को 56 और एनसीपी को 54 सीटों पर जीत मिली थी.

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