होम UP विधानसभा उपचुनाव: कांग्रेस को 2 सीट से ज्यादा नहीं देने पर क्यों अड़े अखिलेश? जानें वजह

प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Oct 23, 2024 09:09 PM

UP विधानसभा उपचुनाव: कांग्रेस को 2 सीट से ज्यादा नहीं देने पर क्यों अड़े अखिलेश? जानें वजह

UP विधानसभा उपचुनाव: कांग्रेस को 2 सीट से ज्यादा नहीं देने पर क्यों अड़े अखिलेश? जानें वजह

UP विधानसभा उपचुनाव: कांग्रेस को 2 सीट से ज्यादा नहीं देने पर क्यों अड़े अखिलेश? जानें वजह

उत्तर प्रदेश में 9 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस साथ लड़ेंगे या नहीं? अगर लड़ेंगे तो समझौता कितनी सीटों पर होगा? सीटें कौन-कौन सी होगी? इसको लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है.

हालांकि TV9 डिजिटल को मिली जानकारी के मुताबिक तस्वीर बहुत कुछ साफ हो चुकी है.

समाजवादी पार्टी की ओर से कांग्रेस को यह बता दिया गया है कि उन्हें जो दो सीटें दी गई है, उन्हें उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ना होगा. सपा यूपी कांग्रेस के दबाव में नहीं आने वाली है.

सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव ने राहुल गांधी से फोन पर बात की है और यह बात भी दिया है कि गठबंधन के लिए तय की गई दो सीटों पर कांग्रेस को चुनाव लड़ना चाहिए. अगर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी यूपी में चुनाव मिलकर नहीं लड़ते हैं तो इसे इंडी गठबंधन को उत्तर प्रदेश में नुकसान उठाना पड़ सकता है. साथ ही इससे एक गलत मैसेज भी जाएगा, जिसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है.

कांग्रेस-सपा में प्रेशर की राजनीति

हालांकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रही है और इसी कोशिश के तहत यह भी कहा गया कि कांग्रेस उन दो सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी. हालांकि समाजवादी पार्टी ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस को गठबंधन में रहना चाहिए और उन्हें दो सीटों पर चुनाव भी लड़ना चाहिए.

फिलहाल अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के किसी भी सदस्य से बात नहीं कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने अपने प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी और उदयवीर सिंह को अधिकृत किया है. अखिलेश यादव की बात सीधे कांग्रेस के आलाकमान से हो रही है. खबर यह भी है कि कांग्रेस इसके लिए तैयार भी है.

सीटों को लेकर कांग्रेस-सपा में कशमकश

अब आपको बताते हैं कि आखिर समाजवादी पार्टी कांग्रेस के दबाव में क्यों नहीं आ रही है? समाजवादी पार्टी के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त बताया कि अगर समाजवादी पार्टी कांग्रेस के दबाव में आकर तीन या चार सीटें देती है तो इसका खामियाजा उन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव में उठाना पड़ सकता है. अगर अभी कांग्रेस 9 सीटों में से तीन या चार सीट लेती है तो इसी अनुपात में विधानसभा चुनाव में भी सीटें मांगेंगे, साथ ही कांग्रेस जीत का अनुपात बेहद कम हैं जिसको देखते हुए समाजवादी पार्टी के लिए देना संभव नहीं है.

समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस गठबंधन में तो रहे, लेकिन एक छोटे साझेदारी के तौर पर. सपा के रणनीतिकार मानते हैं कि यूपी में कांग्रेस का अपना कोई बेस नहीं है. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जो सीट जीती वह समाजवादी पार्टी के कोर वोट बैंक की वजह से.. कांग्रेस के पास फिलहाल मौजूदा विधानसभा में सिर्फ दो सीटें ही हैं.

सपा का मानना है कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव में अपने अकेले के बूते कोई कमाल नही कर सकती. समाजवादी पार्टी कांग्रेस के लिए मजबूरी है और जरूरी भी. हालांकि समाजवादी पार्टी में कुछ रणनीतिकार इस बात को मानते हैं कि यूपी में कांग्रेस को साथ रखना चाहिए. इसके पीछे उनका अपना तर्क है, उनका मानना है कि कांग्रेस की होने की वजह से दलित और मुस्लिम वोटरों में बिखराव को रोका जा सकता है.

लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन का मिला है फायदा

कांग्रेस और सपा को इसका फायदा भी 2024 के लोकसभा चुनाव में मिल चुका है. ऐसे में गठबंधन तोड़ने का रिस्क ना तो समाजवादी पार्टी लेना चाहती है और ना ही कांग्रेस. इसलिए कहा जा रहा है कि शायद कांग्रेस समाजवादी पार्टी के दो सीटों के प्रस्ताव को स्वीकार कर सकती है.

यूपी में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन दबाव की राजनीति की भेंट चढ़ेगा या फिर तय शर्तों पर ही आगे बढ़ेगा यह फैसला अब कांग्रेस के पाली में है. कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि अगर वह सपा के दी हुई दो सीटों पर चुनाव लड़ते हैं तो इससे कार्यकर्ताओं में निराशा आएगी यह मैसेज जाएगा कि जो सीटें सपा जीत नहीं सकती, उन्हें दो सीटों को कांग्रेस के लिए छोड़ दिया गया है.

सपा के रूख से प्रियंका गांधी नाराज

इतना ही नहीं खबर यह है कि प्रियंका गांधी की टीम इस बात को लेकर भी नाराज है कि समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में बिना किसी बैठक कर आपसी सहमति के ही अपनी 6 सीटें घोषित कर दी, जबकि गठबंधन का साथी होने की वजह से उन्हें कांग्रेस को भी विश्वास में लेकर बातचीत के बाद ही सीटों की घोषणा करनी चाहिए थी.

खुद समाजवादी पार्टी जो जीत नहीं सकती उसे ही कांग्रेस के लिए छोड़ा है. समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को गाजियाबाद और खैर सीट दी है. माना जाता है कि यह दोनों सीट बीजेपी की परंपरागत सीट हैं. ऐसे में उपचुनाव में यहां जीत दर्ज करना कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर साबित होने वाला है.

खबर तो यह भी है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय मझवां से अपने बेटे शांतनु राय को लड़ाने चाहते हैं, जबकि फूलपुर से गांधी परिवार के गरीबी मनीष मिश्रा के लिए मांग रहे हैं. जिन पांच सीटों की कांग्रेस ने मांग की थी उसमें मुरादाबाद की कुंदरकी सीट भी है. हालांकि तमाम सीटों पर समाजवादी पार्टी ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी है. आज समाजवादी पार्टी के फूलपुर की उम्मीदवार ने नामांकन भी दाखिल कर दिया है.

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)