होम शादी की उम्र के फैसले पर ओवैसी के सवाल, 18 साल की उम्र में PM चुन सकते हैं, तो साथी क्यों नहीं?
शादी की उम्र के फैसले पर ओवैसी के सवाल, 18 साल की उम्र में PM चुन सकते हैं, तो साथी क्यों नहीं?
भारत सरकार लड़कियों की शादी की उम्र 18 साल से बढ़ाकर 21 साल करने की तैयारी में है। जिसको लेकर केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी भी मिल गई है। लेकिन केंद्र सरकार के इस फैसले को लेकर अभी से विरोध भी शुरू हो गया है। एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी शादी की उम्र के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 18 साल में बालिग हो सकते हैं तो शादी क्यों नहीं? ओवैसी का कहना है कि 18 साल की उम्र में प्रधानमंत्री चुन सकते हैं तो शादी क्यों नहीं कर सकते। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के पितृत्ववाद का एक बहुत अच्छा उदाहरण है। 18 साल की उम्र में, एक भारतीय नागरिक अनुबंध पर हस्ताक्षर कर सकता है, व्यवसाय शुरू कर सकता है, प्रधानमंत्री चुन सकता है और सांसदों और विधायकों का चुनाव कर सकता है।ओवैसी ने कहा कि मेरा विचार है कि लड़कों के लिए 21 आयु सीमा घटाकर 18 कर दी जानी चाहिए।एआईएमआईएम प्रमुख ने आगे कहा और कहा कि इस सरकार ने महिलाओं के उत्थान के लिए कुछ नहीं किया है। भारत में बाल विवाह आपराधिक कानून के कारण नहीं बल्कि शिक्षा और थोड़ी आर्थिक प्रगति के कारण कम हुआ है। इसके बावजूद सरकारी दृश्य हमें बताते हैं कि लगभग 12 मिलियन बच्चों की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो रही है। इस सरकार ने महिलाओं के उत्थान के लिए कुछ नहीं किया। कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी 2005 में 26 प्रतिशत थी, 2020 में यह घटकर 16 प्रतिशत रह गई। उन्होंने आगे सुझाव दिया कि विधानसभा चुनाव लड़ने की उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए। ओवैसी ने कहा कि डेटा संरक्षण विधेयक में, आपको डेटा साझा करने का अधिकार है लेकिन आप एक भागीदार नहीं चुन सकते हैं। यह किस तरह का तर्क है? इसलिए मुझे लगता है कि यह एक गलत कदम है। मेरे विचार में, उम्र में 21 विधानसभा चुनाव लड़ने का अधिकार दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि अब निजता एक मौलिक अधिकार है। कोई चुन सकता है कि किससे शादी करनी है, कोई यह चुन सकता है कि बच्चा कब होगा।
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