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बारिश ने किसानों की समस्याओं को दो गुना बढ़ाया
नई दिल्ली। किसान आंदोलन का रविवार को 39 वां दिन है। कड़कड़ाती ठंड और कोहरे समेत कई अन्य तरह की मुसीबतों के बावजूद दिल्ली की सीमाओं पर किसान अभी भी डटे हुए हैं। रविवार सुबह आई बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। किसानों द्वारा बनाए गए तम्बुओं में पानी भरने लगा और ओढ़ने के कम्बल भी भींगने लगे। गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसान जहां एक तरफ सर्द भरी हवाओं से जूझ रहे थे, तो वहीं अचानक आई बारिश ने किसानों की समस्याओं को दो गुना बढ़ा दिया। किसान जहां एक तरफ बारिश से कैसे बचा जाए, इसकी तैयारी कर रहा था, तो वहीं बॉर्डर पर खाने की सामग्रियों को भी बचाने के लिए जूझता दिखा। किसानों की स्थिति बताते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया, जैसे पहाड़ो पर बारिश का पानी नीचे गिरता है उसी तरह यहां की स्थिति बनी हुई है। किसानों के टेंट यहां लगे हुए हैं। किसान यहां बीते एक महीने से रह रहे हैं।मैं अपील करना चाहूंगा किसान भाइयों से कि जो भी किसान गाजीपुर बॉर्डर पर आएं, वो अपने ट्रैक्टर पर पॉलीथिन, त्रिपाल अन्य सारी चीजें लेकर आएं। प्रदर्शनकारी किसान ने बताया कि, ये परमात्मा की मर्जी है और किसान अन्नदाता और परमात्मा यही दो शक्ति है। जो अन्नदाता खेतों में काम करता था वह सड़क पर है। सरकार को तुरंत कानूनों को वापस लेना चाहिए और नए वर्ष पर किसानों को शुभकामनाएं देना चाहिए।
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